विदेश/फ्रांस : ''गर्दन काट देंगे, पैटी जैसा हाल करेंगे'': 17 साल की 'मिला' को मिली धमकियां

    दिनांक 08-जून-2021   
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स्कूली शिक्षक सैमुअल पैटी की बर्बर हत्या के बाद, फ्रांस ने मजहबी उन्माद को लगाम लगाने की कोशिशें तो की हैं, लेकिन अब सोशल मीडिया के जरिए मिल रहीं धमकियों ने 'मिला' का किया जीना मुश्किल  
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मजहबी उन्मादियों की नफरत के निशाने पर 'मिला'

मजहबी कट्टरवादियों ने फ्रांस की 18 साल की 'मिला' का जीना दुश्वार बना दिया है। वह रातों को सो नहीं पाती, न ही कोई काम ठीक से कर पाती है। दिन में भी उसे अनजाना भय सताए रहता है। उसे लगता है कोई उसे मारने आ रहा है। सोशल मीडिया पर जिहादी तत्वों की उसे मारने की धमकियों के चलते फिलहाल वह पुलिस की हिफाजत में रह रही है।
 
आखिर ऐसा किया क्या था 'मिला' ने? इंस्टाग्राम पर उसका अकाउंट 'मिला' नाम से है। उसने पिछले साल एक पोस्ट की थी जिसे लेकर कट्टर मजहबी भड़के हुए हैं। उनका मानना है कि वह इस्लाम विरोधी थी। हालत यह है कि उसे गर्दन काटने, टुकड़े—टुकड़े करने की धमकियां दी जा रही हैं। पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ये लोग 18 से 80 वर्ष के बीच के हैं। ये ही जिन्होंने प्रमुख रूप से 'मिला' को सोशल साइट पर कंपा देने वाली धमकियां दी हैं। जान से मारने की धमकियां दी हैं। एक मजहबी उन्मादी ने लिखा है, ''तुम्हारी गर्दन कलम कर देनी चाहिए।'' एक ने लिखा, ''मैं तुम्हारे साथ वही करने वाला हूं जो सैमुअल पैटी के साथ किया गया था।'' 'मिला' की जान को खतरा महसूस करते हुए उसे पुलिस की सुरक्षा में रखना पड़ा है।

सैमुएल पैटी और 'मिला' के प्रकरणों से साफ है कि इस्लामी कट्टरवाद दुनियाभर में नफरत फैला रहा है। यह हर सभ्य समाज के लिए खतरा पैदा कर रहा है। यूरोप के कई देश इससे परेशान हैं, खासकर वे जिन्होंने 'बड़ा दिल' दिखाते हुए, 'शरणार्थियों' को अपने यहां बसने दिया है।

दक्षिण-पूर्वी फ्रांस के लायन की है मिला। पिछले साल सोशल मीडिया पोस्ट पर उसने कुरान को लेकर टिप्पणी की थी जिसे मजहबी कट्टरवादियों ने इस्लाम विरोधी मान लिया। इंस्टाग्राम पर उसने इस्लाम को लेकर भी टिप्पणी की थी। इसके बाद मिला ने टिकटॉक पर एक और पोस्ट की। उस दौरान मोहम्मद का रेखाचित्र दिखाने के कारण मजहबी उन्मादियों ने फ्रांस के ही शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या कर दी थी।

अब धमकियों की वजह से 'मिला' को अपना स्कूल तक छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। फ्रांस में अब 'आलोचना के अधिकार' को लेकर बहस छिड़ी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां ने भी 'मिला' का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि कानून मत—पंथों की निंदा करने, आलोचना करने और उन पर रेखाचित्र बनाने आदि की छूट देता है।

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सैमुअल पैटी की हत्या के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया था   (फाइल चित्र) 

लेकिन 'मिला' भयभीत है। 3 जून को अदालत में बयान देने के लिए उसके मुंह से शब्द ही नहीं निकले। 'मिला' के वकील रिचर्ड ने बताया कि 'मिला' को सोशल मीडिया पर लगभग 100,000 नफरती संदेश भेजे गए हैं, जिनमें उसे जान से मारने की धमकियां हैं।

सैमुएल पैटी और 'मिला' के प्रकरणों से साफ है कि इस्लामी कट्टरवाद दुनियाभर में नफरत फैला रहा है। यह हर सभ्य समाज के लिए खतरा पैदा कर रहा है। यूरोप के कई देश इससे परेशान हैं, खासकर वे जिन्होंने 'बड़ा दिल' दिखाते हुए, 'शरणार्थियों' को अपने यहां बसने दिया है। फ्रांस हो या जर्मनी, कनाडा हो या ब्रिटेन...हर उस देश में मजहबी उन्माद बढ़ता जा रहा है, जहां कानून सबको बराबरी के साथ जीने के अधिकार देता है। कुछ समय पहले, पैटी की हत्या के बाद फ्रांस ने अपने कानून कड़े किए हैं। इस्लामी कट्टरता को लगाम लगाने की कोशिशें तेज की हैं। बुर्के और हिजाब को लेकर नियम सख्त किए हैं।