पाकिस्‍तानी सांसद ने कहा- अफगानिस्‍तान में तालिबानी आतंकियों को भेजता है पाकिस्‍तान

    दिनांक 14-जुलाई-2021   
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पाकिस्‍तानी सांसद मोहसिन डावर ने तालिबान को समर्थन देने के लिए इमरान सरकार पर तीखा हमला बोला है। पश्‍तून नेता ने कहा कि यह पाकिस्‍तान ही है, जो अफगानिस्‍तान में आतंकियों को भेजता है। राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी और सरकार के अधिकारी खुलेआम अफगानिस्‍तान में इस्‍लामाबाद की भूमिका को स्‍वीकार करते हैं और युद्धग्रस्‍त देश में आतंकियों को निर्यात करते हैं।
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पाकिस्‍तानी सांसद मोहसिन डावर

पाकिस्‍तान के संसद में डावर ने कहा कि अफगानिस्‍तान में तालिबान पाकिस्‍तान का पसंदीदा है। उन्‍होंने ट्वीट किया, ‘‘तालिबान यहां से अफगानिस्तान को निर्यात किए जाते हैं, जबकि वित्त मंत्री और राष्ट्रपति अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अमरुल्ला सालेह के दावों को सही ठहराते हैं। तालिबान लड़ाकों के शवों को दफनाने के लिए पाकिस्तान वापस लाया जाता है। तालिबान को खुले तौर पर समर्थन दिया जा रहा है।’’ इसी के साथ उन्‍होंने संसद में दिए गए अपने एक बयान की वीडियो भी साझा किया।

मोहसिन डावर ने ऐसा क्‍यों कहा?

मोहसिन डावर पश्तून तहफुज मूवमेंट (पीटीएम) के नेता डावर हैं। राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी ने बयान दिया था कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि तालिबान और उनके देशवासियों को शांति और उपचार मिलेगा। इसी पर पलटवार करते हुए उन्‍होंने अपने संबोधन में डावर ने कहा कि इस तरह के बयान देना पड़ोसी देश पर हमला करने जैसा है। उन्‍होंने कहा, ‘‘आप उस आतंकी समूह का समर्थन कर रहे हैं, जिसके खिलाफ अफगान सेना लड़ रही है। जब हम अफगानिस्‍तान में तालिबानी आतंकियों के निर्यात का मुद्दा उठाते हैं, तो पाकिस्तान के अधिकारी कहते हैं कि हम ‘अफगान फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट अमरुल्ला सालेह’ के विचारों को प्रतिध्वनित कर रहे हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, वे हैं जो हैं अपने बयानों के जरिए सालेह के दावों को साबित करते हैं।’’

अफगानिस्‍तान के प्रति नीति नहीं बदली
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के प्रति पाकिस्‍तान की नीति नहीं बदली है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने अतीत में अफगानिस्तान के प्रति अपनी गलत नीतियों की भारी कीमत चुकाई है। जनजातीय जिलों में फिर से आतंकवादी जमा हो रहे हैं और उन्हें रोका नहीं जा रहा है। आतंकवाद को रोकने के लिए सदन में कोई बहस नहीं होती है।’’ डावर ने सवाल किया कि  कहा जा रहा है कि हम अफगानिस्तान में किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं करते हैं, तो टीवी चैनलों पर कौन प्रसारित कर रहा है कि अफगानिस्तान तालिबान के कब्जे में है?

पाकिस्‍तान की स्‍वीकारोक्ति

अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना की वापसी हो रही है। इस बीच, अफगानिस्‍तान में हिंसा बढ़ रही है, क्‍योंकि तालिबान ने नागरिकों और अफगान सेना व सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। तालिबान ने देश भर के कई जिलों पर नियंत्रण कर लिया है। अफगान अधिकारियों ने पाकिस्तान पर तालिबान आतंकियों को समर्थन देने और उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने का आरोप लगाया है। हालांकि, पर्याप्‍त सबूतों के बावजूद पाकिस्तान ने इन दावों का खंडन किया है। इसके अलावा, पाकिस्तान के मंत्री और अधिकारी गाहे-बजाहे बयान देते रहते हैं कि पाकिस्तान तालिबान की मेजबानी और समर्थन करता है। हाल ही में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद अहमद ने कहा कि अफगानिस्तान के तालिबानी परिवार उनके देश में रहते हैं, जिसमें राजधानी इस्लामाबाद भी शामिल है और कभी-कभी ‘विद्रोही संगठन’ के सदस्यों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में किया जाता है। उधर, अमेरिकी खुफिया आकलन है कि अमेरिकी सेना के हटने के कुछ ही महीनों के भीतर अफगानिस्‍तान की नागरिक सरकार तालिबान के अधीन हो सकती है।