वह हनुमान चालीसा गुनगुनाती रही और डॉक्टरों ने कर दिया उसका आपरेशन

    दिनांक 24-जुलाई-2021   
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ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित युक्ति अग्रवाल एम्स में अपने आपरेशन के दौरान हनुमान चालीसा गुनगुनाती रही और इसी दौरान डॉक्टरों ने काम शुरू कर दिया। जब तक आपरेशन होता रहा, तब तक वह हनुमान चालीसा गाती रही। इससे डॉक्टरों को पता चलता रहा कि वह आपरेशन के दौरान पूरी तरह स्वस्थ है और उसे बोलने में कोई दिक्कत नहीं है।
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नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 23 जुलाई को एक आपरेशन शुरू करने से पहले एक रोगी से कहा गया कि आप अपने इष्टदेव की प्रार्थना करें। उस रोगी का नाम है युक्ति अग्रवाल। 24 वर्षीया युक्ति हनुमान जी की भक्त है। इसलिए उसने हनुमान चालीसा गुनगुनाना शुरू किया। इसके साथ ही चिकित्सकों की टीम ने उसका आपरेशन भी प्रारंभ कर दिया। जब तक आपरेशन होता रहा, तब तक युक्ति हनुमान चालीसा गुनगुनाती रही।
बता दें कि युक्ति के मस्तिष्क में एक ट्यूमर था। जिस जगह पर आपरेशन करना था, केवल उसी जगह को सुन्न किया गया था। इस कारण आपरेशन के दौरान भी युक्ति होश में रही। आपरेशन करने वाले चिकित्सकों में से एक डॉ. दीपक गुप्ता के अनुसार आपरेशन के दौरान कोई मरीज अपनी आस्था के अनुसार कुछ गुनगुनाता रहता है, तो उसमें आत्मविश्वास बढ़ता है और इस कारण वह सकारात्मक भी रह पाता है। इससे मरीज जल्दी ही स्वस्थ हो जाता है। यही कारण है कि युक्ति को आज अस्पताल से मुक्ति भी मिल जाएगी।
कुछ समय पहले एम्स में गायत्री मंत्र पर भी शोध हुआ है। एम्स के चिकित्सक और आईआईटी के एक वैज्ञानिक ने मिलकर यह शोध किया है। इसमें पाया गया है कि गायत्री मंत्र के उच्चारण से बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। शोध के दौरान चिकित्सकों ने मंत्रोच्चारण से मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव का एमआरआई जांच से भी अध्ययन किया। शोध का निष्कर्ष है कि गायत्री मंत्र के उच्चारण से मस्तिष्क के अच्छे हार्माेन बढ़ जाते हैं, जिससे बौद्धिक क्षमता बढ़ती है।
पिछले लगभग पांच साल से नई दिल्ली स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में महामृत्युंजय मंत्र पर भी शोध चल रहा है। इसका नेतृत्व अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. अजय चौधरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में लोग जीवन रक्षक के रूप में इस मंत्र का प्रयोग करते हैं। यह केवल मान्यता है या विज्ञान से इसका संबंध है, यह जानने के लिए शोध हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उपवास से भी कई गंभीर रोग दूर होते हैं। बता दें कि 2016 में मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार जापान के जिस डॉक्टर को मिला था, उन्होंने उपवास पर ही शोध किया था। शोध में बताया गया था कि उपवास से शरीर के अंदर कैंसर समेत अन्य बीमारियों के लिए जिम्मेदार सेल्स खत्म हो जाती हैं।