पाकिस्‍तान: पति के प्रेम संबंध का बदला लेने के लिए महिला के कपड़े उतारे

    दिनांक 10-जुलाई-2021   
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पाकिस्‍तान के कुछ इलाकों में अभी भी कबिलाई कानून लागू है। इसके तहत अगर कोई पुरुष कोई कुकर्म करता है तो उस परिवार की महिला को उसकी सजा भुगतनी पड़ती है।
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पाकिस्तान में कबिलाई संस्‍कृति का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। खैबर पख्‍तूनख्‍वा के डेरा इस्‍माइल खान जिले में तीन पुरुषों ने एक महिला के कपड़े उतार कर उसे नग्‍न कर दिया। उन्‍होंने महिला की बहन के साथ उसके पति के कथित प्रेम संबंध का बदला लेने के लिए ऐसा किया।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यह शर्मनाक घटना 6 जुलाई की है। पुलिस ने मामले को रफा-दफा करने के लिए मामूली धारा के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने पाकिस्‍तान दंड संहिता की धारा 354 के तहत प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें कपड़े उतारने का कोई जिक्र नहीं था। महिला एक शादी समारोह से लौट रही थी, तभी हथियारों से लैस लोगों ने उसे रोक लिया। उन्होंने ‘बदला लेने के लिए उस पर हमला’ किया। जिस समय हथियारबंद लोग महिला की इज्‍जत उतार रहे थे, उस समय लोग मूक दर्शक बने तमाशा देख रहे थे। बाद में आरोपी महिला को नग्‍न छोड़कर भाग गए।
बता दें कि पाकिस्‍तान के कुछ इलाकों में अभी भी कबिलाई कानून चलते हैं। महिला के साथ ‘बदले की कार्रवाई’ उसी कबिलाई कानून का नमूना है। यानी पुरुष द्वारा किए गए कुकर्मों की ‘क्षतिपूर्ति’ के लिए महिलाओं को मजबूर किया जाता है। कठोर कानून के अभाव में इस जिले में भी इस तरह के कबिलाई कानून प्रचलन में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में इस तरह की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 2018 में भी शहर के बाहरी इलाके में एक लड़की को निर्वस्‍त्र कर घुमाया गया था। उस समय भी पुलिस मुख्‍य आरोपी को नहीं पकड़ पाई थी। एक साल बाद उसने आत्‍मसमर्पण किया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सुलह करा कर इस अपराध में शामिल सभी सातों आरोपियों को माफ कर दिया गया।
स्‍थानीय लोगों का कहना है कि खैबर पख्‍तूनख्‍वा जिले में यह चलन फल-फूल रहा है। दुख की बात है कि महिलाओं को अपने पति या परिवार के अन्य पुरुषों के गलत कामों के लिए सजा भुगतनी पड़ती है। अधिकारों के लिए लड़ने वाले वकील जीनत मुहिब काका खेल ने कहा कि उनका मानना है कि कपड़े उतारने के मामले को अन्य अपराधों के साथ धारा 345 में भी शामिल किया जा सकता है। खेल ने कहा, "पाकिस्‍तान दंड संहिता की धारा 354 और 506/34 के तहत दर्ज प्राथमिकी प्रासंगिक धाराएं हैं, जिसके तहत आरोपी को दंडित करने के लिए मामले की जांच की जा सकती है।"
शीर्ष अदालत की टिप्‍पणी: खैबर पख्‍तूनख्‍वा पुलिस भ्रष्‍ट और अक्षम
पाकिस्‍तान की सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को खैबर पख्‍तूनख्‍वा पुलिस पर सख्‍त नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने हत्‍या के एक मामले में आरोपी की जमानत की सुनवाई करते हुए प्रांतीय पुलिस को भ्रष्‍ट और अक्षम करार दिया। द नेशन की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति काजी फैज ईसा और न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह की दो सदस्यीय पीठ ने हवेलियां में अपने पड़ोस में एक महिला की कथित हत्या के मामले में अमजद खान की गिरफ्तारी के बाद जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कार्यवाही के दौरान अदालत ने हत्या के मामले में मुकदमा पूरा नहीं करने पर अभियोजन पक्ष और पुलिस पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति काजी फैज ईसा ने कहा कि पेशावर हाईकोर्ट ने तीन महीने में मुकदमा पूरा करने का आदेश दिया था, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अदालत के आदेश की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि खैबर पख्‍तूनख्‍वा पुलिस पुलिस भ्रष्ट और अक्षम थी, क्योंकि उसे जांच की जानकारी नहीं थी। पुलिस कुछ टीवी नाटक देखकर बहुत कुछ सीख सकती है। न्‍यायमूर्ति ईसा ने टिप्पणी की कि अगर पुलिस को जांच करना ही नहीं आता तो लोगों का पैसा क्यों बर्बाद किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पुलिस को इसी तरह से काम करना है तो पूरे खैबर पख्तूनख्वा पुलिस विभाग को खत्म कर देना ही बेहतर होगा।