राजस्‍थान के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं, झुलसाती गर्मी में ऊंट पर बैठकर बच्‍चों के घर पढ़ाने जाते हैं शिक्षक

    दिनांक 10-जुलाई-2021   
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कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान स्कूल बंद होने के कारण राजस्थान के बाड़मेर में शिक्षक 'स्कूलों' को छात्रों के दरवाजे तक ले जाकर अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि महामारी के दौरान उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।
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कोरोना महामारी के कारण रोजगार, व्‍यापार पर ही नहीं, बच्‍चों की पढ़ाई भी चौपट हो गई है। इस महामारी के कारण डेढ़ साल से स्‍कूल बंद हैं। ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है, लेकिन ऐसे छात्रों की तादाद बड़ी है, जिनके पास स्‍मार्टफोन, लैपटॉप और कम्‍प्‍यूटर नहीं हैं कि वे ऑनलाइन पढ़ाई कर सकें। नेटवर्क भी नहीं हैं। इन अभावों का रोना रोने की बजाए राजस्‍थान के बाड़मेर के शिक्षक मिसाल पेश कर रहे हैं। दूसरों को सिखा रहे हैं कि चुनौतियों से निपटने के लिए जोश, जुनून और जज्‍बा चाहिए।
दरअसल, कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान स्कूल बंद होने के कारण राजस्थान के बाड़मेर में शिक्षक 'स्कूलों' को छात्रों के दरवाजे तक ले जाकर अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि महामारी के दौरान उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। महामारी के बीच छात्रों की मदद के लिए अतिरिक्त प्रयास करके शिक्षक ऊंट से तपते रेगिस्तानी इलाकों या मोबाइल नेटवर्क तक सीमित पहुंच वाले छात्रों के घरों तक पहुंच रहे हैं।
 
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राज्‍य के शिक्षा विभाग के निदेशक सौरव स्वामी ने कहा कि राज्‍य के करीब 75 लाख छात्रों में अधिकांश के पास मोबाइल फोन नहीं हैं। इसे देखते हुए राज्‍य सरकार ने फैसला किया कि शिक्षक हफ्ते में एक दिन कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के घर जाएंगे, जबकि 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के घर दो बार जाएंगे। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर हम सब कठिन दौर से गुजर रहे हैं। इस तरह के हालात में हम शिक्षा के साथ समझौता नहीं कर सकते हैं। ये शिक्षक बाड़मेर जिले में अपने स्‍कूलों तक पहुंचने के लिए दिन में तीन बार ऊंट की सवारी करते हैं। इसे देखते हुए प्रयास किए जा रहे हैं कि शिक्षकों को कम से कम परेशानी हो। बहरहाल, शिक्षकों के इस प्रयास को स्‍कूल प्रशासन भी सराह रहा है। भीमथल के शासकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल रूप सिंह जाखड़ कहते हैं, ‘‘ऐसे शिक्षक प्रशंसा के पात्र हैं। इस तरह के प्रयासों को जारी रखना चाहिए। बाड़मेर में छात्रों के पास संसाधन की कमी है। लेकिन राज्य सरकार के निर्देश के बाद हम लोगों के साथ अधिकतम प्रयास किए जा रहे हैं। शुरू में थोड़ी दिक्कत आई लेकिन अब धीरे-धीरे शिक्षक भी अभ्‍यस्‍त हो चुके हैं। कुछ शिक्षक वास्‍तव में छात्रों को समय पर नियमित नोट्स मुहैया कराने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमने 100 छात्रों को चुना है कि उनके घर पहुंचना है। मैं शिक्षकों की इस टीम को नमन करता हूं और धन्‍यवाद देता हूं।’’