स्मृति ईरानी पर अभद्र टिप्पणी करने वाले शहरयार अली को नहीं मिली राहत

    दिनांक 10-जुलाई-2021   
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मार्च महीने में फेसबुक पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर अभद्र टिप्पणी करने वाले शहरयार अली की हो सकती है गिरफ्तारी। सर्वोच्च न्यायालय ने अली को राहत न देते हुए कहा कि आप किसी की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन अभद्र भाषा का प्रयोग कर अपमान नहीं कर सकते।
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पुलिस की गिरफ्त में शहरयार अली           (फाइल चित्र) 
गत 9 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने फिरोजाबाद के एसआरके कॉलेज से निलंंबित इतिहास के प्राध्यापक शहरयार अली को राहत नहीं दी। अब उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। उल्लेखनीय है कि अली ने मार्च, 2021 में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के विरुद्ध फेसबुक पर अश्लील टिप्पणी की थी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने उसे निलंबित कर दिया था और तीन सदस्यीय जांच दल भी बना दिया था। इसके साथ ही भाजपा के एक कार्यकर्ता ने अली के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और आई टी कानून की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया था। इसके बाद अली को गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद ही उसे जमानत मिल गई थी। इस दौरान अली ने मामले को खत्म करने के लिए कई तरह की चालें चलीं, पर वह सफल नहीं हो पाया। तब उसने इलाहबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। वहां से भी उसे गिरफ़्तारी से राहत नहीं दी गई। उच्च न्यायालय ने माना था कि अली की पोस्ट से दो समुदायों में तनाव पैदा हो सकता था, इसलिए उसके प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती है। इसके बाद अली ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अली की ओर से बहस करने वाले अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि अली का फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया था। साथ ही कहा कि पोस्ट की जानकारी मिलते ही माफीनामा पोस्ट किया गया। इस पर न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ का कहना था कि लगता है बाद में यह कहानी गढ़ी गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सोशल मीडिया का प्रयोग किसी को बदनाम करने के लिए नहीं किया जा सकता। इसलिए न्यायालय ने अली की गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई।