प्रयागराज स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क से संबंधित कागज गायब

    दिनांक 20-जुलाई-2021   
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जमीन जिहादियों की जड़ें कितनी मजबूत हो चुकी हैं, उसका एक उदाहरण प्रयागराज स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क है। अमर बलिदानी चंद्रशेखर आजाद के नाम पर बने इस पार्क से जुड़े कागज उद्यान विभाग से गायब हैं। माना जा रहा है कि इसके पीेछे वे जमीन जिहादी हैं, जिन्होंने इस पार्क पर कब्जा करके मस्जिद और मजार बना दी है। अब तो यहां शव भी दफनाए जा रह हैं।
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पार्क में स्थापित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा

जमीन जिहादी किसी सरकारी जमीन पर कब्जा करने से पहले उसकी पूरी तैयारी करते हैं। इनकी पहली तैयारी यह होती है कि उस जमीन से संबंधित कागजात ही संबंधित विभाग से गायब करवा देते हैं। यह तभी संभव हो सकता है, जब विभाग के अधिकारी इसमें शामिल हों। कुछ ऐसा ही हुआ है प्रयागराज स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क के मामले में। गत 19 जुलाई को प्रयागराज नगर निगम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को बताया है कि पार्क से संबंधित 1996 से लेकर 2006 तक के कागजात उद्यान विभाग से गायब हैं।

बता दें कि इन दिनों इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चंद्रशेखर आजाद पार्क में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद औ मजार को हटाने को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई चल रही है। इसकी पहली सुनवाई एक जुलाई को हुई थी। उस दिन न्यायालय ने सुन्नी वक्फ बोर्ड और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा था। 19 जुलाई को दूसरी सुनवाई हुई। इस दिन न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ को राज्य के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि आजाद पार्क से संबंधित कागज गायब हैं और उन्हें गंभीरता से तलाशा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से दो सप्ताह का समय देने का निवेदन किया। उनके निवेदन को न्यायालय ने स्वीकार कर अगली सुनवाई की तिथि नौ अगस्त तय की है। इस तारीख पर 2014 और 1999 के आदेशों की प्रति और रिकार्ड भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

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पार्क में बनीं कब्रें

उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर आजाद पार्क पर हुए कब्जे को हटाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र सिंह बिसेन और अन्य ने याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि चंद्रशेखर आजाद पार्क में मजार, मस्जिद बनाने के अलावा वहां शव दफनाए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग कब्जा हटाने के लिए कुछ नहीं कर रहा है।

बता दें कि इसी पार्क में महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद ने अंतिम सांस ली थी। 27 फरवरी, 1931 को अंग्रेजों से घिर जाने पर उन्होंने खुद ही अपने को गोली मार ली थी। उस समय इस पार्क को अल्फ्रेड पार्क कहा जाता था। अल्फ्रेड एक अंग्रेज अधिकारी था। 1870 में वह इलाहाबाद के दौरे पर आया था। उसी की याद में 133 एकड़ में यह पार्क बनाया गया था। स्वतंत्रता मिलने के बाद इस पार्क का नाम अमर शहीद चंद्रशेखर पार्क किया गया था। इतने महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े इस पार्क पर अतिक्रमण होना कोई छोटी—मोटी बात नहीं है। एक साजिश के तह एक वर्ग ने इस पार्क पर कब्जा किया और जिन लोगों पर इस पार्क पर अतिक्रमण नहीं होने देने की जिम्मेदारी थी, वे लोग अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर चुप रहे। राजनीतिक आका ऐसा इसलिए करते हैं कि उनका वोट बैंक बना रहे। इसी का फायदा जमीन जिहादियों ने उठाया है।