किसान रेल से आगरा का आलू पहुंचा असम

    दिनांक 11-सितंबर-2021   
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किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने में 'किसान रेल' अहम भूमिका निभाने लगी है। पिछले दिनों आगरा से 270 टन आलू लेकर एक रेलगाड़ी असम पहुंची। इसका फायदा किसानों को हुआ है। पहले ये किसान दूर तक अपनी उपज नहीं भेज पाते थे, इस कारण उन्हें अच्छा भाव नहीं मिलता था।
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गत वर्ष अगस्त में शुरू हुई 'किसान रेल योजना' का लाभ किसानों को मिलने लगा है। कुछ दिन पहले आगरा और उसके आसपास के क्षेत्रों से लगभग 270 टन आलू लेकर एक किसान रेल असम पहुंची है। इससे आगरा सहित अनेक जिलों के किसानों को आलू का अच्छा भाव मिल रहा है। पहले ऐसा नहीं हो पाता था। किसान खुद अपनी उपज असम जैसे सुदूर राज्यों तक नहीं ले जा सकता है। इस कारण उन्हें उचित भाव नहीं मिलता था। अब किसान रेल से कोई भी किसान अपनी उपज को देश के किसी भी हिस्से में भेज सकता है।
बता दें कि 7 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसान रेल योजना का आरंभ किया गया था। इस योजना के अंतर्गत किसानों की फसलों को दूसरे राज्यों की मंडी तक पहुंचाने के लिए रेल की सुविधा प्रदान की जा रही है। 28 दिसंबर, 2020 को इस योजना के अंतर्गत 100वीं रेल पश्चिम बंगाल के शालीमार के लिए महाराष्ट्र के संगोला से चली थी। अब ऐसी किसान रेल पूरे भारत से चल रही है।
उल्लेखनीय है कि कोरोना काल में किसान अपनी उपज बेच नहीं पा रहे थे। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसान रेल योजना को आरम्भ किया है। इसके माध्यम से किसान अपनी सब्जी और फलों को समय से सुरक्षित मंडी तक पंहुचा रहे हैं। इस योजना के ज़रिए किसानों को उनकी फसल का अच्छा फायदा मिल रहा है।
किसान रेल में किसानों को फल, सब्जियों और डेयरी उत्पादों सहित उनकी उपज की बुकिंग के समय परिवहन पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। शेष 50 प्रतिशत फलों और सब्जियों के परिवहन के लिए 'ऑपरेशन ग्रीन्स-टॉप टू टोटल' योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा वहन किया जाता है।
उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि किसान रेल समयबद्ध रूप से चलती हैं। किसानों का कच्चा माल समय से गंतव्य तक पहुंच सके इसका पूरा ध्यान रखा जाता है।
इसी तरह पिछले दिनों सूरत से एक रेलगाड़ी कपड़ों को लेकर बिहार पहुंची है। इन रेलगाड़ियों से किसी भी व्यक्ति के लिए कारोबार करना आसान हो गया है।