पाकिस्तान : इमरान के बिगड़े बोल, पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू—कश्मीर में की जनमत संग्रह की बात

    दिनांक 24-जुलाई-2021   
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इमरान खान ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि पीओके को सूबा बनाने की बात कहां से आई। पर अब मैं साफ करना चाहता हूं कि 1948 में संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के दो प्रस्ताव थे, इसके अंतर्गत कश्मीर के लोगों को अपने आने वाले कल के बारे में फैसला लेने का हक दिया गया था'। दरअसल में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में है- लोगों को तय करना है कि वे भारत में शामिल होना चाहते हैं या पाकिस्तान में।’ पीओके में चुनावी रैली में वोट बटोरने को आतुर प्रधानमंत्री इमरान ने पढ़ाया इतिहास का गलत सबक, कहा—'संयुक्त राष्ट्र में दो प्रस्ताव पास हुए थे'
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कोटली में चुनाव रैली को संबोधित करते इमरान खान 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर, शायद अपनी फौज की फरमाबरदारी करते हुए पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू—कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का मुद्दा उछाला है। चुनावों के सिलसिले में वहां हुई रैली में कंगाल देश के प्रधानमंत्री ने जनमत संग्रह की बात करके लोगों के वोट खींचने की नाकाम कोशिश की है। उन्हें लगता है, जनमत संग्रह का मुद्दा यहां उन्हें वोट दिला सकता है। इमरान ने 23 जुलाई को पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू—कश्मीर के निवासियों से यह वादा किया कि पीटीआई की सरकार यहां जनमत संग्रह कराएगी। इसका मकसद यह तय करना होगा कि यहां के लोग पाकिस्तान में शामिल होंगे या एक अगल आजाद सूबा बनाएंगे। पाकिस्तानी कब्जे वाले इस इलाके में 25 जुलाई को मतदान होना है।
पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू—कश्मीर में सुधनहोटी जिले में तरार खल इलाके की एक चुनावी रैली में बोलते हुए इमरान खान ने कहा है कि उन्हें नहीं पता कि 'पीओके को सूबा बनाने की बात कहां से आई। पर अब मैं जो साफ करना चाहता हूं कि 1948 में संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के दो प्रस्ताव थे, इसके अंतर्गत कश्मीर के लोगों को अपने आने वाले कल के बारे में फैसला लेने का हक दिया गया था'। असल में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में है कि लोगों को यह तय करना है कि वे भारत में शामिल होना चाहते हैं या पाकिस्तान में।’
इमरान ने आगे कहा, ‘मैं आज आपके सामने साफ करना चाहता हूं कि एक दिन आएगा जब कश्मीर के लोगों की कुर्बानियां बेकार नहीं जाएंगी। ऊपर वाला आपको वह हक देगा। जनमत संग्रह होगा, इंशाअल्लाह’। उन्होंने भरोसा भी जताया कि यहां के लोग पाकिस्तान के साथ जाना पसंद करेंगे। वे इतने पर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने आगे कहा कि 'संयुक्त राष्ट्र के जनमत संग्रह के बाद उनकी सरकार एक और जनमत संग्रह करवाएगी। इसमें कश्मीर के लोगों के सामने पाकिस्तान के साथ रहने या एक आजाद सूबा बनने का विकल्प होगा।'
इमरान खान ने इतिहास की पट्टी पढ़ाने की कोशिश में कहा कि 'कश्मीरियों की आजादी की लड़ाई बंटवारे से सौ साल से भी पहले शुरू हुई थी। डोगरा परिवार हिंदू राजपूतों का एक वंश था जिसने 1846 से 1947 तक जम्मू—कश्मीर पर राज किया'।
हैरानी की बात है कि पाकिस्तान में इस वक्त कोरोना की तीसरी लहर का जबरदस्त प्रकोप देखने में आ रहा है। उसके बावजूद इमरान खान चुनाव की रैलियां करते नजर आ रहे हैं। इसे लेकर पाकिस्तान में लोगों का एक बड़ा वर्ग गुस्से में है।