भारी बारिश से कोंकण में कोहराम, स्वयंसेवक लगे सेवा में

    दिनांक 27-जुलाई-2021
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—राजेश प्रभु सालगांवकर

इन दिनों महाराष्ट्र में भारी बारिश हो रही है। लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। सबसे बुरा हाल है कोंकण क्षेत्र का। शहरों और गांवों में 12 से 14 फीट तक पानी जमा है। लोगों की मदद करने में सरकारी तंत्र विफल हो चुका है, इसे वहां के एक मंत्री ने ही स्वीकारा है। संघ के स्वयंसेवक राहत कार्य चला रहे हैं
masoon_1  H x Wइस तरह डूब गया चिपलूण शहर। वहां के बस डिपो में खड़ी बसें भी डूब गईं।


महाराष्ट्र में भारी वर्षा से आम जीवन अस्त—व्यस्त है। कहा जा रहा है कि 2005 के बाद इस वर्ष इतनी बारिश हो रही है। कोंकण तथा पश्चिम महाराष्ट्र में तो 70 वर्ष बाद ऐसी वर्षा हो रही है। कोंकण क्षेत्र के रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगढ़, पालघर तथा ठाणे जिलों में दर्जनों गांव तथा शहर 12 से 14 फीट पानी के नीचे हैं। रत्नागिरी जिले के चिपलूण जैसे महत्वपूर्ण शहर के अंदर लगभग 14 फीट पानी जमा है। रायगढ़ जिले में कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। भूस्खलन से महाड तहसील के एक गांव में 40 लोगों की मौत हुई है। सिंधुदुर्ग जिले में दर्जनों गांव पानी के नीचे चले गए हैं। पूरे कोंकण क्षेत्र में कई जगह रास्ते और पुल बह जाने के कारण सभी गांवों से संपर्क टूटा हुआ है।
बाढ़ का पानी गांवों तथा शहरों में अंदर तक भरने के कारण हजारों घर बर्बाद हो चुके हैं। सभी गांवों की बिजली बंद है। कोंकण रेलवे का परिचालन बंद है। उत्तर कोंकण के पालघर तथा ठाणे जिले में भी बारिश का कहर बरपा हुआ है। मुंबई शहर में भारी बारिश के कारण भूस्खलन तथा घरों में पानी भरने के कारण 50 के आसपास मौतें हुई हैं।

कोंकण और मुम्बई के अलावा सातारा, सांगली तथा कोल्हापुर जिलों में भी भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सांगली जिले के पालक मंत्री तथा राज्य के जलसंपदा मंत्री जयंत पाटिल ने कहा है, "प्राकृतिक आपदा के सामने उनकी सरकार कुछ नहीं कर पाएगी!" उनके इस बयान से पता चलता है कि राज्य सरकार इस बारिश के सामने अपने को कितना असहाय मान रही है। हालांकि इस स्थिति के लिए स्वयं राज्य सरकार ही जिम्मेदार है। जब लोग बाढ़ से बेघर हो रहे थे, तब राज्य के अनेक वरिष्ठ मंत्री ईद मनाने में व्यस्त थे। सरकार ने पहले ही ध्यान नहीं दिया। इस कारण सरकार लोगों तक मदद पहुंचाने में पूरी तरह विफल रही।

रायगढ़ जिले की महाड तहसील में मुंबई—गोवा राष्ट्रीय महामार्ग से नजदीक जहां भूस्खलन हुआ, वहां 36 घंटे तक प्रशासन एक भी जेसीबी मशीन उपलब्ध नहीं करा पाया।  शिवसेना के नेता भास्कर जाधव स्वयं चिपलूण शहर के निवासी हैं। पूरा चिपलूण बाढ़ से ग्रस्त है, पर जाधव गायब हैं।  यही नहीं, राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री विजय वडेट्टीवार (कांग्रेस), राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात (कांग्रेस), राज्य के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल (एनसीपी) ये सभी इस भयानक बाढ़ के समय गायब रहे। सहायता एवं पुनर्वास विभाग स्वयं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे संभाल रहे हैं, जो दुर्भाग्य से एक नाकाम विभाग सिद्ध हो रहा है।

इस भयानक बाढ़ के समय जनता को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से समय पर कोई भी हेल्पलाइन शुरू नहीं की गई, न ही समय पर एनडीआरएफ तथा सेना को बुलाया गया। पूरे कोंकण इलाके में जो भी राहत और सहायता कार्य चला है वह स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से चला है या केंद्र सरकार के माध्यम से चल रहा है। राज्य सरकार का पूरा शासनतंत्र कहीं भी दिखाई नहीं दिया है। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे कोंकण इलाके का दौरा कर रहे हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस प्रमुखता से सहायता कार्य का मार्गदर्शन कर रहे हैं।  विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर कोंकण की कई तहसीलों तथा मुंबई शहर में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। लेकिन रत्नागिरी के पालक मंत्री उदय सामंत को छोड़कर राज्य का कोई भी मंत्री कोंकण के किसी भी शहर या गांव में नहीं पहुंचा है। मीडिया में हुई आलोचना के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 24 जुलाई को रत्नागिरी जिले का हवाई दौरा किया, लेकिन प्रभावित लोगों के लिए उन्होंने कोई संतोषजनक बात नहीं कही। 

इन सबको देखते हुए लोग यह कहने लगे हैं कि उद्धव ठाकरे सरकार न कोरोना की स्थिति का सामना कर पायी, न चक्रवात का, न बारिश, न बाढ़ का! अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए राज्य के अनेक मंत्री केंद्र सरकार पर दोष मढ़ रहे हैं। ऐसा ही उस समय किया गया था, जब कोरोना महामारी चरम पर थी। राज्य सरकार ने अपनी गलतियों को ढकने के लिए के लिए कोरोना का पूरा दोष केंद्र सरकार पर मढ़ दिया था। इसका परिणाम आज तक महाराष्ट्र के लोग भुगत रहे हैं।



संघ के स्वयंसेवक कर रहे हैं कार्यहर आपादा की तरह इस बार भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता बाढ़ प्रभावित लोागों की सहयता करने में सबसे आगे हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, घरों में रखे अनाज को बचाना, जरूरतमंंदों को दवाई देना, कपड़ों की व्यवस्था करना, रास्ते में तथा रेल गाड़ियों में
फंसे लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करना जैसे कार्य संघ के स्वयंसेवक कर रहे हैं। रा.स्व. संघ जनकल्याण समिति की ओर से कई जगह यह सहायता की जा रही है। अभाविप की ओर से कोंकण प्रांत तथा पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत में कई जगह हेल्पलाईन चलाई जा रही है।

—सार्वजनिक निर्माण विभाग की प्राथमिक जानकारी के अनुसार 290 रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं या बह गए हैं। 470 सड़कों पर यातायात बंद है। कोंकण तथा पश्चिम महाराष्ट्र में 140 पुल बह गए हैं।

—चिपलूण के बस डिपो में इतना पानी भरा कि बसें डूब गईं। डिपो प्रबंधक सहित सात कर्मचारियों ने एक बस पर चढ़कर अपनी जान बचाई। ये लोग लगभग 16 घंटे तक बस की छत पर पर बैठे रहे। डिपो प्रबंधक के पास 7,00,000 रु. भी थे।

— चिपलूण में नवनिर्मित राजा शिवाजी संग्रहालय में 24 घंटे तक पानी जमा रहा। इस कारण अनेक महत्वपूर्ण प्राचीन दस्तावेज नष्ट हो गए हैं।

—चिपलूण शहर में कहीं भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।

— कोंकण इलाके में सैकड़ों लोग लापता हैं।

 — 26 जुलाई तक कोंकण तथा पश्चिम महाराष्ट्र में 2,30,000 लोगों को सुरक्षित स्थलों पर ले जाया गया है और 164 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। 1,028 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 25,000 जानवर मृत पाए गए हैं।

— लोगों का मानना है कि कलकवाडी बांध से गैर—जिम्मेदाराना तरीके से पानी छोड़ने के कारण चिपलूण में बाढ़ का कहर बरपा। लोग मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।