इस्लामी जगत : कश्‍मीर पर बेवजह टांग अड़ा रहा ओआईसी, भारत ने सुनाई खरी-खरी

    दिनांक 10-जुलाई-2021   
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जून, 2020 में ओआईसी ने कश्मीर पर एक आपातकालीन बैठक की थी। जम्मू-कश्मीर को लेकर 1994 में बनाए गए ओआईसी के 'संपर्क समूह' के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के संबंध में अनेक प्रस्ताव पारित किए गए थे। ओआईसी के उक्त समूह की उस बैठक में अजरबैजान, नाइजीरिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की सम्मिलित हुए थे।
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ओआईसी के सेक्रेटरी जनरल यूसुफ अल-ओथइमीन और भारतीय राजदूत औसफ सईद     (फाइल चित्र) 
पाकिस्तान के कथित उकसावे पर ओआईसी की भारत के अंदरूनी मामलों में बिना मतलब की बयानबाजी और दबाव की कोशिश
हाल ही में इस्लामी देशों के सबसे बड़े संगठन ओआईसी के जनरल सेक्रेटरी ने जेद्दाह में भारत के राजदूत के साथ बातचीत में अपनी तरफ से कश्‍मीर और भारतीय मुसलमानों के मुद्दे का जिक्र किया। ओआईसी का जनरल सेक्रेटरी व्यावहारिक तौर पर संगठन का कार्यकारी प्रमुख माना जाता है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले कुछ वक्त से बार-बार ओआईसी में कश्मीर का राग अलापते आ रहे हैं। वे इस्लामी देशों के इस गुट को कश्मीर पर बोलने को उकसाते रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि संभवत: इसी वजह से ओआईसी के कार्यकारी प्रमुख ने भारत के राजदूत से भारत के मुसलमानों के संबंध में बात करते हुए न सिर्फ कश्‍मीर का विषय उठाया बल्कि कश्मीर में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का प्रस्‍ताव भी रखा। इतना ही नहीं, इस अवसर पर उन्‍होंने भारत और पाकिस्‍तान के बीच वार्ता आयोजित करने को भी कहा।
भारतीय राजदूत औसफ सईद के साथ ओआईसी के सेक्रेटरी जनरल यूसुफ अल-ओथइमीन के बीच 5 जुलाई को हुई इस 'सौजन्य भेंट' के बाद ओआईसी की तरफ से एक वक्तव्य भी जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि ओआईसी के सेक्रेटरी जनरल ने भारत के राजदूत सईद के साथ बात करते हुए भारत में मुसलमानों के कथित चिंताजनक हालात और जम्‍मू-कश्‍मीर विवाद की समीक्षा की। लेकिन ओआईसी के इन बयानों और 'चिंता' पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया की है। 8 जुलाई को भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके ओआईसी को पाकिस्तान जैसे निहित स्वार्थी देशों को अपना मंच भारत विरोधी दुष्प्रचार के लिए उपलब्ध न कराने को कहा।
पाकिस्‍तान की जिद और ओआईसी
बता दें कि दो वर्ष पूर्व भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने ओआईसी की बैठक में भाग लिया था। इस बैठक के लिए यूएई ने भारत को विशेष रूप से न्योता भेजा था। इसे भारत की दृष्टि से एक बड़ी कूटनीतिक सफलता की तरह देखा गया था। तब पाकिस्‍तान ने इसका विरोध किया था और मार्च, 2019 में संपन्न विदेश मंत्रियों की बैठक का बहिष्‍कार किया था। शायद इसी वजह से बाद की बैठकों में भारत को नहीं बुलाया गया था।
जून, 2020 में ओआईसी ने कश्मीर पर एक आपातकालीन बैठक की थी। जम्मू-कश्मीर को लेकर 1994 में बनाए गए ओआईसी के 'संपर्क समूह' के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के संबंध में अनेक प्रस्ताव पारित किए गए थे। ओआईसी के उक्त समूह की उस बैठक में अजरबैजान, नाइजीरिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की सम्मिलित हुए थे। ओआईसी के जनरल सेक्रेटरी यूसुफ ने कहा कि ओआईसी इस्लामी शिखर वार्ता, विदेश मंत्रियों की परिषद और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने को लेकर प्रतिबद्ध है।