लद्दाख में चीन से निपटेगी सेना की आतंकवादरोधी इकाई

    दिनांक 24-जुलाई-2021   
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लद्दाख में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत ने उत्‍तरी कमान क्षेत्र में आतंकवाद निरोधी अभियानों में लगी सेना की इकाइयों को वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात करने का फैसला किया है। सेना की ये आतंकवादरोधी इकाइयां लद्दाख मोर्चे पर चीनी सैनिकों से निपटेंगी।
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सेना के आतंकवाद निरोधी डिवीजन को उत्तरी कमान क्षेत्र के अभियानों से हटा कर लद्दाख क्षेत्र में तैनात किया गया है।  
आतंकवाद निरोधी डिवीजन को उत्तरी कमान क्षेत्र के भीतर से अभियानों से हटा कर कई माह पहले लद्दाख क्षेत्र में तैनात किया गया था। सरकारी सूत्रों ने बताया, "चीन द्वारा वहां आक्रामकता दिखाने के किसी भी संभावित प्रयास से निपटने के लिए डिवीजन-साइज फॉर्मेशन (लगभग 15,000 सैनिकों) को आतंकवादरोधी अभियानों से हटाकर लद्दाख क्षेत्र में भेजा गया। इस कदम से सेना को उत्‍तरी सीमाओं पर बलों का संचालन बनाए रखने में मदद मिली है। शुगर सेक्‍टर में तैनात रिजर्व बलों को ऊंचे पहाड़ों पर युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। लद्दाख के ठंडे रेगिस्‍तानी इलाकों में हर साल युद्ध अभ्‍यास का आयोजन किया जाता है। पिछले साल से यह बल चीन के साथ गतिरोध में व्‍यापक रूप से शामिल रहा है।
इस डिवीजन को अग्रिम मोर्चों पर भेजने के कारण जो रिक्‍तता आई है, उसे सेना ने अपने उपलब्‍ध संसाधनों का उपयोग करते हुए उसे भर दिया है। भारत ने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में लगभग 50,000 सैनिकों को तैनात किया है और सेना की ताकत को दोगुने से अधिक बढ़ा दिया है। चीनी की आक्रामकता को देखते हुए लेह में 14 कोर के पास अब दो डिवीजन हैं, जो कारु स्थित 3 डिवीजन सहित चीन सीमा की निगरानी करती हैं। इसके अलावा, कुछ अतिरिक्त बख्तरबंद इकाइयों को भी उस क्षेत्र में तैनात किया गया है, जहां पिछले साल से भारी संख्या में सैनिकों की भीड़ देखी जा रही है।
पिछले साल अप्रैल-मई की समयसीमा में चीनी सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख के सामने अपनी गतिविधियां बढ़ाते हुए कई स्‍थानों पर घुसपैठ की कोशिश की। भारत सरकार ने कड़ा जवाब दिया और चीनियों को रोकने के लिए वहां लगभग इतनी ही संख्या में सैनिकों की तैनाती की। हालात इतने खराब हो गए थे कि चीन की सीमा पर चार दशकों से भी अधिक समय के बाद गोलियां चलीं। इसके बाद पिछले साल 15 जून में गलवान घाटी में दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई, जिसमें 20 जवान शहीद हो गए। हालांकि इससे अधिक चीन के सैनिक मारे गए, पर उसने अपने सैनिकों की मौत की बात छिपाई। अब स्‍वीकार कर रहा है कि उसके सैनिक मारे गए थे।
उसी समय से एलएसी पर भारतीय सेना हाई अलर्ट पर है और एलएसी पर लगातार अपनी स्थिति को मजबूत कर रही है। भले ही पैंगोंग झील के दोनों किनारों से सैनिकों की आंशिक वापसी हुई है, लेकिन तनाव बना हुआ है, क्योंकि चीनी सैनिक गोगरा हाइट्स-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में तनाव वाले क्षेत्रों से हट नहीं रहे हैं। विवाद का हल निकालने के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिली है।