जयंती विशेष: आज ही के दिन मंगल पांडे ने किया था अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह

    दिनांक 19-जुलाई-2021
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आज मंगल पांडेय की 194वीं जयंती है। मंगल पांडे वह क्रांतिकारी जिन्हें जब फांसी दी गई तो जल्लाद भी इसके लिए तैयार नहीं हुए। आज ही के दिन उन्होंने बंगाल की बैरकपुर छावनी में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया था

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जिस स्थान पर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था और बाद में जहां उन्हें फांसी दी गई, वह स्थान अब शहीद मंगल पांडे महा उद्यान के रूप में जाना जाता है। भारत सरकार ने 5 अक्टूबर, 1984 को उनके नाम से डाक टिकट जारी किया था। मंगल पांडे ने कलकत्ता के निकट बैरकपुर छावनी में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था।
'मारो फिरंगी को' दिया था नारा
अंग्रेजों के खिलाफ सिर उठाने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले क्रांतिकारी के तौर पर विख्यात मंगल पांडे ने पहली बार 'मारो फिरंगी को' का नारा देकर भारतीयों का हौसला बढ़ाया था। उनके विद्रोह से ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई थी। आज (19 जुलाई) उनकी 194वीं जयंती है। 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने कलकत्ता के पास बैरकपुर परेड मैदान में रेजीमेंड के अफसर पर हमला कर उसे घायल कर दिया था।
मंगल पांडे के पिता मूलरूप से फैजाबाद के थे। फैजाबाद में उनके जन्म के बाद उनके पिता बलिया चले गए थे। उनके पिता का नाम दिनकर पांडे था और मां का नाम अमरावती था। उनका जन्म 19 जुलाई 1827 का माना जाता है। हालांकि कुछ जगह पर उनका जन्म 30 जनवरी 1831 का बताया गया है।
मंगल पांडे ने जब विद्रोह किया था तो विद्रोह का कारण जो बताया जाता है वह य​ह था कि भारतीय सैनिकों को ऐसी बंदूक दी गई थी, जिसमें कारतूस भरने के लिए दांतों से काटकर खोलना पड़ता था। इस नई एनफील्ड बंदूक की नली में बारूद को भरकर कारतूस डालना पड़ता था। वह कारतूस जिसे दांत से काटना होता था उसके ऊपरी हिस्से पर चर्बी होती थी। बताया जाता है कि कारतूस की चर्बी सुअर और गाय के मांस से बनाई गई थी। ये बंदूकें 9 फरवरी 1857 को सेना को दी गईं। इस्तेमाल के दौरान जब इसे मुंह लगाने के लिए कहा गया तो मंगल पांडे ने ऐसा करने से मना कर दिया था। अंग्रेज अधिकारियों ने दबाव बनाया तो उन्होंने एक अंग्रेज अफसर पर गोली चला दी। उन्हें विद्रोह करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर सेना के नियमों के हिसाब से मुकदमा चला गया उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।
मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ बैरकपुर में जो बिगुल फूंका था। वह जंगल की आग की तरह फैल गया। विद्रोह की चिंगारी पूरे उत्तर भारत में फैल गई। इतिहासकारों का कहना है कि विद्रोह इतना तेजी से फैला था कि मंगल पांडे को फांसी 18 अप्रैल को देनी था लेकिन 10 दिन पहले 8 अप्रैल को ही दे दी गई। बताया जाता है कि बैरकपुर छावनी के सभी जल्लादों ने मंगल पांडे को फांसी देने से इनकार कर दिया था। फांसी देने के लिए बाहर जल्लाद बुलाए गए थे। 1857 की क्रांति भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था। जिसकी शुरुआत मंगल पांडे के विद्रोह से हुई थी।