यूपी की नई जनसंख्या नीति - दो से अधिक संतान वाले माता- पिता होंगे सरकारी सुविधाओं से वंचित

    दिनांक 12-जुलाई-2021   
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उत्तर प्रदेश की नई जनसंख्या नीति घोषित कर दी गई है.  दो से अधिक संतान वाले माता - पिता को कई सरकारी सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा. नई नीति का पालन करने वाले सरकारी छूट और अन्य  सुविधाओं से लाभान्वित होंगे.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर नई जनसंख्या नीति की घोषणा की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “देश की बढ़ती हुई जनसंख्या विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा है. प्रदेश सरकार की नई जनसंख्या नीति से समाज के हर वर्ग को जुड़ना होगा. इस जनसंख्या नीति से समाज, प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा. जनसंख्या नियंत्रण पर पिछले चार दशकों से चर्चा हो रही थी. देश की गरीबी का एक मुख्य कारण जनसंख्या भी है. जनसंख्या नीति में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है. दो बच्चों के बीच अंतर बहुत जरूरी है. दो बच्चों के जन्म में अंतर न होने की वजह से कुपोषण का खतरा भी बना रहता है. नई जनसंख्या नीति में जनसंख्या नियंत्रण में सहयोग करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है. जो लोग इसका उल्लंघन करेंगे उनको कई प्रकार की सरकारी सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा.”


उत्तर प्रदेश की नई जनसंख्या नीति के अनुसार,  जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे होंगे, सरकारी नौकरी के लिए उनकी पात्रता समाप्त मानी जायेगी. दो से अधिक बच्चों के माता- पिता अगर नौकरी में हैं तो ऐसे लोगों को पदोन्नति नहीं मिलेगी. किसी तरह की सब्सिडी नहीं मिलेगी. स्थानीय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. ऐसे अभिभावकों कों 77 तरह की सरकारी योजनाओं व अनुदान का लाभ नहीं मिल पायेगा. इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद एक वर्ष के भीतर सभी सरकारी कर्मियों व स्थानीय निकाय में चुने गए जनप्रतिनिधियों को शपथ पत्र देना होगा. शपथ पत्र देने के बाद भी अगर वे तीसरी संतान पैदा करते हैं तो प्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द किया जाएगा.

दो या एक संतान वाले माता – पिता को नई जनसंख्या नीति के अनुसार प्रोन्नति, वेतन वृद्धि, आवास योजनाओं में छूट और अन्य भत्ते दिए जायेंगे. सरकारी कर्मचारियों को पूरी सेवा काल में दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि, पूरे वेतन और भत्तों के साथ मातृत्व या पितृत्व अवकाश और राष्ट्रीय पेंशन योजना के अंतर्गत नियोक्ता अंशदान कोष में तीन प्रतिशत की वृद्धि मिलेगी. नई जनसंख्या नीति के अनुसार दो बच्चे पैदा करने वाले ऐसे माता –पिता जो सरकारी नौकरी में नहीं हैं. उन लोगों को पानी, बिजली, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट व अन्य सुविधाएं देने का प्रस्ताव किया गया है. माध्यमिक स्कूलों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी प्रस्ताव है.

किशोरों और वृद्धजनों की डिजिटल ट्रैकिंग की जाएगी. 11 वर्ष  से 19 वर्ष के किशोरों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन के अलावा, बुजुर्गों की देखभाल को महत्व दिया जाएगा. अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, अमित मोहन प्रसाद ने इस मौके पर बताया कि नई जनसंख्या नीति नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे सहित अनेक रिपोर्ट के अध्ययन के बाद तैयार की गई है. नई नीति जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों को तेज करने वाली होगी.