कूटनीति : भारत ने की सीमा-विवाद सुलझाने की बात, चीन ने ओढ़ी चुप्पी

    दिनांक 15-जुलाई-2021   
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बीजिंग की साम्राज्यवादी नीति का एक खास पहलू है सीमा पर विवाद खड़ा करना, उसे और उलझाना। लेकिन दुशांबे में भारत ने सीमा पर अपना दृढ़ मत स्पष्टता से रखा 

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दुशांबे में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी एक दूसरे का अभिवादन करते हुए

लगभग 10 महीने बाद ताजिकिस्तान में दुशांबे में आमने-सामने बैठे भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बात तो हुई पर चीन के अड़ियल रुख के चलते कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उल्लेखनीय है कि पिछले करीब सवा साल से भारत और चीन के बीच लदृाख में चीन के बेवजह दखल को लेकर तनाव चला आ रहा है। लेकिन लगता है ड्रेगन की मंशा मामले को उलझाए रखने की है।

ताजिकिस्तान के दुशांबे में, 14 जुलाई को भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच ये बातचीत हुई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ इस द्विपक्षीय वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे तनाव पर चर्चा की। करीब एक घंटे तक चली इस वार्ता में जैसा पहले बताया, कोई सहमति नहीं बनी। लेकिन भारत ने अपनी तरफ से यह जरूर साफ कर दिया कि एलएसी पर चल रहे विवाद को और लटकाना दोनों देशों के लिए सही नहीं है। जयशंकर ने साफ कहा कि इस मुद्दे पर हालात जस के तस बनाए रखने वाली कोई कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस वार्ता के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट करके दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण भेंट की जानकारी दी।

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वार्ता के बाद विदेश मंत्री जयशंकर द्वारा किया गया ट्वीट

विदेश मामलों के विशेषज्ञ, विशेष रूप से पश्चिमी क्षेत्र में स्थित एलएसी पर हुई इस वार्ता को एक सकारात्मक कदम तो बताते हैं, लेकिन चीन के अड़ियल रवैए से बात आगे बढ़ने में रुकावट की भी आशंका जताते हैं। भारत की तरफ से कहा गया है कि संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति व स्थायित्व होना बेहद जरूरी है।

विदेश मामलों के विशेषज्ञ, विशेष रूप से पश्चिमी क्षेत्र में स्थित एलएसी पर हुई इस वार्ता को एक सकारात्मक कदम तो बताते हैं, लेकिन चीन के अड़ियल रवैए से बात आगे बढ़ने में रुकावट की भी आशंका जताते हैं। भारत की तरफ से कहा गया है कि संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति व स्थायित्व होना बेहद जरूरी है। इस दृष्टि से सेना के  वरिष्ठ कमांडरों के बीच जल्दी ही वार्ता होने पर सहमति बनना अच्छा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि दोनों पक्ष आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं।