पाकिस्तान अटका रहा भारत आए हिंदुओं की राह में रोड़े

    दिनांक 26-जुलाई-2021   
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पाकिस्तान से भारत में आए हिंदू शरणार्थी वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहते। यहां रहने के लिए उन्हें कई तरह के कागजातों की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए वह बार-बार पाकिस्तान उच्चायोग के चक्कर लगाते हैं लेकिन उन्हें कोई न कोई कमी-पेशी बताकर वापस लौटा दिया जाता है

pakistan hign comission _
दिल्ली के चाणक्य पुरी स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के बराबर में पासपोर्ट काउंटर है। बाहर खिड़की पर कुछ लोगों की भीड़ है। लोग अपने वीजा और पासपोर्ट संबंधित कामों से वहां आए हुए हैं। भीड़ में बहुत से लोग ऐसे हैं जो पाकिस्तान से आए हुए हिंदू शरणार्थी हैं, वे भारत के विभिन्न राज्यों से वहां आए हुए हैं। किसी को कुछ काम है तो किसी का कुछ काम है। किसी को अपना एलटीवी ( लांग टर्म वीजा या लंबी अवधि का वीजा) करवाना है तो किसी को अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट जमा करना है ताकि वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सके। बहुत से लोग ऐसे हैं जो महीनों से वहां आते हैं, लाइन में लगते हैं और उन्हें कोई न कोई कारण या कागजों में कमीपेशी बताकर वापस भेज दिया जाता है। ज्यादातर संख्या ऐसे हिंदू लोगों की है जो 2009 के भारत में आए हैं। उनका पासपोर्ट जमा न हो पाने की वजह से वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं।
पाकिस्तान हाईकमीशन के बाहर टीन शेड के नीचे बने चबूतरे पर रमेशलाल अपनी पत्नी और तीन छोटे बच्चों के साथ बैठे हैं। कराची के रहने वाले रमेश 2016 में पाकिस्तान से गुजरात के राजकोट में आए गए थे। उनकी मां यहां 2013 से हैं। अब वह वहां वापस नहीं जाना चाहते, वहां वापस न जाने के कारणों पर वह बात नहीं करना चाहते, क्योंकि उनका आधा परिवार अभी भी पाकिस्तान में है, लेकिन वह बताते हैं '' मैं यहां 2016 में अपने परिवार के साथ आया था मेरे दोनों भाई और मेरी पत्नी के परिवार के लोग अभी भी वहां है, अब पाकिस्तान वापस जाना नहीं है लेकिन यहां रहने के लिए लांग टर्म वीजा चाहिए, नियमानुसार यहां पर नागरिकता के लिए 12 साल बाद आवेदन किया जा सकता है, यदि उनके पिता का जन्म 1947 से पहले हुआ होता तो वह 7 साल यहां रहने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते थे, लेकिन अब भारत में रहने के लिए उन्हें 'लंबी अवधि का वीजा' चाहिए, तभी वह भारत में रहने के लिए 'लंबी अवधि के वीजा' के लिए आवदेन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पासपोर्ट का नवीनीकरण करवाना है। वह सुबह पांच बजे ये यहां आए बैठे हैं, दो घंटे के लिए विंडो खोली गई और फिर बंद कर दी गई।'' वह बताते हैं '' क्योंकि हम लोग 2014 के बाद यहां आए हैं ऐसे में हमें बिना पासपोर्ट नवीनीकरण कराए 'लंबी अवधि का वीजा' नहीं मिलेगा। कोरोना काल में वैसे ही काम धंधे बंद हैं, महीनों से पाक हाईकमीशन में भी काम नहीं हो रहा था, ऐसे में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा रहा हैं, हम करें तो क्या करें। ''
जयपुर में रहने वाला चिदम शर्मा 2011 में कराची से भारत आए थे। चिदम शर्मा ने एमबीए किया हुआ है, वह पाकिस्तान से आए लोगों के कागजों को पूरा करवाने का काम करते हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार ने व्यवस्था की हुई है कि 2009 से पहले पाकिस्तान से जो लोग आ गए हैं वह अपने पासपोर्ट जिस राज्य के जिस जिले में रहते हैं वहां के जिलाधिकारी को सिरेंडर कर सकते हैं लेकिन जो उसके बाद आए हैं उन्हें पाकिस्तान हाई कमीशन में आकर पासपोर्ट जमा करवानाा होा है, उसकी फीस 8500 रुपए है, उसमें भी यदि पासपोर्ट का समय खत्म हो चुका है तो तीन हजार देकर पहले उसका नवीनीकरण कराना होगा, अब ऐसे में यदि किसी के घर में यदि 6 लोग हैं तो उसके तो 50 हजार से ज्यादा रुपए खर्च हो जाएंगे। जो भी लोग पाकिस्तान से आए हैं उनके स्थाई काम—धंधे नहीं हैं, नागरिकता न होने के चलते कोई स्थाई नौकरी भी नहीं है, जैसे—तैसे लोग गुजारा कर रहे हैं। कोरोना काल में तो उन्हें और ज्यादा परेशानी हो रही है। ऐसे में हमारा भारत सरकार से ​आग्रह है कि वह ऐसी व्यवस्था करे कि लोगों को इन सब परेशानियों से न गुजरना पड़े।
ऐसी ही कहानी कराची से 2013 में आए जजराज की है। जजराज अपने परिवार के साथ जयपुर में रहते हैं। वहां वह सब्जी का ठेला चलाकर गुजारा करते हैं। जजराज बताते हैं '' हमें यहां आए 8 साल हो गए हैं। उनके पिता का जन्म भी 1947 से पहले हुआ था, इस नाते वह 7 साल वाले समय के हिसाब से भारतीय नागरिकता के आवेदन कर सकते हैं, हमने आवेदन किया भी हुआ लेकिन अभी तक भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई है। दरअसल यहां कानून तो बना दिया गया है लेकिन किसी न किसी कारण से अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। इस कारण नागरिकता नहीं पाई है, ऐसे में हमें न तो नौकरी मिल सकती हैं न हम अपनी मर्जी से कहीं आ जा सकते हैं''
पाकिस्तान के हैदराबाद के रहने वाले रुपा का एक हाथ टूटा हुआ है। वह 1947 के बाद अपने पिता के साथ पाकिस्तान गए थे। वहां वह अपना व्यवसाय करते थे। उनके तीन भाई वापस लौट आए और गुजरात के राजकोट में बस गए, सभी के पास भारतीय नागरिकता है। रूपा 2012 में पाकिस्तान से यहां लौटे। उनका भरा—पूरा परिवार है, लेकिन उनके परिवार में से अभी तक किसी को भारतीय नागरिकता नहीं पाई है। छोटा—मोटा काम कर वह अपना गुजारा करते हैं। रूपा बताते हैं ''उन्हें यहां रहने के लिए लंबी अवधि का वीजा चाहिए। उनके पास अभी तक पाकिस्तानी पासपोर्ट है, पहले पासपोर्ट का नवीनीकरण होगा, इसके बाद वह भारत में रहने के लिए लंबी अवधि का वीजा ले सकते हैं, लेकिन कोरोना के चलते लंबे समय से पाकिस्तान उच्चायोग में कोई काम नहीं हो रहा था। अब जब काम होना शुरू हुआ है तो सिर्फ दो दिन ही काम हो रहा है, इस कारण उन्हें वीजा नहीं मिल पा रहा है।'' वह बताते हैं '' हम गरीब लोग हैं, हमारे लिए एक—एक पैसा बहुत कीमती है, गुजरात से यहां आकर रहना और फिर यहां पर नवीनीकरण के लिए पैसा देना हमारी क्षमता से बाहर है। हम भारत सरकार ने, गृहमंत्री अमित शाह जी से निवेदन करते हैं कि हमारे लिए कुछ व्यवस्था करें ताकि हमें इन सब परेशानियों का सामना न कर पड़े।

बलोच मुस्लिम भी नहीं जाना चाहते वापस
पाकिस्तान से आए हुए हिंदू शरणार्थी ही नहीं बल्कि बलूचिस्तान से आए हुए मुस्लिम परिवार भी वहां वापस नहीं जाना चाहते थे। नाम न बताने शर्त पर पाकिस्तानी उच्चायोग पहुंची एक बलोच महिला ने बताया कि वहां पाकिस्तानी फौज बलूचों पर इतने अत्याचार करती है कि जो वहां से निकल गए हैं वह वहां वापस नहीं जाना चाहते। वह बताती हैं '' अपने परिवार के साथ वह 2014 में बलूचिस्तान से यहां आई थीं, वह वापस नहीं जाना चाहतीं, उन्हें अभी 'लंबी अवधि के वीजा के लिए आवेदन करना है लेकिन उससे पहले उनके पासपोर्ट का नवीनीकरण होना जरूरी है, लेकिन कोरोना काल में यहां सिर्फ दो दिन काम हो रहा है ऐसे में वह महीनों से यहां चक्कर काट रही हैं। वह कहती हैं कि ऐसी कोई आसान व्यवस्था होनी चाहिए ताकि उन्हें यहां रहने के लिए लंबी अवधि का वीजा मिल जाए।