‘‘सभी हिंदू पांच दिन में गांव खाली करें, वरना अंजाम बुरा होगा’’

    दिनांक 18-जुलाई-2021   
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हरिद्वार से पश्चिम लगभग 10 किलोमीटर दूर बहादुरपुर जट गांव के हिन्दुओं के घरों के बाहर 15 जुलाई की रात को एक पर्चा फेंका गया, जिस पर लिखा है, ‘‘सभी हिन्दुओं को यह गांव खाली करना है, नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाहू अकबर, अल्लाहू अकबर, अल्लाहू अकबर, जामिया 786।’’
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गांव में हिन्दुओं के घर के बाहर फेंका गया पर्चा
सऊदी अरब में रहने के बाद कुछ लोग कितने जहरीले हो सकते हैं, इसका एक उदाहरण मिला है। यह उदाहरण है बहादुरपुर जट गांव का। यह गांव धर्मनगरी हरिद्वार से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। यहां का रहने वाला एक मुस्लिम युवक रिजवान पिछले कुछ वर्षों से सऊदी अरब में रहता है। पता चला है कि वह वहां कुख्यात आतंकवादी बिन लादेन के अब्बा की एक कंपनी में काम करता है। लोगों ने बताया कि जब से वह सऊदी अरब में रहने लगा है, तब से वह फेसबुक पर हिंदुओं के लिए अपमानजनक बातें लिखता है। 30 मार्च, 2020 की रात में 9 बजकर 35 मिनट पर रिजवान ने फेसबुक पर लिखा था, ‘‘मुसलमानो! तुम पहले मोदी को हराओ। फिर हम हिन्दुओं की बहू-बेटियों को घर से भी उठाकर ले आएंगे तो भी कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।’’ इसके बाद 1 अप्रैल, 2020 को भी रिजवान ने माता वैष्णो देवी के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखीं। उसकी इन भड़काऊ बातों से आहत होकर गांव के जिवेन्द्र सिंह तोमर ने 1 अप्रैल, 2020 को थाना पथरी, हरिद्वार में रिजवान के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई। उस समय पुलिस ने जिवेन्द्र को कहा कि चूंकि रिजवान भारत में है नहीं, इसलिए उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई करना संभव नहीं है।
रिजवान को जब इसकी जानकारी मिली तो वह और भी भड़काने वाली बातें लिखने लगा। 20 मई को उसने अपने एक साथी को संबोधित करते हुए फेसबुक पर जिवेन्द्र के लिए लिखा, ‘‘अल्लाह से बेहतर फैसला कोई नहीं करता भाई, किसी न किसी को कुर्बानी देनी होगी। अल्लाह ने मुझे चुना है इसके लिए।’’
यानी रिजवान ने खुलेआम जिवेन्द्र को मारने की धमकी दी। इसलिए जिवेन्द्र भी उसके गांव आने का इंतजार कर रहे थे, ताकि उसके खिलाफ वे कुछ कार्रवाई करा सकें।

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फेसबुक पर लिखी गई रिजवान की आपत्तिजनक पोस्ट
यही कारण है कि गत तीन जुलाई को रिजवान सऊदी अरब से लौटा तो जिवेन्द्र ने एक बार फिर से पुलिस से शिकायत की कि रिजवान गांव आया है, अब उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाया, लेकिन रिजवान और उसके साथियों की मंशा कुछ और ही थी। कहा जा रहा है कि उन लोगों के इशारे पर 13 जुलाई को गांव में भीम आर्मी के बैनर तले एक रैली निकली। भले ही रैली भीम आर्मी के नाम पर निकाली गई, लेकिन उसमें 95 प्रतिशत मुसलमान थे। कहा जा रहा है कि रिजवान ने जानबूझकर अपने को इससे दूर रखा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रैली में शामिल लोगों ने हिन्दुओं के घरों के पास आपत्तिजनक नारे लगाए। हिंदुओं को गालियां दीं, और ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाए। यही नहीं, रैली में शामिल लोगों ने जिवेन्द्र सिंह तोमर के घर पर ताला लगा दिया। घटना के समय तोमर घर पर नहीं थे। उन्हें घर वालों ने फोन करके पूरी घटना की जानाकारी दी। इसके बाद जिवेन्द्र ने रिजवान और उसके भाई इमरान के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक दोनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
अभी यह मामला गर्म ही था कि 15 जुलाई की रात ढाई-तीन बजे के करीब मोटरसाइकिल सवार दो नकाबपोशों ने गांव के हिन्दुओं के दरवाजे पर कुछ पर्चे फेंक दिए। उसमें लिखा है, ‘‘सभी हिन्दुओं को यह गांव खाली करना है, नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाहू अकबर, अल्लाहू अकबर, अल्लाहू अकबर, जामिया 786।’’ 16 जुलाई की सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो पर्चे पर लिखी बातों से हैरान रह गए। गांव में लगे सीसीटीवी कैमरों में साफ दिख रहा है कि पर्चे बांटने वाले के चेहरे ढके हुए हैं और वे चुन-चुनकर हिन्दुओं के घरों के बाहर पर्चे गिरा रहे हैं। हिन्दुओं का कहना है कि यह पर्चा मुसलमानों ने बांटा है, लेकिन मुसलमान इसे सही नहीं मान रहे हैं। गांव के पूर्व प्रधान यूनुस कहते हैं, ‘‘गांव में हिंदू अधिक हैं, इसके बावजूद मुसलमानों पर पर्चा फेंकने का आरोप लगाया जा रहा है। यह कैसे हो सकता है!’’
भले ही यूनुस मुसलमानों को निर्दोष मान रहे हैं, लेकिन गांव में मुसलमानों की हरकतों से उन पर बार—बार अंगुलियां उठ रही हैं। यूनुस के पास 15 जुलाई की रात को गांव में लव जिहाद की हुई एक घटना का कोई जवाब नहीं है।
बता दें कि 15 जुलाई को 18 वर्षीय इजारूल नामक एक युवक 45 वर्षीया एक हिन्दू महिला को कहीं भगा ले गया है। वह महिला विधवा है और उसके तीन बच्चे हैं। इजारूल उसके दो बच्चों को भी ले गया है। गांव के प्रधान विकास कुमार ने बताया कि गांव में दलित समाज के लोग सबसे अधिक हैं और वह महिला दलित समाज से ही है।
मुसलमानों की इन हरकतों से गांव में भारी तनाव है। इसलिए गांव में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। हिन्दुओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि उस महिला को जल्दी वापस लाया जाए, नहीं तो गांव के हिन्दू आंदोलन तेज कर देंगे।