बलूचिस्तानपाकिस्तान के विरुद्ध बलूचों का चढ़ता पारा, चीनी कंपनी को किया आग के हवाले

    दिनांक 05-जुलाई-2021   
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बलूच आर्मी कर रही पाकिस्तान में पृथक बलूचिस्तान की मांग, बढ़ते आक्रोश के चलते चीनी कंपनी को फूंका
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बलूचिस्तान की आजादी की मांग करता बीएनपी का एक प्रदर्शन। (प्रकोष्ठ में) अख्तर मिंगल   (फाइल चित्र) 


पाकिस्तान में अलग बलूचिस्तान की मांग का ताप लगातार बढ़ता जा रहा है। बलूच पाकिस्तानी सेना के दमन का शिकार हो रहे हैं। बलूच युवा लगातर मारे जा रहे हैं, अगवा किए जा रहे हैं। बलूच महिलाओं को पाकिस्तानी फौजी यौन शोषण का शिकार बना रहे हैं। इस सबके बीच बलूचिस्तान में आजादी का आंदोलन भी तेज होता जा रहा है। इसी उद्देश्य से अभियान चला रही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) सत्ता के खिलाफ एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है। अब बीएलए का कहना है कि उसके द्वारा चीन की दूरसंचार कंपनी को फूंक दिया गया है। इतना ही नहीं, उस कंपनी में काम कर रहे छह कामगारों को अगवा कर लिया है।

एजेंसी के समाचार के अनुसार, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने स्पष्ट कहा है कि अगवा किए इन कामगारों को तभी छोड़ा जाएगा जब संयुक्त राष्ट्र या रेडक्रास दखल देंगे। चीनी कंपनी में काम करने वाले इन कामगारों को मारगोट चोखोबी बाध इलाके से अगवा किया गया है।

पाकिस्तान कर रहा जासूसी

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान आजाद बलूच आंदोलन की मांग है कि बलूचिस्तान को पृथक देश बनाया जाए। सब जानते हैं कि बलूचिस्तान में चीन की कम्युनिस्ट सरकार पाकिस्तान को पूरी तरह अपने पाश में जकड़ चुकी है। बीआरआई परियोजना पर बेलगाम अमल करने के अलावा चीन ने खासकर बलूचिस्तान में दूरसंचार कंपनियों का ताना—बाना बुनना शुरू किया है। बताते ह। कि पाकिस्तान इन कंपनियों से मिलीभगत करके बलूच लोगों की जासूसी भी करता है। साथ ही, ग्वादर बंदरगाह पर चीन ने अपना शिकंजा कस लिया है। इससे भी बलूच लोग गुस्से में हैं। गत कुछ वर्षोें में वहां बढ़ते चीनी दखल के विरुद्ध अनेक प्रदर्शन हुए हैं।

पाकिस्‍तान सरकार पर बलूचों को किसी तरह का भरोसा नहीं रहा है। बलूच नेशनल पार्टी प्रमुख अख्‍तर मिंगल ने कहा कि बलूचिस्‍तान 1947 से पहले तक स्वतंत्र था। इस पर पाकिस्‍तान ने अवैध कब्‍जा किया हुआ है। पाकिस्तान सरकार ने बलूचों के अस्तित्व को ही मिटा देने के लिए फौज के माध्यम से कई कार्रवाइयों में सैकड़ों बेगुनाह बलूचों का खून बहाया है।

चीनी कंपनी के कामगारों के अपहरण की खबर फैलने पर बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद और 'वॉयस आफ बलूच मिसिंग पर्सन्स' संस्था के अध्यक्ष नसरुल्लाह बलूच ने एक बयान जारी करे अगवा किए गए कामगारों को मानवीय आधार पर रिहा करने की अपील की है। इसके बाद ही, बलूच आर्मी का बयान आया है कि संयुक्त राष्ट्र या रेडक्रास के दखल देेकर गारंटी देने के बाद ही उन्हें छोड़ा जा सकता है।

पाकिस्‍तान सरकार पर तो बलूचों को किसी तरह का भरोसा नहीं रहा है। इमरान की सरकार के खिलाफ बलूचिस्‍तान वालों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। बलूच नेशनल पार्टी यानी बीएनपी के अध्यक्ष अख्‍तर मिंगल ने कई बार कहा है कि बलूचिस्‍तान 1948 से पहले तक स्वतंत्र था। इस पर तो पाकिस्‍तान ने 27 मार्च 1948 से अवैध कब्‍जा किया हुआ है। बलूच लोग तबसे ही अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने बलूचों के अस्तित्व को ही मिटा देने के लिए फौज के माध्यम से कई कार्रवाइयों में सैकड़ों बेगुनाह बलूचों का खून बहाया है। असंख्य बलूच जेलों में कैद हैं, बहुतों का तो आज तक कुछ पता नहीं है।