मुल्ला अखुंदजादा 'सुप्रीम लीडर', बरादर या याकूब बन सकते हैं प्रधानमंत्री

    दिनांक 01-सितंबर-2021   
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चर्चा है कि तालिबान 'पश्चिमी देशों के प्रभाव में बने' देश के वर्तमान संविधान को निरस्त करके 55 साल पुराने संविधान को दुबारा लागू कर सकते हैं
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मुल्ला अखुंदजादा और मुल्ला बरादर   (फाइल चित्र)

अफगानिस्तान
से अमेरिका की वापसी होते ही सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। ताजा समाचारों के अनुसार, मुल्ला बरादर या मुल्ला याकूब को अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री तो मुल्ला अखुंदजादा को ईरान की तर्ज पर 'सुप्रीम लीडर' बनाने के आसार बनते दिख रहे हैं।

पूरी संभावना है कि आने वाले कुछ ही दिन में अफगानिस्तान में कट्टर तालिबान की शरिया को लागू करने वाली सरकार बन सकती है। हालांकि खबर यह भी है कि काबुल, हेरात, हेलमंड, कंधार आदि स्थानों पर शरिया का कोड़ा चलाया जाने लगा है।

सूत्रों के अनुसार, अफगानिस्तान में नई बनने वाली तालिबान की सरकार नए 'सुप्रीम लीडर' के तहत चलेगी। नई 'सुप्रीम काउंसिल' में 11 से लेकर 70 सदस्य तक रखे जा सकते हैं। देश के प्रधानमंत्री के लिए मुल्ला बरादर या मुल्ला याकूब के नामों पर उठापटक चल रही है। ये मुल्ला याकूब उसी मुल्ला उमर का कट्टर मजहबी बेटा है जो तालिबान का सरगना रहा था।

अभी तक की जानकारी यही है कि कुछ दिन पहले तक पेशावर में मौजूद बताया जा रहा, मुल्ला अखुन्दज़ादा 'सुप्रीम लीडर' बनने के बाद कंधार में रहने वाला है जबकि प्रधानमंत्री और सरकार के बाकी सदस्य काबुल से काम देखेंगे। चर्चा यह भी है कि तालिबान देश के वर्तमान संविधान को निरस्त करके 55 साल पुराने संविधान को दुबारा लागू कर सकते हैं। इसके पीछे तालिबानी सोच यह है कि वर्तमान संविधान पश्चिमी देशों की सरपरस्ती में बनाया गया था। जैसी कई दिनों से आशंका जताई जा रही थी, पाकिस्तान नई सरकार के गठन में काफी हस्तक्षेप करने की कोशिश में है। उसकी कोशिश है कि उसकी हुकूमत के प्रति नरम रुख रखने वाले मजहबी नेताओं को बड़े वाले मंत्रालय दिए जाएं।

सरकार बनाने को लेकर दोहा से कंधार तक तालिबानी सरगनाओं में चर्चा चल रही है। कट्टर मजहबियों का मानना है कि सरकार में कट्टर सोच वाले लोग ही लिए जाएं। लेकिन, बताते हैं दोहा का गुट दूसरे पक्षों को भी सरकार में ओहदे देने की सोचता है।

सरकार बनाने को लेकर दोहा से कंधार तक तालिबानी सरगनाओं में चर्चा चल रही है। कट्टर मजहबियों का मानना है कि सरकार में कट्टर सोच वाले लोग ही लिए जाएं। लेकिन, बताते हैं दोहा का गुट दूसरे पक्षों को भी सरकार में ओहदे देने की सोचता है।

यह भी संभव है कि गैर तालिबानी गुट वालों को 'सुप्रीम काउंसिल' के साथ ही कुछ मंत्रालयों में भी कहीं रखा जाए। उधर मसूद की अगुआई वाला 'नार्दन एलायंस' भी सरकार में हिस्सेदारी की चाहत रखता है। तालिबान और उसके बीच इस बारे में बातचीत कई दिन से चल रही है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा सामने नहीं आया है।