चीन ' विरोधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे': दुनिया को चीन की खुली धमकी!

    दिनांक 02-जुलाई-2021   
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 ..चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 साल के समारोह में फिर दिखा वुहान वायरस फैलाने के कथित दोषी चीन के राष्ट्रपति का बड़बोलापन
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  सीपीसी के 100 साल पूरे होने पर, बीजिंग में हुए समारोह में बड़े पर्दे पर शी जिनपिन और अन्य नेता

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिन ने कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ चाईना यानी सीपीसी के 100 साल पूरे होने पर एक जुलाई को शताब्‍दी समारोह का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम को अपनी आदत के अनुसार उन्होंने 'घुड़की—आयोजन' बना दिया। बीजिंग का दुनिया को धमकाने का जो रवैया रहा है, उसी पर आगे बढ़ते हुए शी ने चीन के विरोधियों को चेतावनी दे डाली कि 'हमारा विरोध किया तो सिर काट देंगे।' शी का यह भाषण उसी थ्येनआनमन चौक पर हुआ जहां 32 साल पहले ड्रेगन ने पूरी बेरहमी से छात्रों का लोकतंत्र समर्थक आंदोलन कुचला था।

    वुहान वायरस फैलाने के कथित दोषी चीन पर जहां दुनिया के तमाम देश लानतें भेज रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति शी जिनपिन उस विरोध को नजरअंदाज करने के अंदाज में उलटे विरोधियों को ही धमकाने लगे कि 'देख लेंगे'। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि 'चीन को धमकाने की कोशिश करने वाली विदेशी ताकतों के सिर काट दिए जाएंगे'। जाहिर है, उनका यह भाषण सरकारी प्रोपगेंडा मीडिया पर सीधा प्रसारित किया गया था। इसलिए शी का मकसद यही था कि देशवासियों को अपनी 'दमदारी' दिखाई जाए। इसीलिए भाषण में शी ने कहा कि वह चीन की फौजी ताकत और बढ़ाएंगे; ताइवान, हांगकांग और मकाऊ को फिर से शिकंजे में जकड़ेंगे।

 चीनी राष्ट्रपति ने धमकाया कि 'देश का कोई भी नागरिक किसी भी विदेशी ताकत द्वारा उन्‍हें धमकाया जाना या अपने अधीन करना सहन नहीं कर सकता। और अगर किसी ने ऐसा करने की जुर्रत की तो, उसका सिर चीन की उस 'महान दीवार' पर लगा दिया जाएगा, जिसे डेढ़ अरब चीनियों ने खड़ा किया है।'
    

धमकी या धमक!
पूरी आक्रामकता दिखाते हुए चीनी राष्‍ट्रपति ने कहा कि चीन वालों को पुरानी दुनिया को खत्‍म करना भी आता है तो नई दुनिया बनाना भी। अपने यहां कोरोना की वैश्विक महामारी से 'उबरने' के बाद चीन नई हेकड़ी के साथ दुनिया के सामने आया है, हालांकि पिछले साल लद्दाख में गलवान घाटी में भारत के जांबाज सैनिकों ने उसकी यह हेकड़ी तार—तार कर दी थी। दूसरी तरफ कई और मुद्दे हैं जिन पर चीन को अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर भारी विरोध और आलोचनाओं का निशाना बनना पड़ा है। हांगकांग में लोग त्रस्त हैं, लोकतंत्र की आवाज उठाने वालों पर वहां झूठे मुकदमे लगाए जा रहे हैं, जेलों में ठूंसा जा रहा है। उधर चीन के सिंक्यांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों का दमन और तेज हो गया है। दुनिया जानती है कि वह कैसे यातना शिविरों में 'ट्रेनिंग' के नाम पर लाखों उइगरों को कुचलने में लगा है। उसकी इस हरकत का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है।

 शी जिनपिन ने कहा, 'कोई भी यह न समझे कि चीन कमजोर है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं कर सकता है'। जबकि असलियत में तो यह ड्रेगन ही है जो तिब्बत को निगल गया है; नेपाल के कई इलाके डकार चुका है; पाकिस्तान पर शिकंजा गढ़ाए बैठा है और जिसकी भूटान, श्रीलंका पर तिरछी निगाहें हैं। 

    लेकिन थ्येनआनमन चौक पर अपने भाषण में जिनपिन उतनी ही बेपरवाही से बोले, 'चीन के लोग अपने आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी ताकत को बर्दाश्त नहीं करेंगे। देश का कोई भी नागरिक किसी भी विदेशी ताकत द्वारा उन्‍हें धमकाया जाना या अपने अधीन करना सहन नहीं कर सकता। और अगर किसी ने ऐसा करने की जुर्रत की तो, उसका सिर चीन की उस 'महान दीवार' पर लगा दिया जाएगा, जिसे डेढ़ अरब चीनियों ने खड़ा किया है'।

    

फौज का आधुनिकीकरण

    शी बोलें और फौज की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। कम्युनिस्ट बुनियाद के 100 साल पूरे होने के जश्न में उन्होंने फौज को और आधुनिक बनाने की बात दोहरानी ही थी, क्योंकि वहां की फौज, पीएलए के मुखिया भी शी ही हैं। उन्‍होंने कहा,'कोई भी यह न समझे कि चीन कमजोर है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं कर सकता है'। जबकि असलियत में तो यह ड्रेगन ही है जो तिब्बत को निगल गया है; नेपाल के कई इलाके डकार चुका है; पाकिस्तान पर शिकंजा गढ़ाए बैठा है और जिसकी भूटान, श्रीलंका पर तिरछी निगाहें हैं। लद्दाख और अरुणाचल के रास्ते भारत के और हिस्से दबाने की जैसी उसने पिछले 70 साल में कोशिशें की थीं, वैसी ही उसकी कोशिशें अब पिछले 6 साल से 'नए भारत' की दमदारी ने हर बार परास्त की हैं। उधर, ताइवान पर उसका डंडा चलाने की भरपूर कोशिश को वहां की सरकार हर बार काट रही है। इसीलिए ताइवान से कुनमुनाए शी को अपने भाषण में कहना पड़ा कि 'चीन के सभी बेटे—बेटियां ताइवान स्‍ट्रेट के दोनों तरफ के लोगों को मिलाकर चीन को आगे बढ़ाएं।' लगे हाथ उन्होंने ताइवान और उसके सहयोगी देशों को धमकाया भी कि, 'ताइवान को आजाद कराने के बारे में सोचने या इसकी साजिश रचने वालों का अंजाम अच्‍छा नहीं होगा'।