अफगानिस्तान : कहर बरपा रहा तालिबान, सरकार मांग रही मदद भारत-रूस-चीन से

    दिनांक 10-जुलाई-2021   
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अफगानिस्तान से अमेरिकी और नाटो फौज के जाने के बाद से तालिबान ने अफगान सेना पर हमले तेज कर दिए हैं। उसके लड़ाकों ने अफगानिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इन परिस्थितियों में अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब ने अपील की है कि भारत, रूस और चीन की सेनाओं सहित बाकी देश तकनीकी रूप से मदद करें या आतंकवाद विरोधी अभियान का समर्थन करें।
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अक्तूबर 2019 में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अब्दुल्ला मोहिब से भेंट की थी (फाइल चित्र) 
तालिबान के अफगानिस्तान में तेज उभार से काबुल चिंतित है। सहायता के लिए उसने भारत सहित रूस और चीन से अपील की है
अफगानिस्तान की सरकार चिंता से ग्रस्त है। इसलिए क्योंकि तालिबानी उन्मादी तेजी से उसके इलाकों पर कब्जा करते जा रहे हैं। काबुल ने आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में भारत, रूस और चीन से सैन्य मदद मांगी है। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस बीच पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा है कि 'बाहरी ताकतों को हमारे देश के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देनी चाहिए'।
उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी और नाटो फौज के जाने के बाद से तालिबान ने अफगान सेना पर हमले तेज कर दिए हैं। इस कट्टर इस्लामी गुट का दावा है कि उसके लड़ाकों ने अफगानिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है। उसकी इस बढ़त से परेशान अफगानिस्तान सरकार ने भारत, रूस और चीन से मदद का हाथ बढ़ाने को कहा है। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब ने अपील की है कि भारत, रूस और चीन की सेनाओं सहित बाकी देश तकनीकी रूप से मदद करें या आतंकवाद विरोधी अभियान का समर्थन करें।
पाकिस्तान को फटकार
अफगानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि किसी भी 'बाहरी देश' को अफगानिस्तान की सरकार के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''शांति और स्थिरता तभी संभव है जब इलाकाई और बाहरी सहयोग बराबर मिले। हम बाहरी भागीदारों से हमारी रक्षा और सुरक्षा बलों को आतंकवाद से लड़ने में मदद करने की अपील करते हैं।''
तालिबान है एक राजनीतिक ताकत
हमदुल्ला ने कहा कि उन्हें भारत, रूस और चीन से मदद सहित सभी तरह की बाहरी सहायता की उम्मीद है, वे उसका स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि अफगानी अधिकारियों ने तालिबान के अस्तित्व को अफगानिस्तान के भीतर अन्य गुटों के साथ एक वैध राजनीतिक ताकत के रूप में मान्यता दी है।
लेकिन असलियत यह है कि इस 'वैध राजनीतिक ताकत' ने अफगानिस्तान के कितने ही शहरों और गांवों पर बंदूक के बल पर कब्जा कर लिया है। इस बीच मॉस्को में 'शांति सम्मेलन' में तालिबान के एक बड़े नेता शहाबुद्दीन डेलावर ने कहा कि पूरी दुनिया ने हाल में शायद देखा हो कि अफगानिस्तान का 85 प्रतिशत इलाका हमारे कब्जे में आ गया है। 9 जुलाई को तालिबान ने अफगान-ईरान सीमा पर इस्लाम किला के सीमांत शहर और अबू नासा फराही बॉर्डर चौकी पर भी कब्जा कर लिया है।