आरोपी पूर्व पुलिस अधिकारी का इसरो के पूर्व वैज्ञानिक पर आरोप, सीबीआई अदालत से की जांच की मांग

    दिनांक 27-जुलाई-2021   
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1994 के जासूसी प्रकरण में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को फंसाने के पीछे की साजिश को लेकर सीबीआई जांच में नया मोड़ आ सकता है। इस मामले में केरल के एक आरोपी पूर्व पुलिस अधिकारी एस. विजयन ने सीबीआई अदालत में याचिका दाखिल की है। इस अधिकारी ने कथित जासूसी मामले में मालदीव की दो महिलाओं मरियम रशीदा और फौजिया हसन को गिरफ्तार किया था। इसी अधिकारी ने जासूसी प्रकरण में फंसाने के लिए नंबी नारायणन को पहला आरोपी बनाया था।

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इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन

इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को विजयन और मामले के एक अन्य आरोपी पूर्व पुलिस अधिकारी थम्बी एस. दुर्गा दत्त को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने पूर्व आईबी अधिकारी पी.एस जयप्रकाश की जमानत अवधि भी बढ़ा दी।

तिरुवनंतपुरम सीबीआई अदालत में दायर याचिका में विजयन ने नारायणन और अन्य के खिलाफ कई भूमि सौदों की सीबीआई जांच करने की मांग की है। इसमें इसमें केरल के पूर्व डीजीपी रमन श्रीवास्तव का परिवार शामिल है, जिनका नाम घोटाले में आया था। इसके अलावा, उस सीबीआई अधिकारी का भी नाम है, जिसने मामले की जांच की थी और इसी आधार पर क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। सीबीआई अदालत 30 जुलाई को विजयन की याचिका पर सुनवाई करेगी।

जांच एजेंसी ने 18 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। ये सभी केरल पुलिस या केंद्र सरकार की एजेंसियों से सेवानिवृत्त हुए थे और कथित जासूसी मामले की जांच का हिस्सा थे। विजयन ने सर्वोच्‍च अदालत के उस आदेश के बाद दस्‍तावेज पेश करने के लिए याचिका दायर की है, जिसमें जांच एजेंसी को जासूसी प्रकरण के पीछे साजिश की जांच करने का निर्देश दिया गया है। अपनी याचिका में विजयन ने कहा है कि सीबीआई अधिकारियों के समक्ष बयान दर्ज कराने के दौरान वह और सबूत देना चाहते थे, जिसके आधार पर 1994 में नंबी नारायणन की गिरफ्तारी हुई थी। लेकिन सीबीआई अधिकारियों ने सबूतों को स्‍वीकार करने से इनकार कर दिया था।

विजयन ने अदालत के समक्ष 22 सबूत ने प्रस्तुत किए हैं, जिनमें 16 संदिग्‍ध भूमि सौदों से हैं। अदालत से प्रत्येक दस्तावेज और लाभार्थियों की सीबीआई से विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है।

याचिका में विजयन ने कहा है कि उन्होंने 2008 में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में पूर्व डीजीपी रमन श्रीवास्तव की पत्नी अंजलि श्रीवास्तव के नाम 6.13 एकड़ जमीन की बिक्री से संबंधित एक दस्तावेज पेश किया था। याचिका में उन परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है जिनके कारण सेल डीड का पंजीकरण किया गया। नारायणन के पास अंजलि का पावर ऑफ अटॉर्नी था।

विजयन द्वारा पेश एक अन्‍य सबूत सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक राजेंद्रनाथ कौल के नाम पर तिरुनेलवेली जिले में 5.34 एकड़ भूमि से संबंधित है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि 2008 में कौल ने अपने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक नारायणन के माध्यम से जमीन को कथित तौर पर के. बालन को बेच दिया था। इसी तरह, एक अन्य सबूत में कहा गया है कि कौल ने उसी साल अपने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक नारायणन के माध्यम से एस. रामचंद्रन को 10.39 एकड़ जमीन बेची थी। ये सभी भूमि सौदे और अन्य सूचीबद्ध सबूत करीब 110 एकड़ जमीन के हैं, जो तिरुनेलवेली जिले के नांगुनेरी उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत किए गए थे।

याचिका में नारायणन द्वारा 1 नवंबर, 1994 को दायर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति आवेदन की जांच की भी मांग की गई थी, जिसमें तीन महीने की नोटिस अवधि को माफ करने और व्यक्तिगत कारणों से 11 नवंबर को उन्हें राहत देने का विशेष अनुरोध किया गया था। विजयन की याचिका में कहा गया है कि मालदीव की महिलाओं को नारायणन द्वारा वीआरएस आवेदन देने के 10 दिन बाद गिरफ्तार किया गया था। विजयन ने याचिका में यह भी कहा कि कुरियन ई. कलाथिल नाम के एक व्यापारी के नाम पर नंबी नारायणन के घर पर कथित तौर पर बीएसएनएल टेलीफोन लगाया गया था, जबकि इसरो ने पूर्व वैज्ञानिक के घर के लिए एक लैंडलाइन आवंटित कर रखा था। विजयन की याचिका के अनुसार, टेलीफोन 1 अगस्त] 1994 से चालू हुआ, लेकिन दो महीने में ही 45,498 रुपये का बिल आया। विजयन का आरोप है कि इससे पता चलता है कि टेलीफोन से अंतराष्‍ट्रीय कॉल किए गए थे। इसलिए सीबीआई को इसकी जांच करनी चाहिए।

क्‍या कहा था सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने

एक दिन पहले ही इसरो जासूसी प्रकरण में सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने सीबीआई से कहा था कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एजेंसी अपनी जांच करे और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। ये जांच और कानूनी कार्रवाई अपनी एफआईआर और जांच के आधार पर हो। न्‍यायमूर्ति ए.एम खानविलकर और संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, 'वे (सीबीआई) केवल रिपोर्ट के आधार पर आपके (आरोपी) के खिलाफ आगे नहीं बढ़ सकते। उन्हें जांच करनी है, सबूत एकत्र करना है और फिर कानून के अनुसार आगे बढ़ना है। अंतत: जांच ही की जाएगी। रिपोर्ट आपके अभियोजन का आधार नहीं हो सकती है।'