झारखण्ड में निवेशकों की जमीन पर दलालों की नजर !!

    दिनांक 17-जुलाई-2021
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 रितेश कश्यप
अभी कुछ दिन पहले ही झारखंड सरकार ने 'झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति-2021' को लागू करने की स्वीकृति दी है, लेकिन राज्य में निवेशकों की जमीन पर माफिया कब्जा कर रहे हैं। ऐसे में भला कोई निवेशक राज्य में अपना कारोबार क्यों शुरू करेगा!

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 इसी जमीन पर कब्जा किया गया है। प्रकोष्ठ में संजय कुमार
एक ओर झारखंड सरकार यह दावा कर रही है कि राज्य में निवेश के अनुकूल माहौल बन गया है और इसलिए निवेशक आएं और कारोबार करें, ताकि युवाओं रोजगार मिले। वहीं दूसरी ओर राज्य में सक्रिय जमीन माफिया ऐसे लोगों की जमीन पर कब्जा करने का काम कर रहे हैं। इसका एक ताजा मामला सामने आया है। बता दें कि नाइजीरिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRI) संजय कुमार ने उद्योग लगाने के लिए रांची के पास अनगड़ा में 51 डिसमिल जमीन अब्दुल रज्जाक नामक एक व्यक्ति से 2017 में खरीदी थी। इसके कुछ दिन बाद संजय कुमार नाइजीरिया चले गए। इसके बाद अब्दुल रज्जाक के मन में लालच पैदा हुआ और उसने पुन: उस जमीन पर कब्जा करने का षड्यंत्र रचा। इसके लिए उसने जमीन दलाल कुमार जितेन्द्र से मदद ली। उसने कागज में कुछ हेराफरी कर उस जमीन पर फिर से कब्जा कर लिया है। इसकी जानकारी मिलते ही संजय नाइजीरिया से झारखण्ड वापस आए और अपनी जमीन बचाने में लग गए। वे पिछले चार महीने से अपनी जमीन और सुरक्षा के लिए थाने से लेकर सरकार तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है।
इस मामले में संजय ने अनगड़ा थाने में भू माफिया कुमार जितेन्द्र और जमीन विक्रेता अब्दुल रज्जाक के खिलाफ मामला दर्ज (कांड संख्या 35/21) कराया है। इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है। संजय ने यह सब जानकारी थाना प्रभारी, अंचल अधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक और उपायुक्त रांची से लेकर नाइजीरिया में भारत के उच्चायुक्त तक को दे दी है। इसके बाद नाइजीरिया स्थित भारतीय उच्चायुक्त ने भारतीय विदेश मंत्रालय, झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, डीजीपी झारखंड और रांची के उपायुक्त को पत्र लिखकर संजय कुमार की जान और जमीन की रक्षा करने का आग्रह किया है। इसके बावजूद अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इसका सबसे बड़ा कारण है राज्य के जमीन माफिया पर सत्तारूढ़ नेताओं का आशीर्वाद। बता दें कि इन दिनों झारखंड के कई शहरों में सत्तारूढ़ दल के नेताओं के सहयोग और समर्थन से जमीन माफिया किसी की भी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। बता दें कि 20 फरवरी, 2021 को रांची के एक कारोबारी मुंजाल परिवार की 2.90 एकड़ जमीन पर सैकड़ों लोगों की भीड़ ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद मुंजाल परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सरकार में बैठे नेताओं से भी मदद मांगी, लेकिन किसी ने भी उनकी गुहार नहीं सुनी। मुंजाल परिवार का मानना है कि उनकी बात कोई इसलिए नहीं सुन रहा है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने ही उनकी जमीन पर कब्जा करवाया है।
जमीन पर कब्जा करने का सिलसिला राज्य सरकार में मंत्री रामेश्वर उरांव के एक बयान के बाद शुरू हुआ है। उन्होंने कुछ दिन पहले कहा था, ‘‘रांची की जमीन दूसरे लोगों के हाथों में चली गई है। रांची में बिहारी और मारवाड़ी बस गए हैं, जिससे जनजातीय समाज के लोग कमजोर होते जा रहे हैं।’’ इस भड़ाकाऊ बयान के बाद भू माफिया और भी अधिक सक्रिय हो गए हैं।
इस कारण कोई भी निवेशक राज्य में निवेश नहीं करना चाहता है। इन सबके बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि राज्य में सब कुछ ठीक है। इसी के तहत 6 जुलाई को राज्य मंत्रिपरिषद् की बैठक में झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति-2021 को लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इस नीति के तहत आगामी पांच वर्ष में राज्य में निवेश करने वालों को तमाम लाभ दिए जाएंगे। जैसे राज्य सरकार के हिस्से का जीएसटी वापस करना, पंजीकरण, लाइसेंस आदि के शुल्क में छूट जैसी बातें शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि यह सब केवल दिखावा है और नेताओं पर जमीन हड़पने के जो आरोप लग रहे हैं, उन्हें दबाने का प्रयास है। अगर सरकार राज्य में निवेशकों को काम करने देना चाहती तो वह जमीन माफिया पर तुरंत कार्रवाई करती।