अफगानिस्तान: तालिबान ने कहा-संघर्षविराम हो, संकट का राजनीतिक समाधान हो

    दिनांक 19-जुलाई-2021   
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कतर में अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडल और तालिबानी नेताओं के बीच 'शांति' कायम करने को हो रही वार्ता को कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं
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कतर में बातचीत की मेज पर तालिबानी वार्ताकार   (फाइल चित्र)

तालिबान ने ईद के मौके पर कहा है कि अफगानिस्तान किसी को भी अपने क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देशों की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए नहीं करने देगा। इस्लामी जिहादी गुट ने अफगान सरकार को 'संघर्षविराम प्रस्ताव' भेजकर कहा है कि अफगानिस्तान संकट का राजनीतिक समाधान होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान लड़ाकों के नेताओं के बीच 17 जुलाई को कतर में 'शांति वार्ता' शुरु हुई थी। 18 जुलाई को तालिबान ने अफगान सरकार के वार्ताकारों को अपना संघर्षविराम प्रस्ताव भेजा था। इसके अलावा तालिबान नेता मुल्ला हिब्तुल्ला अखुंदजादा ने भी 18 जुलाई को अपने ‘ईद संदेश’ में अफगानिस्तान में संकट के राजनीतिक समाधान की जरूरत जताई है। मुल्ला का कहना है कि वे राजनीतिक समाधान के प्रति ‘गंभीर’ हैं। मुल्ला ने यह भी कहा कि देश में एक इस्लामी व्यवस्था और शांति तथा सुरक्षा होने लिए तालिबान हर मौके का फायदा उठाएगा। वे बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने के लिए तैयार हैं।

कोई अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में दखन न दे

मुल्ला की मानें तो तालिबान दुनिया के साथ ‘अच्छे, पक्के कूटनीतिक संबंध चाहता है। उसने पड़ोसी देशों, इलाके और दुनिया को भरोसा दिया कि अफगानिस्तान किसी को भी अपने क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देशों की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए नहीं करने देगा। अन्य देश अफगानिस्तान के अंदरूनी मामलों में ‘दखल’ न दें। तालिबान इस्लामी काननू और देश के हितों के खाके के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान के वरिष्ठ नेताओं में से एक अब्दुल्ला अब्दुल्ला की अगुआई में अफगानिस्तान इस्लामी गणराज्य का एक प्रतिनिधिमंडल और तानिबान के उपनेता अब्दुल गनी बरादर की अगुआई में तालिबानी प्रतिनिधिमंडल ने 17 जुलाई को कतर में ‘शांति’ के प्रयासों पर बातचीत शुरू की है।


मुल्ला की मानें तो तालिबान दुनिया के साथ ‘अच्छे, पक्के कूटनीतिक संबंध चाहता है। उसने पड़ोसी देशों, इलाके और दुनिया को भरोसा दिया कि अफगानिस्तान किसी को भी अपने क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देशों की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए नहीं करने देगा। अन्य देश अफगानिस्तान के अंदरूनी मामलों में ‘दखल’ न दें। 

संभवत: इस बातचीत में उन मुद्दों पर सहमति हो पाए जो देश को राजनीतिक हल की तरफ ले जाएंगे। इससे हिंसा खत्म होगी। बता दें कि कतर ही वह स्थान है जहां अफगानिस्तानी और तालिबानी प्रतिनिधिमंडलों ने पिछले दस महीनों से द्विपक्षीय चर्चाएं जारी रखी हैं। दुर्भाग्य से इन बैठकों में अभी तक कुछ ठोस निकलकर नहीं आया है। इस बार भी कोई बहुत ज्यादा उम्मीद इसलिए नहीं है क्योंकि तालीबानी हत्यारों की बर्बरता जारी है, वे कब्जाए इलाकों में कड़े इस्लामी कानून थोपने में लगे हैं।