जम्मू-कश्मीर उच्‍च न्‍यायालय का नाम बदला, अधिसूचना जारी

    दिनांक 17-जुलाई-2021   
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केंद्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के संयुक्‍त उच्‍च न्‍यायालय का नाम बदल दिया गया है। अब इसका नाम जम्‍मू-कश्‍मीर एवं लद्दाख उच्‍च न्‍यायालय कर दिया गया है। इस बाबत केंद्रीय कानून एवं न्‍याय मंत्रालय ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी की है। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आदेश को प्रभावी बनाने के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर पुनर्गठन (कठिनाइयों का निवारण) आदेश-2021 पर हस्‍ताक्षर भी कर दिए हैं।
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दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश के उच्‍च न्‍यायालय का मौजूदा नाम कुछ ज्‍यादा ही लंबा है। इसलिए इसे देश के अन्‍य उच्‍च न्‍यायालयों के नाम की तरह आसान बनाने के लिए ही यह बदलाव किया गया है। आदेश में कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से नाम में बदलाव करने के प्रस्ताव पर विचार मांगे गए थे। इस पर केंद्र शासित प्रदेश जम्‍मू–कश्‍मीर के उपराज्‍यपाल ने 27 अक्‍तूबर, 2020 को और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्‍यपाल ने 20 अक्‍तूबर, 2020 को पत्र के माध्‍यम से उच्‍च न्‍यायालय का नाम बदलने के प्रस्‍ताव पर अपनी सहमति दी थी। इसमें कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए संयुक्‍त उच्‍च न्‍यायालय के तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीश ने 21 नवंबर, 2020 अपने पत्र में प्रस्‍तावित नाम पर कोई आपत्ति नहीं दी है।
आदेश में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर राज्य को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पुनर्गठित करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 बनाया गया था। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित लद्दाख का संयुक्त उच्‍च न्‍यायालय नाम नाम लंबा है, इसलिए इसे जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट कर दिया गया है, जो अन्य संयुक्‍त उच्‍च न्‍यायालयों की तरह है, जैसे- पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय।