अमेरिका : हिंदू संगठन की मांग-पाकिस्तान, तुर्की और रूस का संयुक्त ड्रोन तकनीक उत्पादन विश्व के लिए खतरा, अमेरिकी कांग्रेस करे विरोध

    दिनांक 29-जुलाई-2021   
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जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के माध्यम से जिस तरह की हरकतें देखने में आईं उस पर गौर करें तो पाकिस्तान, तुर्की और रूस का संयुक्त ड्रोन तकनीक कार्यक्रम खतरा पैदा कर सकता है 
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हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन के टी. कौशाकजिआन


पीटीआई की रपट है कि अमेरिका में वहां के एक हिंदू संगठन पाकिस्तान, तुर्की और रूस के संयुक्त ड्रोन तकनीकी कार्यक्रम के विरोध में उतर आया है। इस विषय पर संगठन, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने अमेरिकी कांग्रेस से समर्थन की मांग की है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एफएएच) ने उक्त तीनों देशों के मिलकर ड्रोन तकनीकी के उत्पादन का विरोध इसलिए किया है क्योंकि इससे दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों को खतरे के आसार हैं। इसीलिए एफएएच ने कहा है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अमेरिकी कांग्रेस उसकी मांग का समर्थन करे और इस कार्यक्रम को निरस्त करवाए।

ब्लिंकन को लिखा पत्र
उल्लेखनीय है कि गत सप्ताह डेविड सिसिलिन और गस बिलिरकिस सहित दूसरे दल के सांसदों के एक समूह ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखा था। उसमें तुर्की को अमेरिकी ड्रोन तकनीकी के लिए निर्यात लाइसेंस रद्द करने की मांग की गई थी। बताया गया था कि कैसे यह कार्यक्रम गंभीर परिणामों की वजह बन सकता है। काकेशस, दक्षिण एशिया, पूर्वी भूमध्यसागर और दुनियार के दूसरे क्षेत्रों में अंकारा के ड्रोन कार्यक्रमों की भूमिका की जांच अभी की जानी है। इसी वजह से हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस निर्यात लाइसेंस के विरुद्ध अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन मांगा है।

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अमेरिकी ड्रोन कार्यक्रम   (प्रतीकात्मक चित्र)

हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन के निदेशक टी. कौशाकजिआन का कहना है कि 'तुर्की द्वारा उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व, दक्षिण काकेशस और दक्षिण एशिया तक माहौल को बिगाड़ने के संकेत देखने होंगे। साथ ही, अमेरिका, इसके हित तथा इसके सहयोगियों और भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों के लिए यह साफतौर पर एक खतरा ही है।' 

भारत के लिए खतरा
फाउंडेशन ने पिछले दिनों एक वक्तव्य जारी करके अमेरिकी सांसदों के इस ओर बढ़ाए कदम का समर्थन किया था। वक्तव्य में कहा गया था कि युद्धक यूएवी के

पाकिस्तान-रूस—तुर्की के संयुक्त उत्पादन के रास्ते दुनिया के तमाम लोकतंत्रों को खतरे में डालना उचित नहीं है। फाउंडेशन ने 26—27 जून को जम्मू—कश्मीर में ड्रोन से हुई आतंकी कार्रवाई का उल्लेख भी किया। संस्था निदेशक टी. कौशाकजिआन का कहना है कि 'तुर्की द्वारा उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व, दक्षिण काकेशस और दक्षिण एशिया तक माहौल को बिगाड़ने के संकेत देखने होंगे। साथ ही, अमेरिका, इसके हित तथा इसके सहयोगियों और भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों के लिए यह साफतौर पर एक खतरा ही है।' कौशाकजिआन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में तुर्की के युद्धक यूएवी और वहां सक्रिय जिहादी गुटों की मिलीभगत भारत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।