'औरतें बस बच्चे पैदा करने के लिए हैं, मंत्री बनने के लिए नहीं हैं', तालिबान प्रवक्ता का विवादित बयान

    दिनांक 11-सितंबर-2021   
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हाशमी का कहना है कि कोई औरत मंत्री नहीं बन सकती। ये चीज तो उसके गले में ऐसा कुछ लटकाने जैसा है जिसका वह बोझ नहीं उठा सकती
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काबुल की सड़कों पर अपने अधिकारों की मांग करतीं महिलाएं (फाइल चित्र)। (प्रकोष्ठ में) सईद जकरुल्ला हाशमी 
अफगानिस्तान में महिलाओं के हकों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले तालिबान का उनके प्रति नजरिया एक बार फिर अपनी विद्रूपता के साथ उजगार हुआ है। तालिबान में इन दिना अपने अधिकारों की मांग पर सड़कों पर उतरी महिलाओं से शायद बौखलाते हुए तालिबान ने एक अफगान चैनल से बात करते हुए बहुत ही आपत्तिजनक बात कही है।
तालिबान प्रवक्ता का कहना है-'औरतें बस बच्चे पैदा करने के लिए हैं, मंत्री बनने के लिए नहीं हैं।'
तालिबान लड़ाकों का प्रवक्ता है सईद जकरुल्ला हाशमी, जिसने अफगान चैनल टोलो न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में अपनी मध्ययुगीन मानसिकता का एक बार फिर प्रदर्शन किया है। हाशमी ने कहा, ‘कोई औरत मंत्री नहीं बन सकती। ये चीज तो उसके गले में ऐसा कुछ लटकाने जैसा है जिसका वह बोझ नहीं उठा सकती। मंत्रिमंडल में औरतों का होना बिल्कुल जरूरी नहीं है। उन्हें तो बच्चे पैदा करने चाहिए। सड़क पर उतरी औरतें अफगानिस्तान की सारी महिलाओं की नुमाइंदगी नहीं कर सकती हैं।'
प्रवक्ता सईद जकरुल्ला हाशमी ने टोलो न्यूज को दिए साक्षात्कार में अपनी मध्ययुगीन मानसिकता का एक बार फिर प्रदर्शन किया है। उसने कहा, मंत्रिमंडल में औरतों का होना बिल्कुल जरूरी नहीं है। उन्हें तो बच्चे पैदा करने चाहिए। सड़क पर उतरी औरतें अफगानिस्तान की सारी महिलाओं की नुमाइंदगी नहीं कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले ही दिनों तालिबान ने अपनी 'अंतरिम सरकार' का जमावड़ा सामने रखा है। साफ है कि इसमें सिर्फ पुरुष हैं, कोई महिला या अल्पसंख्यक समाज या फिर किसी दूसरे दल का एक भी नेता नहीं है। दिलचस्प यह है कि इसकी 'कैबिनेट' में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूंखार माने जाने वाले आतंकवादियों को बड़े और खास विभाग दिए गए हैं, जैसे याकूब को रक्षा मंत्री बनाया गया है जो कंधार विमान अपहरण कांड के मुख्य अभियुक्त का बेटा है। हाशमी में लड़ाके हाशमी से जब यह कहा गया कि ‘औरतें तो समाज का आधा हिस्सा मानी जाती हैं’, इस पर उसका कहना था,‘पर हम उनको आधा हिस्सा नहीं मानते। कौन सा आधा हिस्सा? इसमें आधे से यही मतलब निकाला गया कि उन्हें कैबिनेट में जगह दी जाए और इसका कोई मतलब नहीं।' हाशमी का कहना था कि 'औरतों को बस कैबिनेट में हिस्सा चाहिए, हक न भी मिलें तो उनको चलेगा।'
तालिबान लड़ाकों के प्रवक्ता हाशमी ने आगे कहा, ‘गत 20 वर्ष में मीडिया, अमेरिका और अफगानिस्तान में अमेरिका की कठपुतली हुकूमत ने जो कुछ भी कहा, वह दफ्तरों में प्रास्टीट्यूशन के अलावा और क्या था?' हाशमी ने हालांकि यह जोड़ा कि इसके पीछे उसका मतलब सभी अफगानी औरतों से नहीं है। सड़कों पर नारे लगा रहीं चार औरतें पूरे अफगानिस्तान की औरतों की नुमाइंदगी नहीं करतीं। अफगानिस्तान की औरतें तो बच्चे पैदा करके इस्लाम की नैतिक तालीम देती हैं।