चीन : भारत के अरुणाचल से सटे तिब्बती शहर पहुंचे चीनी राष्ट्रपति, वहां तेजी से हो रहा रेल, सड़क और ढांचागत निर्माण

    दिनांक 24-जुलाई-2021   
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यूं तो चीन के कई नेता लगातार तिब्बत जाते रहे हैं, लेकिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और केन्द्रीय सेना आयोग की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रपति शी कई वर्ष बाद तिब्बत का दौरा करने वाले पहले शीर्ष नेता हैं। यही वह न्यिंगची शहर है जहां चीन ने तिब्बत में पहली बुलेट ट्रेन शुरु की है। यह ट्रेन तिब्बत की राजधानी लहासा को न्यिंगची से जोड़ती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग का तिब्बत दौरा खास इसलिए है क्योंकि इस इलाके को दक्षिण तिब्बत नाम देकर चीन ने इस पर भी कब्जा किया हुआ है
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न्यिंगची में राष्ट्रपति शी 
एक तरफ भारत और चीन के बीच तनाव को दूर करने की कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, सेना में टकराव न हो इसके लिए सीमा विवाद को जल्द दूर करने की बातें चल रही हैं, ऐसे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 21 जुलाई को तिब्बत जा पहुंचे। वे तिब्बत में उस स्थान पर गए जो भारत के अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा के नजदीक न्यिंगची शहर गए थे। बताते हैं, 2011 में सत्ता पर बैठने के बाद वे पहली बार तिब्बत गए थे।
चीन की सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ की खबर है कि शी चीनी राष्ट्रपति ने ब्रह्मपुत्र नदी के बेसिन में पारिस्थितिकीय संरक्षण के कार्यों का मुआयना करने के लिए न्यांग नदी पुल देखा। विशेषज्ञों के अनुसार, न्यिंगची तिब्बत का वह शहर है, जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटा है इसलिए रणनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। विस्तारवादी चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोकता आ रहा है। वह उस इलाके को दक्षिणी तिब्बत बताता है। भारत शुरू से चीन के इस दावे नकारता रहा है। भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर विवाद है।
यूं तो चीन के कई नेता लगातार तिब्बत जाते रहे हैं, लेकिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और केन्द्रीय सेना आयोग की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रपति शी कई वर्ष बाद तिब्बत का दौरा करने वाले पहले शीर्ष नेता हैं। यही वह न्यिंगची शहर है जहां चीन ने तिब्बत में पहली बुलेट ट्रेन शुरु की है। यह ट्रेन तिब्बत की राजधानी लहासा को न्यिंगची से जोड़ती है। रफ्तार है 160 किलोमीटर प्रति घंटा। कुल 435.50 किमी का सफर करने वाली यह ट्रेन विद्युत चालित है। इसी ट्रेन के बारे में शी जिनपिंग ने कहा था यह स्थिरता की रक्षा करने में मददगार होगी। बेशक, उनका संकेत अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा की तरफ था। रणनीतिक दृष्टि से इस रेल लाइन को बहुत अहम माना जा रहा है। इसके अलावा चीन इस इलाके में अन्य तरह के निर्माण भी करवा रहा है। रेल लाइन के अलावा वह सड़क मार्गों को भी मजबूत करने में जुटा है। बताते हैं, वहां चीन ने एक महामार्ग बनाया है जो सेना की आवाजाही में महत्वपूर्ण योगदान निभा सकता है। यह महामार्ग मेडोग काउंटी को जोड़ते हुए अरुणाचल प्रदेश को छूकर गुजरता है।