पाकिस्तानी कब्जे वाले भारत के जम्मू-कश्मीर में सुल्तान महमूद को बना दिया गया 'राष्ट्रपति', पहले रह चुके हैं 'प्रधानमंत्री'

    दिनांक 26-अगस्त-2021   
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भारत की ओर से जुलाई में संपन्न हुए पीओके के विधानसभा चुनावों को ‘दिखावे की कवायद’ ठहराते हुए इस पर तीखी टिप्पणी की गई थी। भारत ने कहा था कि यह चुनाव पाकिस्तान का ‘अपने अवैध कब्जे को छिपाने’ का असफल प्रयास है
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सुल्तान महमूद  (फाइल चित्र)

भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर के अपने कब्जे वाले हिस्से में पाकिस्तान की मनमर्जी लगातार जारी है। अब पीओके कहलाए जाने वाले उस हिस्से में जुलाई में चुनाव कराने के बाद, भारत के इस्लामी पड़ोसी ने इलाके के पुराने राजनीतिक सुल्तान महमूद को 25 अगस्त को नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिला दी है। महमूद को 17 अगस्त को विधानसभा ने इस पद के लिए चुना था। बता दें कि पीओके में सरकार ने 25 जुलाई को चुनाव कराए थे। इन चुनावों में विपक्षी दलों द्वारा प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई पर बड़े पैमाने पर धांधली के दम पर जीतने के आरोप लगाए थे लेकिन इमरान ने सारे आरोपों को अनसुना करते हुए राष्ट्रपति चयन की प्रक्रिया जारी रखी।

महमूद पीओके के 28वें राष्ट्रपति बने हैं। इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने ही उन्हें इस पद के लिए प्रस्तावित किया था। महमूद के प्रतिद्वंद्वी थे विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार मियां अब्दुल वहीद। वहीद को 16 वोट मिले थे जबकि महमूद ने 34 वोट जीते थे। महमूद अब सरदार मसूद खान की जगह लेंगे। मसूद को कार्यकाल 24 अगस्त को ही पूरा हुआ है।

पीओके में सरकार ने 25 जुलाई को चुनाव कराए थे। इन चुनावों में विपक्षी दलों द्वारा प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई पर बड़े पैमाने पर धांधली के दम पर जीतने के आरोप लगाए थे लेकिन इमरान ने सारे आरोपों को अनसुना करते हुए राष्ट्रपति चयन की प्रक्रिया जारी रखी।

ये वही महमूद हैं जो जुलाई 1996 से जुलाई 2001 तक पीओके के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। क्षेत्र के पीटीआई अध्यक्ष महमूद दो विधानसभा क्षेत्र एलए-3, मीरपुर-3 से विधानसभा चुनाव जीते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत की ओर से जुलाई में संपन्न हुए पीओके के विधानसभा चुनावों को ‘दिखावे की कवायद’ ठहराते हुए इस पर तीखी टिप्पणी की गई थी। भारत ने कहा था कि यह चुनाव पाकिस्तान का ‘अपने अवैध कब्जे को छिपाने’ का असफल प्रयास है। भारत ने इस विषय पर अपना दृढ़ रुख दर्शाते हुए अपना कड़ा एतराज दर्ज कराया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने तक बयान जारी करके कहा था कि पाकिस्तान का ‘भारत के इन क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है। पाकिस्तान वहां से अपने अवैध कब्जे को खाली करे'।