एक साल के अंदर प्रारंभ हो जाएगा देश का पहला संस्कृत चैनल

    दिनांक 26-जुलाई-2021   
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संस्कृत और संस्कृति के प्रचार—प्रसार के लिए 'संस्कृत संस्कृति' के नाम से एक चैनल प्रारंभ करने की तैयारी हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रहा है। अनुमान है कि यह चैनल एक साल के भीतर प्रारंभ हो जाएगा।
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गत दिनों उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा के सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि देश का पहला संस्कृत चैनल उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रारंभ होगा। इससे संबंधित दस्तावेज उत्तराखंड संस्कृत अकादमी ने उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव को सौंप दिए हैं। कहा जा रहा है कि संस्कृत चैनल की स्थापना होने से उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के प्रचार—प्रसार में सहायता मिलेगी। संस्कृत चैनल का नाम 'संस्कृत संस्कृति' होगा।

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि प्रारंभ में चैनल में सभी कार्यक्रमों का प्रसारण संस्कृत और कुछ उपभाषाओं के माध्यम से किया जाएगा, लेकिन प्रधानता संस्कृत की रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि संस्कृत नाटक, गीत, कहानियां, उत्तराखंड के पर्यटक स्थल, आध्यात्मिक स्थल और आरतियों का सजीव प्रसारण भी चैनल द्वारा किया जाएगा। प्रो. त्रिपाठी ने यह भी बताया कि सरकार ने चैनल के लिए संसाधन जुटाने का अधिकार विश्वविद्यालय को दे दिया है।

संसाधन के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार से भी अनुरोध किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि चैनल के लिए कोई भी सहयोग कर सकता है। इसके लिए एक अलग खाता विश्वविद्यालय ने खुलवाया है। उन्होंने यह भी कहा कि एक धारणा बन गई है कि संस्कृत में रोजगार के अवसर नहीं हैं,यह गलत धारणा है। संस्कृत में रोजगार की अपार संभावनाए हैं और अभी भी लाखों लोग संस्कृत के माध्यम से रोजगार पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत का ज्ञान संस्कृत साहित्य में है। इसलिए संस्कृत को जानना बहुत आवश्यक है। इसी को देखते हुए संस्कृत चैनल प्रारंभ किया जा रहा है। इससे संस्कृत भाषा आम जन तक तो पहुंचेगी ही, साथ ही हमारी संस्कृति भी दूर—दूर तक जाएगी।  


बिहार में संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति 
बिहार में उर्दू को द्वितीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद वहां की सरकारों ने संस्कृत की घोर उपेक्षा की है। यह भी कह सकते हैं कि संस्कृत तुष्टीकरण की राजनीति का शिकार हो गई थी। इस कारण राज्य के अनेक संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में ताले लग गए हैं। संस्कृत के बहुत सारे शिक्षक बरसों तक वेतन नहीं मिलने के कारण इस दुनिया से चल बसे हैं। अब वहां  की सरकार ने संस्कृत को लेकर थोड़ी गंभीरता दिखाई है। बिहार सरकार ने निर्णय लिया है कि जल्दी ही स्वीकृत संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों और शिक्षकेतर—कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी।  शिक्षा विभाग इसकी तैयारी में लगा है। बता दें कि बिहार में इस समय 659 संस्कृत विद्यालय हैं। इनमें बहुत सारे पद खाली हैं। अब उन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।