तालिबान की वजह से दुनिया में बदनाम हुआ पाकिस्तान, इंटरनेट पर कोसा जा रहा इस्लामी देश

    दिनांक 28-अगस्त-2021   
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सोशल मीडिया और इंटरनेट पर पाकिस्तान पर पाबंदी लगाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। दुनियाभर में लोग जान चुके हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान की मदद के लिए पाकिस्तान ने ही अपने यहां के जिहादी भेजे हैं
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अफगानिस्तान में तालिबान के साथ खड़े हैं पाकिस्तान से भेजे गए आतंकी (फाइल चित्र) 
अफगानिस्तान में तालिबान के चढ़ आने के बाद और पाकिस्तान की साख मिट्टी में मिलने लगी है। इंटरनेट पर लोगों द्वारा पाकिस्तान को अफगानिस्तान संकट को हवा देने वाला देश बताकर उसको दुत्कारा जा रहा है।
अपने मजहबी कट्टरवादी मंसूबों और आतंकवाद को पोसने के चलते पहले से ही बदनाम पाकिस्तान साख के मामले में अब और गर्त में जा रहा है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद तो इस पूरे प्रकरण में पाकिस्तान की भूमिका अब पुष्ट होती जा रही है। तालिबान जैसे खूंखार आतंकी गुट के लिए पैसा उपलब्घ कराने के साथ ही, आतंकी भर्ती, उनके प्रशिक्षण, हथियार और रसद आदि उपलब्ध कराने में पाकिस्तान की सेना और आईएसआई का हाथ साफ जाहिर हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि तालिबान की ओर से जैश और लश्करे तैयबा के हजारों पाकिस्तानी जिहादियों ने भी अफगान फौज से लड़ाई की थी। खुद अफगान अधिकारियों ने कई बार पाकिस्तान की इस तरह की करतूतों से पर्दा हटाया था। अमेरिकी दैनिक प्यूयार्क टाइम्स में पाकिस्तान के संदर्भ में जेन पार्लेज का एक लेख पढ़ने लायक है। लेख में पार्लेज लिखते हैं कि पश्चिमी देशों में पाकिस्तान का नाम पहले ही धूमिल रहा है। लेकिन अब तो अफगानिस्तान में तालिबान के सशस्त्र कब्जे के बाद से उसकी छवि और खराब होनी तय है।
जेन लिखते हैं कि अफगानिस्तान पर जो तालिबान का कब्जा हुआ है, असल में वह पाकिस्तान की जीत ही है। वहां पाकिस्तान के हाथ में हाथ डाले चीन भी दखल बढ़ाता गया है। काबुल में इन दोनों देशों के दूतावास अब भी काम कर रहे हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के सशस्त्र कब्जे के बाद से पाकिस्तान की छवि और खराब होनी तय है।
जेन ने लिखा है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इस्लामाबाद पर पाबंदी लगाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। विदेशों से पैसा न मिले तो पाकिस्तान काबुल के नए हुक्मरानों के माध्यम से नशे के धंधों पर निर्भर हो जाएगा। पार्लेज कहते हैं कि अलकायदा और तालिबान के खिलाफ अमेरिकी लड़ाई में साझीदार के तौर पर पाकिस्तान ने पिछले 20 साल में अमेरिका से अरबों डालर की मदद ली थी। पिछले तीन महीने में अफगानिस्तान में अपना असर बढ़ाते जा रहे तालिबान लड़ाकों को पाकिस्तान अपने सीमा क्षेत्रों में पनाह देकर उनकी सेवा-टहल में लगा था।
जेन लिखते हैं कि अफगानिस्तान पर जो तालिबान का कब्जा हुआ है, असल में वह पाकिस्तान की जीत ही है। वहां पाकिस्तान के हाथ में हाथ डाले चीन भी दखल बढ़ाता गया है। काबुल में इन दोनों देशों के दूतावास अब भी काम कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए के सुप्रीमो रहे राबर्ट ग्रेनर ने भी कहा है, 'पाकिस्तान और उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई खुश हैं कि अफगानिस्तान में उनकी जीत हुई है, लेकिन अगर तालिबान कुर्सी पर बैठा तो ज्यादा दिन नहीं बीतेंगे कि जब वे पाकिस्तान को भी आंखें दिखाएंगे।