भारत - जापान की मित्रता का प्रतीक 'रुद्राक्ष' बनकर तैयार, पीएम करेंगे उद्घाटन

    दिनांक 14-जुलाई-2021   
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जुलाई को "रुद्राक्ष" अंतरराष्ट्रीय सहयोग सम्मेलन केंद्र का उद्घाटन करेंगे. उनके साथ जापान के प्रतिनिधि भी रहेंगे. रुद्राक्ष को जापानी शैली में सजाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘रुद्राक्ष’ कन्वेंशन सेंटर परिसर में रुद्राक्ष के पौधे भी लगाएंगे. उद्घाटन के दौरान ‘रूद्राक्ष’ कन्वेंशन सेंटर में इंडो – जापान कला और संस्कृति की झलक दिखेगी.
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प्रधानमंत्री  का वहां पर करीब 500 लोगों से संवाद करना भी प्रस्तावित है. यह भी संभावना है कि जापान के प्रधानमंत्री की शुभकामना, वीडियो संदेश के माध्यम से लोगों तक पहुंचे. दुनिया के सबसे प्राचीन और जीवंत शहर काशी को जापान ने दोस्ती की भेंट ‘रुद्राक्ष’ के रूप में दिया है. रुद्राक्ष में बड़े म्यूजिक कंसर्न, कांफ्रेंस, नाटक और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा सकेगा. इस कन्वेंशन सेंटर में दुनिया के बेहतरीन उपकरण और सुविधा उपलब्ध है.  कन्वेंशन सेंटर की नींव वर्ष  2015 में उस समय पड़ गई थी. जब जापान के प्रधानमंत्री, वाराणसी आये थे.


शिवलिंग की आकृति वाले वाराणसी कन्वेंशन सेंटर का नाम ‘रुद्राक्ष’ है. इसमें स्टील के एक सौ आठ रुद्राक्ष के दाने भी लगाए  गए हैं. वाराणसी के सिगरा में तीन एकड़ में 186 करोड़ रूपये की लागत से  रुद्राक्ष निर्मित हुआ है. इसमें  120 चार पहिया वाहन की पार्किंग  बेसमेंट में हो सकती है. भूतल और प्रथम तल पर हाल का निर्माण किया गया है. वियतनाम से कुर्सियां मंगाई गई हैं. एक समय पर 1200 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है. दिव्यांगों के लिए भी दोनों दरवाजों  के पास  व्हील चेयर का इंतज़ाम किया गया है. इसके अलावा आधुनिक ग्रीन रूम भी बनाया गया है.

जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी ने रुद्राक्ष  को निर्मित करने में फंड मुहैया कराया है. इसका डिजाइन  जापान की कंपनी ओरिएण्टल कंसल्टेंट ग्लोबल ने  बनाया है और निर्माण का काम भी जापान की फुजिता कॉरपोरेशन नाम की कंपनी ने किया है. रुद्राक्ष में छोटा जापानी गार्डन बनाया गया है.  110 किलोवाट की ऊर्जा के लिए सोलर प्लांट लगा गया है. वीआईपी रूट और उनके आने-जाने  का रास्ता भी अलग से बनाया गया है.


रुद्राक्ष को वातानुकूलित रखने के लिए इटली के उपकरण लगे हैं. दीवारों में लगी ईंट भी तापमान बढ़ने नहीं देती हैं और कॉन्क्रीट के साथ फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया गया  है. रुद्राक्ष का निर्माण  10 जुलाई 2018 को शुरू हुआ था. अब  भारत जापान की दोस्ती का प्रतीक रुद्राक्ष बन कर तैयार हो गया है.