राजस्थान में भीषण बिजली संकट, हालात सुधारने को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला आगे आए

    दिनांक 30-अगस्त-2021   
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राजस्थान में कोयले की किल्लत से बिजली संकट गहरा गया है। सूबे के कालीसिंध और सूरतगढ़ थर्मल प्लांट की सभी इकाइयां बंद होने के कारण 4000 मेगावाट बिजली का उत्पादन ठप हो गया है। राज्य को इस संकट से उबारने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला आगे आये हैं। उन्होंने तत्काल कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर राज्य को कोयला आपूर्ति बढ़ाने को कहा है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बिजली कटौती के लिए राज्य की अशोक गहलोत सरकार पर हमलावर हैं। राज्य में बिजली संकट के लिए उन्होंने कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।
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दरअसल,
कोयले की किल्लत के कारण राज्य के दो थर्मल प्लांट की सभी इकाइयों में बिजली उत्पादन ठप हो गया है। इसके कारण अघोषित रूप से बिजली कटौती की जा रही है। इससे खासतौर से ग्रामीण इलाकों में किसानों को बिजली नहीं मिल रही है। राज्य में कोयले की कमी के कारण गहराते बिजली संकट पर राज्य के ऊर्जा मंत्री डॉ. बी.बी. कल्ला ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से बात की और उनसे कोयला मंत्रालय से बात कर राज्य में कोयले की आपूर्ति बढ़वाने का आग्रह किया। हालांकि ओम बिरला इन दिनों लेह-लद्दाख और श्रीनगर के प्रवास पर हैं, फिर भी उन्होंने राज्य के ऊर्जा मंत्री के आग्रह के बाद कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की और राजस्थान के लिए कोयला आपूर्ति बढ़ाने को कहा है।
ये हैं हालात
राज्य में बिजली किल्लत का आलम यह है कि एक्सचेंज से बिजली खरीद के लिए अधिकतम दर पर जो सीलिंग लगाई गई थी उसे हटाना पड़ा। इसके बाद प्रति यूनिट 18 रुपये तक बिजली खरीदी गई। हालांकि कीमत अधिक चुकाने के बावजूद भी राजस्थान को एक्सचेंज से केवल 15 से 20% बिजली ही मिल पा रही है। बता दें कि कुछ माह पहले तक एक्सचेंज से 3.50 से 5 रुपये के बीच बिजली खरीदी जा रही थी, लेकिन बाद में 6.50 रुपये प्रति यूनिट तक सीलिंग लगा दी गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि घर आते बिजली संकट के बीच ऊर्जा विकास निगम किस दर पर एक्सचेंज से बिजली खरीद रहा है इसका खुलासा भी नहीं कर रहा है।
सब कुप्रबंधन का नतीजा
राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने बिजली संकट के लिए गहलोत सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार के को प्रबंधन के कारण सूबे में अघोषित तौर पर बिजली कटौती की जा रही है। इसके कारण गांव और कस्बों में ही नहीं, शहरी इलाकों के लोग भी परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की लापरवाही और उदासीनता के कारण सबसे बड़ा सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट भी ठप हो गया है। थर्मल प्लांट को कोयला ही नहीं मिल पा रहा है। यदि समय पर कोयले की आपूर्ति होती तो बिजली उत्पादन में कोई बाधा नहीं आती।