कानपुर के दर्जन भर गांव बनेंगे संस्कृत भाषी

    दिनांक 21-जुलाई-2021   
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संस्कृत भाषा जन-जन के बीच बोलचाल की भाषा के रूप में स्थापित हो, इसके लिए संस्कृत भारती लगातार प्रयास करती रही है। कानपुर में संगठन द्वारा कुछ गांव को संस्कृत भाषी बनाने के लिए बच्चों और युवाओं के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।
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संस्कृत भारती ग्रामीण क्षेत्रों में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में कानपुर के बिठूर के आसपास दर्जन भर गांवों को संस्कृत भाषी गांवों के रूप में विकसित करने की योजना है। जिन गांवों में संस्कृत का प्रचार-प्रसार किया जाएगा उनमें रमेल, हींगूपुर, पैगूपुर, बाकरगंज, ईश्वरीगंज, हृदयपुर, प्रतापपुर हरि, शिवदीन पुरवा, तिसजा, भारतपुरवा, भगवानदीन की पुरवा, मक्कापुरवा प्रमुख हैं। इस पूरे अभियान का संचालन संस्कृत भारती के कानपुर प्रांत कार्यालय से होगा।

11 जुलाई को ही इस कार्यालय की स्थापना की गई है। यह कार्यालय बिठूर स्थित चित्रकूट अखंड सच्चिदानंद आश्रम ट्रस्ट ब्रह्मावर्त में वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ शुरू हुआ। कार्यालय में संस्कृत शिक्षण केंद्र का संचालन भी होगा। इसमें बाल, तरुण, युवा, वरिष्ठ और बहनें निशुल्क संस्कृत का पठन—पाठन कर सकेंगी।

संस्कृत के लिए समय देने वाले विस्तारकों के सहयोग से जन-जन तक संस्कृत को पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही संस्कृत भाषी परिवारों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान और भावी पीढ़ी को संस्कृत भाषा की अहमियत और उसमें छिपी संभावनाओं की जानकारी देने की योजना पर संस्कृत भारती के कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संस्कृत भाषा को लेकर शुरू किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लेकर लोगों में विशेष उत्साह है।



संस्कृत के साधकों को हरियाणा में नि:शुल्क परिवहन सुविधाएं
हरियाणा सरकार ने संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए कमर कस ली है। सरकार ने घोषणा की है कि संस्कृत भाषा के मेधावी छात्र-छात्राओं को अब नि:शुल्क परिवहन सेवाएं दी जाएंगी। जिन छात्रों ने संस्कृत में उल्लेखनीय कार्य किया है या उन्हें संस्कृत के लिए कोई पुरस्कार मिला है, उन्हें यह सुविधा मिलेगी। लोग सरकार के इस निर्णय की बड़ी प्रशंसा कर रहे हैं।