चोट यहां, दर्द वहां

    दिनांक 28-अगस्त-2021   
Total Views |
गत दिनों फरीदाबाद के अरावली वन क्षेत्र में अवैध रूप से बने अनेक मंदिरों के साथ—साथ चर्च, गु्रुद्वारा और मस्जिदों को भी तोड़ा गया। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हुई, लेकिन पाकिस्तान ने केवल मस्जिद तोड़ने की बात कहकर मुसलमानों को भड़काने की कोशिश की। हालांकि उसके बहकावे में कोई नहीं आया।
bilal_1  H x W:
खोरी गांव में बनी अवैध बिलाल मस्जिद, जिसे 17 अगस्त को तोड़ दिया गया है। इस तोड़फोड़ में मंदिर, चर्च और गुरुद्वारे भी टूटे हैं, लेकिन पाकिस्तान को केवल मस्जिद टूटने का दर्द हो रहा है। 
जिस पाकिस्तान में दिनदहाड़े सदियों पुराने मंदिरों को तोड़कर लोग उस पर कब्जा कर लेते हैं, वह पाकिस्तान भारत में एक अवैध मस्जिद को प्रशासन द्वारा तोड़ने पर झूठ बोलता है— ''देखो भारत में भाजपा राज में मुसलमानों की कितनी बुरी स्थिति है कि उनकी मस्जिदें भी तोड़ी जा रही हैं।'' बता दें कि पिछले दिनों हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली वन क्षेत्र में स्थित खोरी गांव को प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर तोड़ दिया है। इस दौरान घरों के साथ—साथ मंदिरों, चर्चों, गुरुद्वारों और मस्जिदों को भी तोड़ा गया है। चूंकि यह गांव अवैध रूप से वन क्षेत्र में बसा था, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर कोई नरमी नहीं दिखाई। यही नहीं, इस क्षेत्र में बने बहुत सारे प्रभावशाली लोगों के मकान भी तोड़े जा रहे हैं। यह कार्रवाई अभी भी चल रही है। लेकिन पाकिस्तान ने खोरी गांव की अवैध 'बिलाल मस्जिद' को तोड़ने का मुद्दा उठाकर भारत के मुसलमानों को भड़काने में कोई कोर—कसर नहीं छोड़ी। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ्तिखार अहमद ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा था, ''पाकिस्तान हरियाणा में भारतीय प्रशासन की ओर से बिलाल मस्जिद के अन्यायपूर्ण तरीके से तोड़े जाने की कड़ी निंदा करता है।'' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 'बीजेपी-आरएसएस' के राज में भारत में न्यायपालिका की स्थिति कमजोर हुई है। ट्वीट में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भारत को जवाबदेह ठहराया जाए।
इस पर भारतीयों ने सोशल मीडिया में पाकिस्तान की जमकर खिंचाई की है। पाकिस्तान के इस गैरजिम्मेदाराना ट्वीट के बाद जब लोगों ने नसीहत देना शुरू कर दिया तो पाकिस्तान सरकार के सारे प्रवक्ता चुप बैठ गए। अनेक भारतीयों ने सोशल मीडिया में लिखा कि चोट यहां पड़ रही है और दर्द वहां यानी पाकिस्तान में हो रहा है। यह भी लिखा कि पाकिस्तान अपने यहां की उन अहमदिया मस्जिदों को ही बचा ले, तो बड़ी बात हो जाएगी, जिन्हें यह कहते हुए बम से उड़ाया जा रहा है कि अहमदिया मुसलमान नहीं हैं, इसलिए उनकी मस्जिदें भी नहीं रहनी चाहिए।