रक्षा : सिंक्यांग में चीन बना रहा आधुनिक एयरबेस, ड्रेगन की हर हरकत पर भारत की नजर

    दिनांक 20-जुलाई-2021   
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पूर्वी लद्दाख सीमा पर पहले से मौजूद एयरबेस के अलावा नया आधुनिक यंत्रों से लैस एयरबेस तैयार करना चीन की मंशा साफ कर रहा
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लद्दाख सीमा के पास तैनात भारतीय सैनिक   (फाइल चित्र)

ताजा समाचारों के अनुसार चीन लद्दाख से सटी सीमा के पास वायुसेना के ठिकाने मजबूत करने में लगा है। पता चला है कि पिछले साल गलवान में भारतीय सैनिकों से पिटने के बाद, चीन ने वायुसेना को ज्यादा से ज्यादा सक्रिय करने में जुटा है। इसी दृष्टि से उसने गुपचुप सिंक्यांग प्रांत में स्थित शक्चे में अपने लड़ाकू विमानों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक एयरबेस तैयार किया है।

एक खबर यह भी है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट चीन का यह एयरबेस पहले से मौजूद था, लेकिन उसे लड़ाकू विमानों के लिए और आधुनिक किया गया है। उसकी यह कोशिश दिखाती है कि लद्दाख के इस इलाके में उसके लड़ाकू विमानों की हरकतें बढ़ने वाली हैं। सिंक्यांग पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के उस पार है।
साफ है कि एक तरफ चीन संबंधों को पटरी पर लाने के बयान देता आ रहा है तो दूसरी तरफ वह युद्ध की मंशा से तैयारियां करने में जुटा है। वैसे भी विशेषज्ञ चीन की किसी बात को, व्यावहारिक धरातल पर भरोसे लायक नहीं मानते हैं। आज चीन लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर टकराव के सभी स्थानों से सैनिकों की वापसी को लेकर भारत के साथ बातचीत कर रहा है, तो दूसरी तरफ पूर्वी लद्दाख से सटे सिंक्यांग में लड़ाकू विमानों का एयरबेस भी सभी सुविधाओं से लैस कर रहा है।
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अग्रिम मोर्चे के पास युद्धाभ्यास करता भारतीय वायुसेना का राफेल लड़ाकू विमान  (फाइल चित्र)

भारत की गुप्तचर एजेंसियां चीन से सटी उत्तराखंड सीमा के पास मौजूद एक अन्य हवाई क्षेत्र पर भी कड़ी नजर रखे हैं। यही इलाका है जहां चीन के मानव रहित हवाई व्हीकल्स बड़ी तादाद में देखे गए हैं। ज्यादा दिन नहीं बीते जब चीन की वायुसेना ने भारतीय इलाकों के निकट युद्धाभ्यास भी किया था। उसके लिए अधिकतर उड़ानें होगन, काशगर और गार गुनसा हवाई इलाकों से भरी गई थीं।

सूत्रों की मानें तो चीन का सिंक्यांग प्रांत में बन रहा लड़ाकू विमानों का यह एयरबेस काशगर और होगान में पहले से स्थापित एयरबेस के मध्य में तैयार हो रहा है। अभी होता यह है कि भारत विरोधी गतिविधियों में इन्हीं दोनों एयरबेस से कार्रवाई की जाती थी। ही चीन भारतीय सीमा के पास अपनी हरकतों को अंजाम देता रहा है। इस नए एयरबेस के तैयार हो जाने पर इस इलाके में चीन के ल़़डाकू विमानों की आवाजाही और बढ़ने की पूरी उम्मीद है। काम की रफ्तार देखते हुए भी चीन की मंशा ठीक नहीं लगती। इसलिए माना जा रहा है, यहां से लड़ाकू विमानों का उड़ना बहुत जल्दी शुरू हो सकता है।

हर हरकत पर नजर

भारत की गुप्तचर एजेंसियां चीन से सटी उत्तराखंड सीमा के पास मौजूद एक अन्य हवाई क्षेत्र पर भी कड़ी नजर रखे हैं। यही इलाका है जहां चीन के मानव रहित हवाई व्हीकल्स बड़ी तादाद में देखे गए हैं। ये उस इलाके में उड़ान भी भरते रहे हैं। ज्यादा दिन नहीं बीते जब चीन की वायुसेना ने भारतीय इलाकों के निकट युद्धाभ्यास भी किया था। उसके लिए अधिकतर उड़ानें होगन, काशगर और गार गुनसा हवाई इलाकों से भरी गई थीं।
भारत की तैयारी पूरी
भारत ने नियंत्रण रेखा पर न सिर्फ निगाहें चौकन्नी रखी हुई हैं बल्कि वायुसेना सहित सभी तरह की आवश्यक तैयारियां भी की हुई हैं। अनुभव बताते हैं कि इस इलाके में चीन की वायुसेना उतनी दमदार नहीं रही है। दूसरी तरफ भारत ने चीन के लड़ाकू विमानों पर नजर रखने के लिए बड़ी संख्या में उपकरणों की तैनाती की है। लेह सहित अन्य अग्रिम मोर्चों पर स्थित एयरबेस पर लड़ाकू विमान तैनात किए हैं, जो लद्दाख में अपने ठिकानों से चीन और पाकिस्तान दोनों को संभाल सकते हैं।