सबरीमला मंदिर में प्रधान पुजारी की नियुक्ति की अधिसूचना के खिलाफ उच्‍च न्‍यायालय में याचिका

    दिनांक 17-जुलाई-2021   
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केरल उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें त्रावणकोर देवस्‍वोम बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सबरीमला और मलिकप्पुरम मंदिर में केवल 'मलयाला ब्राह्मण' से ही मेलसंथी यानी प्रधान पुजारी के पद के लिए आवेदन मांगा गया है।
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सबरीमला मंं‍दिर के कपाट 17-21 जुलाई तक खुले रहेंगे। 
केरल उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें त्रावणकोर देवस्‍वोम बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सबरीमला और मलिकप्पुरम मंदिर में केवल 'मलयाला ब्राह्मण' से ही मेलसंथी यानी प्रधान पुजारी के पद के लिए आवेदन मांगा गया है। 
यह याचिका सिजित टी.एल और विजीश पी.आर ने अधिवक्‍ता टी.आर राजेश के माध्‍यम से दायर की है। इसमें कहा गया है कि त्रावणकोर देवस्‍वोम बोर्ड की अधिसूचना में सबरीमला और मलिकप्‍पुरम मंदिर में प्रधान पुजारी पद के लिए केवल मलयाला ब्राह्मण को ही योग्‍य माना गया है। यह देश के संविधान के अनुच्‍छेद-14, 15 और 16 के तहत प्रदत्‍त मौलिक अधिकारों का उल्‍लंघन है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि यह अधिसूचना अन्‍य लोगों को इस पद के लिए आवेदन करने से रोकती है, इसलिए इसे रद्द करने का आदेश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता केरल के दो प्रमुख मंदिरों में प्रधान पुजारी हैं। इसलिए वे राज्‍य में देवस्‍वोम बोर्ड द्वारा संचालित किसी भी प्रमुख मंदिर में प्रधान पुजारी पर के लिए पूरी तरह योग्‍य हैं। वे पूजा, तंत्र, मंत्रों से अच्छी तरह वाकिफ हैं जो केरल के प्रमुख मंदिरों में पूजा करने के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में त्रावणकोर देवस्‍वोम बोर्ड द्वारा सबरीमला और मलिकप्पुरम मंदिरों में मेलसंथी के पद के लिए आवेदन आमंत्रित करने वाली अधिसूचना से वे व्‍यथित हैं।
याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा आदित्यन बनाम त्रावणकोर देवस्‍वोम बोर्ड (2002) (3) केएलटी 615 (एससी) और आदि शैव शिवचार्यरगल नाला संगम और अन्य बनाम तमिलनाडु सरकार और अन्य (एआईआर 2016 (एससी) 209) के संदर्भ में दिए गए फैसले का संदर्भ भी दिया है। इसमें कहा गया था कि अर्चक या पुजारी के रूप में नियुक्ति के लिए किसी विशेष वर्ग या संप्रदाय को शामिल करने और बाहर करने से अनुच्छेद-14 का उल्लंघन नहीं होता, जब तक कि यह समावेश या बहिष्करण जाति, जन्म या संवैधानिक रूप से अस्‍वीकार्य किसी अन्य मानदंडों पर आधारित नहीं हो। इसी तरह, शीर्ष अदालत ने कहा है कि जाति, जन्म या किसी अन्य संवैधानिक रूप से स्वीकार्य मापदंडों के आधार पर मंदिरों में अर्चकों या पुजारियों की नियुक्ति से संविधान के अनुच्छेद-16 का उल्लंघन होता है।
सबरीमाल मंदिर के कपाट खुले
इस बीच, सबरीमला में भगवान अयप्पा मंदिर पांच दिवसीय पारंपरिक मासिक पूजन के लिए शनिवार को खोल दिया गया। मंदिर के कपाट 17-21 जुलाई तक खुले रहेंगे। इस दौरान, अधिकतम 5,000 श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी। कोरोनारोधी दोनों टीके लगवाने वाले या 48 घंटे पहले आरटी-पीसीआर जांच में निगेटिव आने वाले श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति है। मंदिर में प्रवेश के लिए ऑनलाइन बुकिंग की व्‍यवस्‍था की गई है।