प्रतिरक्षा : शांति चाहिए तो पूर्वी लद्दाख से सेना वापस करो, भारत का चीन को स्पष्ट संकेत

    दिनांक 09-जुलाई-2021   
Total Views |
सीमा पर जब तक चीनी सैनिकों की बेवजह की हलचल रहेगी तब तक शांति कायम नहीं हो सकती। लद्दाख सीमा को लेकर भारत ने जताया अपना दृढ़ मत
narveny_1  H x
जून, 2021 में गलवान घाटी में भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों को भारत की सीमा में घुसपैठ करने से रोकते हुए, इसी झड़प में चीनी फौज ने कायदे तोड़कर हिंसक हमला किया था और भारतीय सैनिकों से मुंह की खाई थी    (फाइल चित्र)
 
भारत के विदेश विभाग ने चीन के साथ शांति बहाली के लिए पूर्वी लद्दाख से चीनी सेना की वापसी की पहली शर्त रखकर ड्रेगन को नए भारत के सामर्थ्य और आत्मविश्वास की एक बार फिर झलक दी है। 8 जुलाई को एक प्रेस वार्ता में भारत के विदेश विभाग प्रवक्त अरिंदम बागची ने साफ कहा कि चीन से गतिरोध वाले क्षेत्रों से सैन्य वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी होने पर ही सीमावर्ती इलाकों में शांति बहाली हो सकती है। सैन्य वापसी द्विपक्षीय संबंधों में आगे बढ़ने की दृष्टि से अहम है।

 उल्लेखनीय है कि गत 25 जून को भारत-चीन के बीच सीमा मामलों पर विचार और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की 22वीं बैठक वर्चुअल तरीके से संपन्न हुई थी। इस बैठक में दोनों पक्षों ने पश्चिमी क्षेत्र में सीमांत क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े हालातों पर विचार साझा किए थे। टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों की पूर्ण वापसी के लिए जो भी समाधान खोजा जाना हो, उस पर आगे वार्ता जारी रखने पर सहमती हुई थी।

narveny_1  H x
जनरल एम.एम. नरवणे
जून 2021 में भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे ने कहा भी था कि पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी क्षेत्रों से सेना के पूरी तरह से पीछे हटे बिना स्थिति सामान्य नहीं हो सकती है। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ यह भी कहा था कि भारत की सेना सीमा पर किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।


पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में चीन के दुस्साहस का भारत द्वारा दिए कठोर जवाब को कोई भारतवासी भूला नहीं है। पूर्वी लद्दाख में सीमा को लेकर चीन ने जो धुंधलका फैलाने की शरारती कोशिश की थी उसके बाद से भारत की रक्षा पंक्ति वहां और चौकस हो गई है। खबर ये भी मिलती रही हैं कि चीन की वहां तैनात सैन्य टुकड़ी के लिए आधुनिकतम उपकरण, लड़ाकू साजोसामान जमा किया गया है। लेकिन भारत ने सैन्य और कूटनीति, दोनों तरीकों से विश्व समुदाय को चीन की हरकतों से परिचित कराया है। लेकिन उस घटना के बाद से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध जारी है।

दोनों पक्षों ने कई दौर की सैन्य एवं राजनयिक वार्ताओं के बाद फरवरी 2021 में पैगोंग त्से झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन पता चला है कि कुछ इलाकों में सैनिकों के पीछे हटने को लेकर अड़चनें बनी हुई हैं। जून 2021 में भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे ने कहा भी था कि पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी क्षेत्रों से सेना के पूरी तरह से पीछे हटे बिना परिस्थितियां सामान्य नहीं हो सकती हैं। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ यह भी कहा था कि भारत की सेना सीमा पर किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।