झामुमो और कांग्रेस के बीच बढ़ने लगी हैं दूरियां !!

    दिनांक 10-सितंबर-2021   
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झारखंड सरकार में शामिल कांग्रेस और झामुमो के बीच खटपट होने की आहट मिली है। कांग्रेस के एक विधायक के अनुसार झामुमो जो भी निर्णय लेता है उसमें कांग्रेस की राय तक नहीं ली जाती है। इस कारण कई कांग्रेसी नेता सरकार से नाराज चल रहे हैं। इसका परिणाम क्या होगा, यह समय बताएगा।
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एक चुनावी मंच पर हेमंत सोरेन और राहुल गांधी (फाइल चित्र)

इस समय में झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और लालू प्रसाद की पार्टी राजद की मिली—जुली सरकार है। सबसे बड़ा दल झामुमो है और इसलिए उसके नेता हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हैं। भाजपा को हराने के लिए ये तीनों दल साथ में आए थे और इसमें ये सफल भी रहे। 2019 के विधानसभा चुनाव में इस गठबंधन ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया। अब हेमंत सोरेन कुछ ऐसे निर्णय लेने लगे हैं, जिनसे कांग्रेसी नेताओं को डर लगने लगा है। उन्हें लग रहा है कि सरकार कुछ ऐसे निर्णय ले रही है, जिनसे कांग्रेस के परम्परागत मतदाता अपनी ही पार्टी से नाराज हो रहे हैं। इस कारण झामुमो और कांग्रेस के बीच दूरियां बढ़ने लगी हैं।

हालिया मामला विधानसभा में नमाज कक्ष का आवंटन है। कांग्रेस के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नमाज कक्ष का आवंटन करने से पहले कांग्रेस से राय भी नहीं ली गई। उन्होंने यह भी बताया कि इसकी जानकारी मीडिया के जरिए कांग्रेसी नेताओं को इुई। उनका यह भी कहना है कि झामुमो से गठबंधन करके कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बाहर तो कर दिया है, लेकिन अब यह गठबंधन कांग्रेस के लिए घातक बनता जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झामुमो बहुत ही चालाकी के साथ कांग्रेस के मतदाताओं को अपनी ओर खींच रहा है और कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों राज्य सरकार ने नई नियोजन नीति बनाई है। इससे भोजपुरी, मगही, मैथिली जैसी भाषाओं को बाहर कर दिया गया है। इसका सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को हुआ है, क्योंकि इन भाषाओं का प्रयोग करने वालों में कांग्रेस के समर्थक बड़ी संख्या में हैं। ऐसे लोगों को लग रहा है कि राज्य सरकार में कांग्रेस के रहते हुए भी उनकी भाषाओं को बाहर कर दिया गया।

ऐसे ही उन्होेंने विधानसभा में नमाज कक्ष के आवंटन को भी कांग्रेस के लिए नुकसान माना है। उनका तर्क है कि इस निर्णय का पूरा श्रेय झामुमो को दिया जा रहा है। यानी झामुमो ने मुसलमानों को अपने पाले में करने का प्रयास किया है, जबकि मुसलमान परम्परागत रूप से कांग्रेस के मतदाता रहे हैं, यह अलग बात है कि कभी इधर—उधर हो जाते हैं। वहीं नमाज कक्ष मामले को जिस तरह से भाजपा ने उठाया है, उससे मतदाताओं का ध्रुवीकरण होता दिख रहा है। प्राय: हिन्दू मान रहे हैं कि विधानसभा में नमाज कक्ष का आवंटन बहुत ही गलत कार्य है। विधायक का कहना है कि इसका पूरा फायदा भाजपा को मिलेगा और इसका मतलब है कांग्रेस का नुकसान।