चर्च: सिस्टर लूसी के कमरे की बिजली काटी, पानी बंद किया, चर्च ने किया जीना मुश्किल

    दिनांक 22-जुलाई-2021   
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बिशप फ्रेंको मुलक्कल की काली करतूतों को उजागर करने वाली सिस्टर लूसी हो रहीं चर्च की अमानवीयता की शिकार
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चर्च के दमन के विरुद्ध डटकर खड़ी हैं सिस्टर लूसी    


चर्च में ननों के यौन शोषण, बलात्कार और जोर-जबरदस्ती की प्रतीक बन चुकीं हैं केरल की नन सिस्टर लूसी। उन पर चर्च का दमन जारी है। उन्होंने बलात्कारी बिशप फ्रेंको मुलक्कल के विरुद्ध कानूनन और चर्च में शिकायत करने का 'अपराध' जो किया था। जिस कॉन्वेंट में उन्हें कमरा मिला हुआ था वहां सताया जाने लगा और बाहर निकाला जाने लगा। इसके खिलाफ तीन बार सिस्टर लूसी ने चर्च के मठाधीशों की गद्दी वेटिकन को पत्र लिखा कि 'मुझे बचाया जाए, सिर छुपाने की जगह न छीनी जाए'। लेकिन तीनों बार नन की वह अर्जी ठुकरा दी वेटिकन। एक न सुनी बलात्कारी पादरी के विरुद्ध खड़ी नन की।

अदालतों में बलात्कार पादरी मुलक्कल के मामलों पर सुनवाई चल ही रही है। लेकिन सिस्टर लूसी को पिछले ढाई साल से उनके निवास वाले कॉन्वेंट द्वारा सताया जाना जारी है। उल्लेखनीय है कि 2018 में उन्होंने केरल में बिशप मुलक्कल द्वारा यौन शोषण किए जाने की रपट लिखाई थी। बस उसी दिन से उनके मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

 ताजा घटनाक्रम के अनुसार, अब सिस्टर लूसी के कमरे की बिजली काट दी गई है, पानी काट दिया गया है। एक अंग्रेजी दैनिक को दिए साक्षात्कार में सिस्टर लूसी ने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई की शाम सात बजे जब वे अर्नाकुलम से कॉवेंट में लौटकर आईं तो दस मिनट तक कॉन्वेंट का दरवाजा खटखटाती रहीं पर वह नहीं खुला। बाद में दरवाजा खुलने पर जब वे अपने कमरे में पहुंचीं तो देखा बारिश की अंधियारी रात में कमरे की बत्ती गुल है। जहां वे कपड़े धोती हैं वहां भी बिजली नहीं थी। इसके बाद कमरे से बाहर बने अपने बाथरूम में गईं तो पाया कि वहां भी बत्ती नहीं थी, वॉश बेसिन तोड़ दिया गया था। अगली सुबह उन्होंने देखा कि बत्ती जाने की वजह फ्यूज उड़ना नहीं थी बल्कि उनके स्विच बोर्ड को ही तोड़—मरोड़ दिया गया था। कॉवेंन्ट में इस बाबत पूछताछ करने पर किसी से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

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बलात्कारी पादरी के विरुद्ध यूं धरने पर बैठी थीं नन  (फाइल चित्र)

सिस्टर लूसी कॉवेंट में लौटकर आईं, दस मिनट तक कॉन्वेंट का दरवाजा खटखटाती रहीं पर वह नहीं खुला। बाद में दरवाजा खुलने पर जब वे अपने कमरे में पहुंचीं तो देखा, बारिश की अंधियारी रात में कमरे की बत्ती गुल है। जहां वे कपड़े धोती हैं वहां भी बिजली नहीं थी। इसके बाद कमरे से बाहर बने अपने बाथरूम में गईं तो पाया कि वहां भी बत्ती नहीं थी, वॉश बेसिन तोड़ दिया गया था। 

सिस्टर लूसी ने अपने साक्षात्कार में आगे बताया कि इस तरह जब भी उन्हें सताया गया, उन्होंने हर बार कॉन्वेंट के पास वाले पुलिसथाने में इसकी शिकायत की, लेकिन हुआ कुछ नहीं।पुलिस ने हमेशा यही कहा कि कॉवेंन्ट पर सिस्टर सुपीरियर की कमान है, हम कुछ नहीं कर सकते। कोई उनकी मदद कर सकता है तो बस वही कर सकती हैं। लेकिन वे भी कुछ क्यों करतीं, चर्च के मठाधीशों को नाराज थोड़ी करना है उन्हें। सिस्टर सुपीरियर की तरफ से हर बार पुलिस को कहा जाता रहा कि नहीं, कुछ गलत नहीं किया जा रहा सिस्टर लूसी के साथ। असल में सिस्टर लूसी ही झूठ बोल रही हैं।

चर्च की सताई सिस्टर लूसी कहती हैं कि ऐसी हर मुश्किलों से जूझकर वे और मजबूत हुई हैं। उन्हें और ताकत मिली है। वे सच के साथ खड़ी रहेंगी। देखना है कि एक सिस्टर के प्रति चर्च के मठाधीश और कितने बेरहम हो सकते हैं। वे अमानवीयता की किस हद तक जा सकते हैं। ईसाई समुदाय के सुलझी सोच वाले लोगों की अच्छी-खासी संख्या है जो आज सिस्टर लूसी से हमदर्दी रखती है। लेकिन उन 'आम आस्थावानों' की कौन सुनेगा?