अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा कराने के बाद, आतंक पर बैठक कर रहा बहरूपिया पाकिस्तान

    दिनांक 11-सितंबर-2021   
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आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान दुनिया से आतंक खत्म करने की बैठक करके छलावा देने की कोशिश में है। उसे लग रहा है कि ऐसी बैठकोें का दिखावा करके दुनिया के तमाम देशों को यह संकेत दिया जाए कि वह 'आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए कमर कसे हुए है'।
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प्रधानमंत्री इमरान खान 
पाकिस्तान के तालिबान को हर तरह के समर्थन के बारे में कौन नहीं जानता। वहां की अंतरिम सरकार भी पाकिस्तान की दखल से बनी है। इसने और साफ कर दिया है कि पाकिस्तान तालिबान जिहादियों के गले में बाहें डाले है
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के पीछे पाकिस्तान की पूरी भूमिका दुनिया के सामने आ चुकी है। प्रधानमंत्री इमरान खान, जनरल बाजवा और आईएसआई प्रमुख ने किस तरह जिहादी तालिबान को पैसा, हथियार और आतंकी लड़ाके उपलब्ध कराए, इसकी कलई खुल चुकी है। लेकिन अब एफएटीएफ की ग्रे सूची में छटपटा रहे इस्लामी मुल्क ने दिखाने के लिए 'आतंकवाद से मुकाबले' के नाम पर बैठक करने फिर से एक ढोंग रचा है। पाकिस्तान के तालिबान को हर तरह के समर्थन के बारे में कौन नहीं जानता। वहां की अंतरिम सरकार भी पाकिस्तान की दखल से बनी है। इसने और साफ कर दिया है कि पाकिस्तान तालिबान जिहादियों के गले में बाहें डाले है।
सब जानते हैं कि पाकिस्तान के कहने पर ही अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार में हक्कानी नेटवर्क को शामिल किया गया है। मंत्रिमंडल में ज्यादातर चेहरे पाकिस्तान के पसंदीदा जिहादी हैं।
लेकिन एफएटीएफ की ग्रे सूची से अपना नाम हटवाने को छटपटाता पाकिस्तान 'आतंकवाद' पर बैठक करके यह छलावा देने की कोशिश में है कि वह 'अमनपसंद देश' है। दुनिया भर से उस पर पाबंदियां लगने से घबराया पाकिस्तान फिर से 'आतंकवाद के मुकाबला' करने की बात कह रहा है।
समाचारों के अनुसार, प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में 'आतंकवाद और उग्रवाद का मुकाबला करने की चिंता' की गई। इसके लिए तमाम तरीकों की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय कार्य योजना समिति की इस बैठक में विदेश, रक्षा, वित्त, आंतरिक तथा सूचना मंत्रियों के साथ ही सेनाध्यक्ष, आईएसआई मुखिया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, प्रांतों के मुख्यमंत्री तथा दूसरे बड़े सैन्य और असैन्य अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के बाद जारी हुए बयान के अनुसार, उसमें राष्ट्रीय कार्य योजना के अलग अलग पहलुओं पर बात हुई और देखा गया कि आज तक कितना काम हुआ है। इस योजना को 2014 में पेशावर में स्कूल पर हुए आतंकी हमले के बाद 'आतंकवाद को जड़ से खत्म' करने के लिए शुरू किया गया था। बताया गया कि समिति ने राष्ट्रीय कार्य योजना के अल्पकालिक, मध्यम तथा दीर्घकालिक मकसदों पर चर्चा की।
उल्लेखनीय है कि अपने यहां दुनियाभर के आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान दुनिया से आतंक खत्म करने की बैठक करके छलावा देने की कोशिश में है। उसे लग रहा है कि ऐसी बैठकोें का दिखावा करके दुनिया के तमाम देशों को यह संकेत दिया जाए कि वह 'आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए कमर कसे हुए है'। उसे यह भी लगता है कि इस तरह की हरकतों से वह एफएटीएफ को रिझा कर ग्रे सूची से बाहर आ सकता है और दुनिया के विभिन्न देशों से अनुदान ले सकता है। इस पैसे से ही वह कथित तौर पर आतंकवाद को पोसता आ रहा है।