मानसून की एक ही बारिश ने खोल दी दिल्ली सरकार की पोल

    दिनांक 20-जुलाई-2021   
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मानसून की पहली बारिश होती है और दिल्ली बेहाल हो जाती है। सड़कों पर पानी भर जाता है।, सड़कें धंस जाती हैं, मामूली सी बारिश में दिल्ली जाम हो जाती है। केजरीवाल हर बार सिर्फ वादे करते हैं और झूठे दावे करते हैं लेकिन करते कुछ नहीं

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केजरीवाल सरकार की बहुमत आने के बाद दिल्ली में दूसरी पारी है। हर साल मानसून से पहले अरविंद केजरीवाल के विज्ञापन, सोशल मीडिया पर उनके ट्वीट नजर आते हैं कि वह दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम विश्व स्तरीय बनाएंगे, लेकिन होता कुछ नहीं है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। मानसून की पहली बारिश भी दिल्ली नही झेल पाई।
सोमवार को दिल्ली में पहली बारिश हुई इसके बाद अधिकांश इलाकों में जलभराव के हालात पैदा हो गए। पुल प्रह्लादपुर इलाके में एक 27 साल का युवक जलभराव में डूब गया। बारिश के कारण रिंग रोड, प्रगति मैदान, पालम, किराड़ी और रोहतक रोड पर भी पानी भर गया। पुल प्रहलादपुर अंडरपास की तरफ से तो यातायात को मोड़ना पड़ा जिस वजह से महरौली-बदरपुर रोड से यातायात को मथुरा रोड की तरफ मोड़ा गया। जलभराव के कारण मिलेनियम पार्क के निकट रिंग रोड पर, सराय काले खां, किलोकरी, धौला कुआं, विकास मार्ग, आजादपुर आदि स्थानों पर भारी ट्रैफिक जाम रहा।
 
पूरी कार की समा गई सड़क में

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दिल्ली में हुई भारी बारिश के चलते दिल्ली के द्वारका इलाके में एक सड़क धंस गई। इसके चलते पूरी कार गड्ढे में समा गई। कार एक पुलिसकर्मी अश्विनी कुमार की थी। यह हादसा सोमवार शाम दिल्ली के द्वारका के सेक्टर— 18 इलाके में हुआ।
जिस वक्त हादसा हुआ उस समय अश्विनी अपने एक दोस्त से मिलने जा रहे थे। हादसे की वजह से घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। गनीमत रही कि समय रहते लोगों ने कार का शीशा तोड़कर उन्हें बाहर निकाल लिया नहीं तो उनकी जान जा सकती थी।
हर साल आती है यह समस्या
दिल्ली में खराब ड्रेनेज सिस्टम और जलभराव की समस्या नई नहीं है। केजरीवाल से पहले 15 बरसों तक दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी। इस दौरान विकास तो हुआ लेकिन लगातार बढ़ती आबादी और पूर्ववर्ती सरकारों के ढीलमुल रवैये के चलते दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम ऐस ही बना रहा। 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली जलबोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ( सीपीसीबी) से दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम और यमुना नदी में बढ़ते जल प्रदूषण पर एक रिपोर्ट मांगी थी। इस जो रिपोर्ट सौंपी गई थी उसमें बताया गया था कि दिल्ली की 60 फीसदी आबादी का कचरा बिना निस्तारण किए यमुना नदी में सीधे जाता है। यमुना किनारे जो पानी के निस्तारण के प्लांट लगाए गए हैं उनकी क्षमता उतनी नहीं है कि वह इस पानी का निस्तारण कर सकें। जो रिपोर्ट सौंपी गई थी वह सामान्य दिनों की बात थी, लेकिन मानसून के दौरान दिल्ली की स्थिति और भी खराब हो जाती है। नतीजतन हर साल हमें ऐसी ही तस्वीरें देखने को मिलती हैं।
पश्चिमी दिल्ली से भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने ट्वीट कर केजरीवाल की दावों को पोल खोल दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि '' अरविंद केजरीवाल ने चालाकी से एक भी विभाग अपने पास नहीं रखा है, लेकिन क्योंकि दिल्ली जलबोर्ड का चेयरमैन मुख्यमंत्री होता है इसलिए केजरीवाल इसके भी चेयरमैन हैं। इस विभाग की फाइल किसी भी प्रकार से उपराज्यपाल महोदय के पास नहीं जाती है। सीवर, पानी, सप्लाई, नाले जलभराव ये सब जलबोर्ड के काम हैं। उनके इस ट्वीट को लगातार रिट्वीट कर लोग केजरीवाल से सवाल पूछ रहे हैं।
दिल्ली सरकार ने दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम को लेकर इस बार भी सिर्फ दावे ही किए हैं। इस मोर्च पर भी वह फेल ही हुई है।