पाकिस्तान : मलाला को चमकाने वाली स्कूली किताबें जब्त, निजी स्कूल कर रहे मलाला के एजेंडे का पर्दाफाश

    दिनांक 14-जुलाई-2021   
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पाकिस्तान के स्कूल बोर्ड ने पंजाब सूबे के स्कूलों और दुकानों से उस किताब की सारी प्रतियां जब्त करने की मुहिम शुरू की है जिसमें देश की कई विभूतियों के बीच मलाला के बारे में छापा गया है
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मलाला यूसुफजई  (फाइल चित्र)


पाकिस्तान के पंजाब सूबे में सरकार ने नोबल पुरस्कार प्राप्त मलाला के अध्याय वाली 7वीं कक्षा की किताबों को आखिरकार जब्त कर ही लिया। किताब में मलाला को देश की महान विभूतियों के साथ छापा गया है। दरअसल मलाला को इस तरह स्कूली किताब में चित्र के साथ छापे जाने पर पाकिस्तान में पिछले दिनों एक बड़ा बवाल खड़ा हुआ था। लोगों ने सोशल मीडिया पर इस विषय में खूब नाराजगी जाहिर की थी। लेकिन अब उन तमाम किताबों को सरकार ने जब्त कर लिया है। लोगों में मलाला द्वारा इस्लाम को लेकर दिए गए विवादित बयानों की वजह से गुस्सा है।

अंग्रेजी दैनिक डॉन में छपी रिपोर्ट बताती है कि प्रशासन ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित 7वीं कक्षा की समाज विज्ञान की सभी किताबें जब्त कर ली हैं। इनमें 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मारे गए सैन्य अधिकारी मेजर अजीज भट्टी और अन्य विभूतियों के साथ ही मलाला की तस्वीर भी छापी गई थी। खबर कहती है कि ये किताबें स्कूलों में भेजी जा चुकी थीं, इसलिए अब स्कूलों और किताब बेचने वालों के यहां छापे मारकर किताबें जब्त की जा रही हैं।

पाकिस्तान का निजी स्कूल संघ मलाला के खिलाफ मैदान में उतर आया है। उसने 12 जुलाई को ही मलाला पर एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई, जिसमें इस्लाम, निकाह और पश्चिमी एजेंडे पर आधारित उनके विचारों को दर्शाया गया है। उसका कहना है कि मलाला इस्लाम विरोधी हैं। वे इस्लाम, निकाह के विरुद्ध पश्चिमी देशों का एजेंडा चला रही हैं।
 
पाकिस्तान का निजी स्कूल संघ अभी 12 जुलाई को 24 साल की हुईं मलाला के खिलाफ मैदान में उतर आया है। उसने 12 जुलाई को ही मलाला पर एक डॉक्यूमेंट्री 'आई एक नॉट मलाला' दिखाई, जिसमें इस्लाम, निकाह और पश्चिमी एजेंडे पर आधारित उनके विचारों को दर्शाया गया है। उसका कहना है कि मलाला इस्लाम विरोधी हैं। वे इस्लाम, निकाह के विरुद्ध पश्चिमी देशों का एजेंडा चला रही हैं। वे पश्चिमी देशों के एजेंडे पर चलकर इस्लाम को कमजोर करने में लगी हैं। स्कूल संगठनों का कहना है कि देश में 2 लाख निजी स्कूल हैं और अब इन सब स्कूलों में यह डॉक्यूमेंट्री दिखाकर छात्रों को मलाला की असलियत बताई जाएगी। स्कूल संगठनों की मानें तो वे निजी स्कूलों के माध्यम से दो करोड़ युवाओं को मलाला के एजेंडे की असलियत के बारे में बताएंगे ताकि कोई युवा मलाला के चक्कर में न आए। बता दें कि 2014 में मलाला को नोबल शांति पुरस्कार दिया गया था।