विदेश : चीन से घबराया पाकिस्तान, विदेश मंत्री और आइएसआइ मुखिया बीजिंग दरबार में हाजिर

    दिनांक 26-जुलाई-2021   
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पाकिस्तान अपने यहां बम विस्फोट में चीनी नागरिकों की मौत से नाराज अपने कम्युनिस्ट आका को मनाने की कवायद में जुट गया है, कुरैशी और हमीद की बीजिंग दरबार में हाजिरी के यही मायने
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चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी   (फाइल चित्र)


खैबर पख्तूनख्वा में कोहिस्तान जिले में बस में विस्फोट होने पर नौ चीनी नागरिकों की मौत के बाद से बीजिंग ने कट्टर इस्लामवादी पाकिस्तान की ऐसी मुश्कें कसीं कि पाकिस्तानी हुकूमत ड्रेगन के खौफ से सन्न रह गई। बस दसू हाइड्रो पावर परियोजना की तरफ जा रही थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच बिगड़े संबंधों को पटरी पर लाने के लिए गत 24 जुलाई को पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दो दिन के लिए बीजिंग दरबार में पहुंचे तो 25 जुलाई को आइएसआइ प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद भी कम्युनिस्ट आका के आगे घुटने टेकने जा पहुंचे हैं।

24 जुलाई को चीन के विदेश मंत्री वांग यी तथा पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी के बीच बातचीत भी हुई और बिगड़े तेवरों को फिर से नरम बनाने के लिए दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को ज्यादा मजबूत करने के वादे किए गए।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कुरैशी का यह दौरा सिर्फ और सिर्फ चीनी गुस्से को शांत करने, उन्हें मनाने के लिए था, रणनीतिक संबंधों की बात तो दिखावे के लिए की जा रही है।

उधर आइएसआइ महानिदेशक ले. जनरल फैज हमीद भी चीन के अधिकारियों को मनाने पहुंचे हैं और दोनों तरफ की खुफिया जानकारी साझा करने की बाबत बात हो सकती है। कयास यह भी है कि वार्ता में अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कदमों के बाद की परिस्थितियों पर भी चर्चा होगी। अफगानिस्तान के मोर्चे पर चीन इस वक्त खुद को एक महत्वपूर्ण स्थिति में देख रहा है। तुर्की ने चीन के साथ सैन्य सहयोग पर बात की ही है, इधर तालिबान ने भी चीन को अपना दोस्त बताते हुए उइगरों की बात पर बस उनके 'मानवाधिकारों' का जिक्र भर करके छोड़ दिया। तालिबान की हिम्मत नहीं हुई कि ड्रेगन से उइगरों के दमन को बंद करने के लिए कहता। रूस भी अमेरिकी फौज के अफगानिस्तान के निकलने के बाद बन रही परिस्थितियों पर नजदीकी नजर रखे है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कुरैशी का यह दौरा सिर्फ और सिर्फ चीनी गुस्से को शांत करने, उन्हें मनाने के लिए था, रणनीतिक संबंधों की बात तो दिखावे के लिए की जा रही है। उधर आइएसआइ महानिदेशक ले. जनरल फैज हमीद भी चीन के अधिकारियों को मनाने पहुंचे हैं। कयास यह भी है कि वार्ता में अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कदमों के बाद की परिस्थितियों पर भी चर्चा होगी।

चीन ने बस दुघर्टना का संज्ञान लेते हुए पाकिस्तान से आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं को कानून के कठघरे में खड़ा करने को कहा था। एएनआई की एक रपट के अनुसार चीन के प्रधानमंत्री ली केक्यांग ने प्रधानमंत्री इमरान को फोन कर घटना की जांच करने तथा तमाम ‘जरूरी एहतियात’ के कदम उठाने को कहते हुए दोषियों को सजा देने की बात की थी।

चीन ने पाकिस्तान में अपनी तमाम परियोजनाओं में काम कर रहे चीनियों की सुरक्षा की चिंता करते हुए उस विस्फोट की जांच के लिए पाकिस्तान एक टीम भेजी थी। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ बातचीत में यह विषय उठाया था।

दोनों विदेश मंत्रियों ने घटना की निंदा करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया कि, ‘दोनों पक्षों ने चल रही जांच के माध्यम से दोषियों की नापाक साजिशों का पर्दाफाश करने, दोषियों को सजा देने, पाकिस्तान में चीन की परियोजनाओं, उसके नागरिकों और कार्यालयों की सुरक्षा पक्की की करने की बात की। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए पूरी प्रतिबद्धता जताई गई।’

लेकिन पाकिस्तान से सटी सरहद पर तालिबान के बढ़ते कब्जे के बाद पड़ोसी देश के लिए अपनी मुसीबतें ही कम करना भारी पड़ रहा है। ऐसे में वह चीन के लोगों की कितनी सुरक्षा दे पाएगा, इसे लेकर संदेह है। यही कारण है कि चीन ने वहां चल रहीं अपनी परियोजनाओं की चिंता अब खुद करने का फैसला किया है। बहुत संभव है संयुक्त बयान में इसके उल्लेख के बाद जल्दी ही चीन की तरफ से कोई बड़ा कदम उठाने की खबर आए।