पश्चिम बंगाल हिंसा: धनखड़ बोले- न्यायिक आदेश पर सार्वजनिक हुई एनएचआरसी की रिपोर्ट

    दिनांक 21-जुलाई-2021   
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि न्यायिक आदेश के कारण राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक दस्तावेज बन गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एनएचआरसी पर "न्‍यायालय की अवमानना" करने और "भाजपा के राजनीतिक हितों" को आगे बढ़ाने का आरोप लगाने के कुछ दिन बाद राज्‍यपाल का यह बयान आया है।
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 बंगाल के राज्‍यपाल जगदीप धनखड़

राज्‍य में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा पर एनएचआरसी की रिपोर्ट पर राज्‍यपाल ने कहा, "पहली (एनएचआरसी) रिपोर्ट एक अंतरिम रिपोर्ट थी। कलकत्ता उच्‍च न्‍यायालय ने उस रिपोर्ट को जारी नहीं किया है। न्यायिक आदेश के कारण अंतिम रिपोर्ट एक सार्वजनिक दस्तावेज बन गई। यह मामला अभी विचाराधीन है। कानून अपना काम करेगा।" बता दें कि 15 जुलाई को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि आयोग द्वारा एक राजनीतिक साजिश के तहत रिपोर्ट ऑनलाइन लीक की गई थी। उन्‍होंने कहा था, ''अब भाजपा द्वारा अपने राजनीतिक हितों के लिए तटस्थ संगठनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारे राज्य को बदनाम किया जा रहा है। मानवाधिकार आयोग को अदालत का सम्मान करना चाहिए। मीडिया को रिपोर्ट लीक करने के बजाय इसे अदालत को सौंप देना चाहिए था।"

आयोग की रिपोर्ट में क्‍या है?

उसी दिन एनएचआरसी ने चुनाव के बाद की हिंसा पर अपनी रिपोर्ट में कलकत्ता उच्च न्यायालय में दाखिल की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "राज्य में हिंसक घटनाओं का अनुपात-अस्थायी विस्तार पीड़ितों की दुर्दशा के प्रति राज्य सरकार की भयावह उदासीनता को दर्शाता है।" यह सत्तारूढ़ दल के समर्थकों द्वारा मुख्य विपक्षी दल के समर्थकों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक हिंसा थी। इसके परिणामस्वरूप हजारों लोगों का जीवन और आजीविका बाधित हुई और उनका आर्थिक गला घोंट दिया गया।" बता दें कि कलकत्‍ता उच्‍च न्‍यायालय के निर्देश पर पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की जांच के लिए राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक समिति गठित की थी। इस समिति 13 जुलाई, 2021 को अदालत में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

रिपोर्ट लीक का आरोप निराधार

बाद में आयोग ने रिपोर्ट के लीक होने के आरोपों का खंडन किया था। राइट्स बॉडी ने एक बयान में कहा कि उसने इस मामले में संबंधित पक्षों के अधिवक्ताओं के साथ उक्त रिपोर्ट की प्रतियां कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार साझा की हैं। मामला विचाराधीन होने के कारण समिति ने अपनी रिपोर्ट को न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट के अलावा किसी अन्य इकाई के साथ साझा नहीं किया। चूंकि रिपोर्ट पहले से ही न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सभी संबंधित पक्षों के पास उपलब्ध है, इसलिए एनएचआरसी के स्तर पर लीक का कोई सवाल ही नहीं है। इसलिए रिपोर्ट के कथित लीक के संबंध में एनएचआरसी पर आरोप निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत है।

पेड़ से लटकता मिला भाजपा कार्यकर्ता का शव

विधानसभा चुनाव के बाद से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्‍तर दिनाजपुर के रायगंज के गौरी ग्राम पंचायत संख्‍या 9 के दक्षिण बिष्‍णुपुर में 52 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता देवेश बर्मन का शव पेड़ से लटका मिला। परिजनों का कहना है कि देवेश सोमवार रात से लापता थे। अगले दिन सुबह घर से करीब 500 मीटर दूर एक आम के पेड़ से उसका शव लटका मिला। उसकी साइकिल भी घर की ओर जाने वाली दूसरी सड़क पर बरामद हुई। परिजनों और स्‍थानीय लोगों का कहना है कि देवेश को मारकर पेड़ से लटका दिया गया ताकि यह आत्‍महत्‍या का मामला लगे। बंगाल के भाजपा प्रवक्‍ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक 138 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। बंगाल में लोकतंत्र संकट में है। वहीं, प्रदेशाध्‍यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि बीते 5-7 वर्ष के दौरान भाजपा के 175 कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं।