दक्षिण अफ्रीका : हिंसा में निशाना बन रहे भारतीय समुदाय के लोग, प्रिंस मांगोसुथु ने की मारकाट बंद करने की अपील

    दिनांक 25-जुलाई-2021   
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 पीढ़ियों से दक्षिण अफ्रीका में वहां के अश्वेत समुदाय के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं भारतीय मूल के लोगों के
राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने दंगे की घटनाओं को एक पूर्वनियोजित साजिश करार देते हुए ‘एक नाकाम विद्रोह’ कहा है। जबकि बुथेलेजी ने टीवी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि भारतीय और अश्वेत लोग पीढ़ियों से साथ रहते आए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने फीनिक्स में हुई हत्याओं की निंदा की। उनका कहना है, ‘ये (हत्याएं) बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। ऐसा करने वाले लोग बहुत पागल हैं। उन्हें पहले से पता होना चाहिए था कि इसके क्या नतीजे निकल सकते हैं। इससे बदले की भावना पैदा हो सकती है। sa_1  H x W: 0
दक्षिण अफ्रीका के कई शहरों में हो रही हिंसा और आगजनी की घटनाएं (फाइल चित्र) 
दक्षिण अफ्रीका में इन दिनों हालात बेहद खराब हैं। वहां पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को एक अदालत ने सजा क्या सुनाई, दंगे भड़क गए। लगातार बड़े पैमाने पर लूटमार, हिंसा और आगजनी की खबरें आ रही हैं। पुलिस और फौज की सख्ती के बावजूद हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसी हिंसक घटनाओं में भारतीय मूल के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके पीछे कोई सुनियोजित चाल का अंदेशा जताया जा रहा है। कुल मिलाकर दक्षिण अफ्रीका में परिस्थितियां नाजुक बनी हुई हैं। आखिरकार जुलु राष्ट्र के प्रधानमंत्री प्रिंस मांगोसुथु ने एक भावुक अपील की है।
जुलु के पारंपरिक प्रधानमंत्री प्रिंस मांगोसुथु बुथेलेजी ने अपनी इस अपील में भारतीय मूल के दक्षिण अफ्रीकी और उस देश के अन्य लोगों के बीच तनाव को बढ़ता देखकर भारत विरोधी भावना के विरुद्ध काम करना बंद करने को कहा है, कटुता समाप्त
करने को कहा है।
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प्रिंस मांगोसुथु बुथेलेजी 
पिछले कई दिन से वहां जारी दंगों तथा लूटपाट की घटनाओं के बीच फीनिक्स शहर में बाईस लोगों की मृत्यु हो गई थी। बस उसी के बाद वहां बड़ी तादाद में बसे भारतीयों और डरबन के उत्तरी इलाकों तथा पड़ोस के तीन अश्वेत बहुल क्षेत्रों के निवासियों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। इन उपद्रवों की शुरुआत हुई थी 7 जुलाई को, जब पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को जेल की सजा दी गई थी। वहां विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद अफरातफरी मच गई। बड़े पैमाने पर लूटपाट तथा आगजनी हुई। माना जाता है कि इस लूटपाट में ज्यादातर गरीब और बेरोजगार लोग शामिल थे जिनकी तादाद कम नहीं है। जुमा को सजा हुई अदालत की अवमानना के लिए। वहां के सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें 15 महीने कैद की सजा सुनाई है। उन्होंने देश के जांच आयोग के सामने भ्रष्टाचार के अभियोग में बयान देने से बार-बार इनकार कर दिया था।
उधर राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने दंगे की घटनाओं को एक पूर्वनियोजित साजिश करार देते हुए ‘एक नाकाम विद्रोह’ कहा है। जबकि बुथेलेजी ने टीवी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि भारतीय और अश्वेत लोग पीढ़ियों से साथ रहते आए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने फीनिक्स में हुई हत्याओं की निंदा की। उनका कहना है, ‘ये (हत्याएं) बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। ऐसा करने वाले लोग बहुत पागल हैं। उन्हें पहले से पता होना चाहिए था कि इसके क्या नतीजे निकल सकते हैं। इससे बदले की भावना पैदा हो सकती है।
92 वर्षीय प्रिंस ने कहा, ‘मैं सदा भारतीय लोगों के साथ मिलकर रहा हूं। कुछ भारतीय सामाजिक एकता के प्रति जी—जान से जुटे हैं। कारण, अगर हम सामाजिक एकजुटता को मजबूत नहीं करते हैं, तो फिर इसका कोई भविष्य नहीं रहेगा।’ बुथेलेजी ने 1975 में जुलु इंकथा फ्रीडम पार्टी का गठन किया था। उन्होंने चैनल के साक्षात्कार में अश्वेत समुदाय के कुछ प्रमुख लोगों द्वारा उभारे जा रहे तनाव की भर्त्सना भी की।