पाकिस्तान : मुगल आक्रांता बाबर पर लट्टू इमरान बनाएंगे उस बर्बर पर फिल्म

    दिनांक 19-जुलाई-2021   
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अपने कंगाल देश के लिए कर्ज लेने उज्बेकिस्तान गए इमरान उस देश के साथ बाबर की 'साझी विरासत' पर फिल्म बनाकर 'युवाओं को जागरूक बनाने' को आतुर हो गए  
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इमरान खान उज्बेकिस्तान के साथ कर रहे (प्रकोष्ठ में) आक्रांता बाबर पर फिल्म बनाने की तैयारी   (फाइल चित्र)

पाकिस्तान अब उज्बेकिस्तान के साथ मिलकर ‘बाबर’ पर फिल्म बनाने जा रहा है। यह कहा है कि पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान ने। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की मानें तो 'यह फिल्म दोनों देशों के युवाओं को अपनी विरासत के बार में जागरूक करेगी'।

इमरान न कहा है कि महान मुगल के राज को दर्शाने वाली, पहले मुगल शासक जहीरुद्दीन बाबर पर फिल्म यह फिल्म पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान की साझा विरासत की झलक देकर युवाओं को शिक्षित करेगी। उन्होंने यह बात ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ गन दिनों एक साझा प्रेस वार्ता में कही। उज्बेकिस्तान के दौरे पर गए इमरान खान ने पत्रकारों को बताया, ‘यह बेहद रोमांचक बात है कि हमने अब महान मुगलों में सबसे पहले आने वाले जहीरुद्दीन बाबर पर एक फिल्म बनाने का निर्णय किया है।’


बर्बर बाबर
भारत में हिन्दुओं की हत्याओं, मंदिरों के ध्वंस और बर्बर अत्याचार की हदें पार करने वाले उन्मादी मुगल बाबर के कसीदे काढ़ते हुए भारत के पड़ासी इस्लामी देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि 'बाबर के वंश ने 300 साल तक भारत पर शासन किया था, उस दौरान भारत को विश्व में 'सबसे अमीर' जगहों में से एक माना जाता था।' इमरान का कहना था, ‘मुझे लगता है कि उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान के युवाओं को दुनिया के इस हिस्से के इतिहास के बारे में जानना चाहिए।' 'मुगलिया हस्तियों' की वाहवाही में डूबे इमरान इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि 'उनका मानना है, ये फिल्म तथा मिर्जा गालिब, अल्लामा इकबाल और इमाम बुखारी पर बनी ऐसी ही फिल्में दोनों इलाकों के लोगों को आपस में जोड़ेंगी।' बेहतर होता अगर इमरान यह भी जोड़ देते कि बाबर ही था जिसने भारत में हजारों अन्य ऐतिहासिक मंदिरों तो ध्वस्त करने के अलावा, हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थ अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को भी ध्वस्त करके, हिन्दुओं को जानबूझकर अपमानित करने की गरज से उसी के पत्थरों, खंभों आदि को प्रयोग करके एक गुम्बदनुमा ढांचा खड़ा कर दिया था। 

इमरान का कहना है, ‘मुझे लगता है कि उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान के युवाओं को दुनिया के इस हिस्से के इतिहास के बारे में जानना चाहिए।' 'मुगलिया हस्तियों' की वाहवाही में डूबे इमरान इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि 'उनका मानना है, ये फिल्म तथा मिर्जा गालिब, अल्लामा इकबाल और इमाम बुखारी पर बनी ऐसी ही फिल्में दोनों इलाकों के लोगों को आपस में जोड़ेंगी।'


उज्बेकिस्तान को इमरान सिखाएंगे क्रिकेट  
बहरहाल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमें इस बात की उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच इससे रिवाजों के एक मजबूत आदान-प्रदान की शुरुआत होगी। जैसे-जैसे हमारे देशों में करीबी बढ़ेगी, उज्बेकिस्तान को क्रिकेट से परिचित कराउंगा।’ इस मौके पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने इमरान खान के कहे का समर्थन किया और साथ ही दोनों देशों के युवाओं के लिए उस तहजीब को जानना जरूरी बताया जो बाबर के समय से जुड़ी है। मिर्जियोयेव ने कहा कि 'उनके देश के बहुत कम युवाओं को ही पता है कि इस्लामाबाद में वे मस्जिदें, मकबरे और स्कूल हैं, जो उस देश के पूर्वजों ने बनाए थे'।


पाकिस्तान जाने की तलब है मिर्जियोयेव को
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने कहा कि उनके हिसाब से यह तो बस एक शुरुआत है। वे उन जगहों को देखने के लिए पाकिस्तान जाने के लिए इच्छुक हैं जहां उनके पूर्वजों की निशानी है।’ कर्ज में डूबे देश के प्रधानमंत्री इमरान खान अपनी चिकनी—चुपड़ी बातों से उज्बेकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने गए ही इसलिए थे कि वहां से कुछ पैसा हाथ आ सके। बता दें कि पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में उसका नाम होने की वजह से बुरी तरह डगमगा गई है। बताया गया कि कारोबार बढ़ाने के मकसद से उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक रेल परियोजना पर भी मिलकर काम किया जा सकता है।
दरअसल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री 'तहजीब' और मनोरंजन का घालमेल करके सिर्फ और सिर्फ इस्लामी उन्माद को ही उकसाना चाह रहे हैं। बाबर जैसे बर्बर मुगल के किए को कौन नहीं जानता, लेकिन इरादों में खोट रखे इमरान उसी को महिमामंडित करने पर तुले हैं। सेना के इशारे पर चल रही पाकिस्तानी हुकूमत का एक ही उद्देश्य है, जिहादी इस्लाम को सुलगाए रखना ताकि उनका और तुर्की, चीन सरीखे उनके आकाओं का एजेंडा चलता रहे।