सोशल मीडिया : प्रतिमा की हिन्दू आस्था पर ‘मिशन आंबेडकर’ के नफरती ट्वीट को वेंकटेश प्रसाद का कड़ा जवाब

    दिनांक 14-जुलाई-2021   
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हिन्दू धर्म के प्रति समर्पित, हिन्दू विरोधियों पर बेलाग टिप्पणी करने वाले पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद के चाहने वालों और 'फॉलोवर्स' की संख्या लगातार बढ़ रही है
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प्रतिमा की तस्वीर और (दाएं) वेंकटेश प्रसाद।


अभी दो दिन पहले अमेरिका के सुप्रसिद्ध अंतरिक्ष संस्थान नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी नासा ने एक ट्वीट साझा किया था जिसमें हिंदू देवी-देवताओं के साथ नई प्रशिक्षु प्रतिमा रॉय की तस्वीर थी। इस ट्वीट को देखते ही हिंदुत्व विरोेधियों ने हायतौबा मचानी शुरू कर दी। कुछ सेकुलरों ने कहा कि एक हिन्दू को खुद को देवी-देवताओं से घेरे रखने की क्या जरूरत है? ‘मिशन आंबेडकर’ भी इन्हीं में से एक था, जिसे वेंकटेश प्रसाद ने आड़े हाथों लिया है। 'मिशन आंबेडकर' ने ट्वीट किया, जिसमें लिखा था, “ये देखने के बाद हम कह सकते हैं-साइंस का नाश कर दिया नासा ने।” इस पर ट्वीट के जरिए ही प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी वेंकटेश प्रसाद ने लिखा, "उसकी (प्रतिमा रॉय) उपलब्धि पर खुश होने और उसके आस्थावान होने का मजाक उड़ाया जा रहा है। जबकि दूसरी ओर, डॉ. आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर की अच्छी सेहत के लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जा रहा है। बाबासाहब शर्मिंदा होंगे कि ये हैंडल उनका नाम इस्तेमाल कर रहा है।" वेंकटेश प्रसाद ने बाबासाहब आंबेडकर का नाम इस्तेमाल करके ऐसा नफरती ट्वीट करने वाले ट्विटर हैंडल को निशाने पर लिया।

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  वेंकटेश का ट्वीट जिसमें प्रकाश आंबेडकर के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए शिवलिंग पर दूध चढ़ाए जाने की जानकारी देता ट्वीट भी टैग किया गया है

'मिशन आंबेडकर' ने ट्वीट किया, जिसमें लिखा था, “ये देखने के बाद हम कह सकते हैं-साइंस का नाश कर दिया नासा ने।” इस पर ट्वीट के जरिए ही प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी वेंकटेश प्रसाद ने लिखा, "उसकी (प्रतिमा रॉय) उपलब्धि पर खुश होने और उसके आस्थावान होने का मजाक उड़ाया जा रहा है। जबकि दूसरी ओर, डॉ. आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर की अच्छी सेहत के लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जा रहा है। बाबासाहब शर्मिंदा होंगे कि ये हैंडल उनका नाम इस्तेमाल कर रहा है।" 

 उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर प्रतिमा और नासा को लेकर अशोभनीय टिप्पणियां करके बेमतलब का विवाद खड़ा कर दिया गया। प्रतिमा की धर्म के प्रति ऐसी आस्था देख कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों को गुस्सा आ गया। उन्होंने प्रतिमा के ‘वैज्ञानिक स्वभाव’ पर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने इतना भी सोचा कि इसी वैज्ञानिक स्वभाव के कारण प्रतिमा को नासा का प्रशिक्षु बनने मौका हासिल किया। कुछ ने तो नासा पर ही गलत टिप्पणी की कि वह 'विज्ञान को बर्बाद कर' रहा है। साफ है कि 'मिशन आंबेडकर' हैंडल को कोई ऐसा व्यक्ति या संगठन प्रयोग कर रहा है जिसे हिन्दू धर्म और देवी—देवताओं से नफरत है।