कोरोना की दोनों डोज लगी हैं तो एक लाख में केवल छह लोगों को ही जान जाने का खतरा

    दिनांक 13-जुलाई-2021   
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कोरोना की दूसरी लहर में सामने आया है कि जिन लोगों ने कोरोना की दोनों डोज ली हुई थीं उन्हें अस्पताल में जाने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके अलावा एक डोज लेने वाले व्यक्ति की हालत में ज्यादा खराब नहीं हुई

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कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए कोरोना की वैक्सीन लेने बेहद जरूरी है। ऐसे में लापरवाही न करें और तत्काल वैक्सीन लगवाएं। हाल ही में एक शोध सामने आया है जिसमें बताया गया है कि कोरोना की दोनों वैक्सीन लेने वाले लोगों को कोरोना से बहुत ज्यादा खतरा नहीं है। यह शोध आईसीएमआर ने फ्रंटलाइन वर्कर्स पर स्टडी करने के बाद सामने आया है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के डायरेक्टर जनरल डॉ. बलराम भार्गव का कहना है कि हाल ही में देशभर में फ्रंटलाइन वर्कर्स पर एक स्टडी की गई है। इसमें स्टडी में एक लाख से ज्यादा फ्रंटलाइन वर्कर्स को शामिल किया गया था। स्टडी में पाया गया कि वैक्सीन की दोनों डोज कोरोना से होने वाली मौतों के खिलाफ 95 प्रतिशत तक सुरक्षा देती है। वहीं इसकी सिंगल डोज 82 प्रतिशत तक मौतों को रोक सकती है।
उनका कहना है कि अगर व्यक्ति को वैक्सीन की दोनों डोज लगी हो और उसमें कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े को देखा जाए तो एक लाख में से केवल 6 मौतें ही दोनों डोज के बाद हो सकती हैं। वहीं एक डोज के बाद एक लाख में से 21 लोगों की ही जान जा सकती है।
डॉ. भार्गव का कहना है कि हमारी स्टडी में यह भी पाया गया है कि इस वक्त जो वैक्सीन हम देश में लगा रहे हैं, वह अल्फा, डेल्टा जैसे वैरियंट पर कारगर है और लोगों को अच्छी सुरक्षा मिलती है। कोविशील्ड, कोवैक्सीन में से कोई भी वैक्सीन लगवा सकते हैं। वैक्सीन का मकसद कोरोना से होने वाली गंभीरता और मौतों को रोकना है।