अमेरिका : अब न बिकेंगी अमेरिकी बाजारों में सिंक्यांग में बनी चीजें

    दिनांक 17-जुलाई-2021   
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अमेरिका अपने बाजारों में चीन के सिंक्यांग प्रांत में बने सामानों पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। ओरेगन से सांसद जेफ मेर्कली ने कहा है कि उइगर और अन्य नस्लीय मुस्लिम समूहों का सिंक्यांग में उत्पीड़न हो रहा है, उनसे जबरन मजदूरी कराई जा रही है, उन पर अत्याचार की हदें पार की जा रही हैं, यातना शिविरों में ठूंसा जा रहा है, इन समुदायों की महिलाओं की जबरिया नसबंदी कराई जा रही है ताकि नस्ल पर रोक लग जाए। सांसद का कहना है कि उन मुस्लिमों के मजहबी-सांस्कृतिक जीवन का गला घोंटा जा रहा है।
सांसद मारको रूबियो और जेफ मेर्कली ने विधेयक के पास होने पर कहा है कि यह बीजिंग और हर उस अंतरराष्ट्रीय कंपनी को संकेत है जो सिंक्यांग में बंधुआ मजदूरी से आर्थिक फायदा ले रहे हैं। लेकिन अब ऐसा और नहीं चल सकता। 
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चीन की एक फैक्ट्री में उइगर मजदूर (फाइल चित्र)। प्रकोष्ठ में (बाएं) राष्ट्रपति जो बाइडेन और (दाएं) राष्ट्रपति शी जिनपिन 
उइगर उत्पीड़न पर चीन को बेपर्दा करने के लिए बाइडेन प्रशासन ने उठाया एक कड़ा कदम
अमेरिका अपने बाजारों में चीन के सिंक्यांग प्रांत में बने सामानों पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। ओरेगन से सांसद जेफ मेर्कली ने कहा है कि उइगर और अन्य नस्लीय मुस्लिम समूहों का सिंक्यांग में उत्पीड़न हो रहा है, उनसे जबरन मजदूरी कराई जा रही है, उन पर अत्याचार की हदें पार की जा रही हैं, यातना शिविरों में ठूंसा जा रहा है, इन समुदायों की महिलाओं की जबरिया नसबंदी कराई जा रही है ताकि नस्ल पर रोक लग जाए। सांसद का कहना है कि उन मुस्लिमों के मजहबी-सांस्कृतिक जीवन का गला घोंटा जा रहा है।
अत्याचार और मानवाधिकारों का दमन
पिछले दिनों, अमेरिकी सीनेट ने इस संबंध में एक विधेयक पारित किया है। इसके अनुसार, चीन के सिंक्यांग प्रांत में उइगरों के उत्पीड़न के जरिए बने सभी तरह के सामान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जैसा पहले बताया, अमेरिका ने उस प्रांत में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार और मानवाधिकारों के दमन के विरुद्ध यह फैसला किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने चीन में बंधुआ मजदूरी और उइगर मुसलमानों सहित दूसरे अल्पसंख्यकों के नरसंहार पर चीन को सही राह पर लाने की गरज से उसे इस तरफ आर्थिक झटका देने की योजना बनाई है।
फ्रांस में एक मानवाधिकारी संगठन ने सरकार से वहां के चार बड़े फैशन स्टोर को बंद कराने की मांग की है क्योंकि उनके द्वारा बेचे जा रहे कपड़े ज्यादातर सिंक्यांग की कंपनियों से बनकर आते हैं, जिन पर वे स्टोर अपने ब्रांड का ठप्पा लगाकर बेचते हैं। 
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फ्रांस का एक मशहूर फैशन ब्रांड (फाइल चित्र) 
सीनेट में चीन के प्रति यह कड़ा विधेयक प्रस्तुत किया था फ्लोरिडा से सांसद मारको रूबियो और ओरेगन से सांसद जेफ मेर्कली ने। इस विधेयक के पास होने पर उन्होंने एक बयान जारी करके कहा है कि यह बीजिंग और हर उस अंतरराष्ट्रीय कंपनी को संकेत है जो सिंक्यांग में बंधुआ मजदूरी से आर्थिक फायदा ले रहे हैं। लेकिन अब ऐसा और नहीं चल सकता। सांसदों ने यह भी कहा है कि मानवता के खिलाफ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के ऐसे अपराधों पर अमेरिका अब और आंखें नहीं मूंदे रह सकता।
सांसद मेर्कली ने खुलकर कहा कि उइगर और अन्य मुस्लिम समुदायों का सिंक्यांग में बहुत दमन किया जा रहा है। उन्हें झूठे मुकदमों में जेलों में ठूंसा जा रहा है, जबरिया नसबंदी कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी अमेरिकी संस्थानों का ऐसे उत्पीड़न से मुनाफा कमाना ठीक नहीं है। अमेरिकी खरीददारों को ऐसे सामान को नहीं खरीदना चाहिए।
चीन से दुनियाभर में जा रहे उत्पादों में एक बड़ा हिस्सा सिंक्यांग में बने सामान का होता है। बाइडेन सरकार ने पिछले कुछ हफ्तों में चीन सरकार के विरुद्ध प्रतिबंधों को और बढ़ा दिया है, चीन की कई कंपनियों पर पाबंदी लगाई है। हालांकि चीन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए तब कहा था कि चीन के हितों के विरुद्ध कुछ हुआ तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा।
फ्रांस में भी उठी प्रतिबंध की मांग
उल्लेखनीय है कि फ्रांस में भी एक भ्रष्टाचार विरोधी संगठन शेरपा, उइगर इंस्टीट्यूट आफ यूरोप और सिंक्यांग में प्रशिक्षु रह चुके एक उइगर मुस्लिम की संयुक्त शिकायत में सरकार से वहां के चार बड़े फैशन स्टोर को बंद कराने की मांग की है क्योंकि उनके द्वारा बेचे जा रहे कपड़े ज्यादातर सिंक्यांग की कंपनियों से बनकर आते हैं, जिन पर वे स्टोर अपने ब्रांड का ठप्पा लगाकर बेचते हैं। ताजा समाचार यह है कि इस शिकायत पर वहां अदालती जांच चल रही है। साफ है कि फ्रांस के लोग भी चीन में उइगरों के उत्पीड़न को लेकर गंभीर हैं और इन स्टोर को बंद कराने की मांग का समर्थन ज्यादा से ज्यादा संख्या में कर रहे हैं।